पुष्कर में जलझूलनी एकादशी पर गाजे-बाजे संग निकली भगवान की पावन रेवाड़ियाँ

पुष्कर में जलझूलनी एकादशी पर गाजे-बाजे संग निकली भगवान की पावन रेवाड़ियाँ

सरोवर किनारे धर्म-संगम में डूबा नगर

03 सितंबर 2025। सुनील शर्मा।टेलीग्राफ टाइम्स 

पुष्कर। (हरिप्रसाद शर्मा) तीर्थराज पुष्कर की पवित्र धरा पर बुधवार को जलझूलनी एकादशी का परम पावन महापर्व श्रद्धा, उत्साह और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। हर वर्ष की भाँति इस बार भी नगर के मंदिरों से भगवान की भव्य रेवाड़ियाँ गाजे-बाजे, शंख-घंटियों और मंगलध्वनियों के बीच नगर भ्रमण करते हुए मुख्य गऊघाट पहुँचीं।

सभी समाजों की भागीदारी

विशेष बात यह रही कि यह रेवाड़ियाँ नगर के विभिन्न समाजों के मंदिरों से शोभायात्रा के रूप में निकाली गईं। वराह मंदिर, जोगणियां धाम बसीठा समाज, जीनगर समाज, रावणा राजपूत समाज, धोबी समाज, सरगरा समाज, कुमावत समाज, रैगर समाज और जांगिड़ समाज सहित कई मंदिरों से भगवान की पालकियों में रेवाड़ियाँ रवाना हुईं। रास्ते भर ढोल-नगाड़ों की थाप, भक्तिरस से भरे भजन-कीर्तन और जयघोषों से पूरा नगर गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया।

धार्मिक मान्यता और आस्था

धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु जलविहार करते हैं। मान्यता है कि उनके दर्शन और स्नान से भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि जलझूलनी एकादशी का पर्व पुष्कर सरोवर पर हर साल आस्था और भक्ति का विराट संगम बनकर प्रकट होता है।

महाआरती और स्नान

गऊघाट पर भगवान की रेवाड़ियों का स्नान और महाआरती की गई। इसके पश्चात भगवान की पालकियाँ पुनः अपने-अपने मंदिरों की ओर लौट गईं। दिनभर पुष्कर नगर में भक्ति, श्रद्धा और उत्सव का वातावरण बना रहा।

 

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