पुष्कर में कार्तिक पूर्णिमा पर आस्था का सागर — लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई पुण्य की डुबकी, महाआरती के साथ संपन्न हुआ प्रसिद्ध मेला
अजमेर / हरि प्रसाद शर्मा पुष्कर
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त तीर्थस्थल पुष्कर में बुधवार को कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर भीष्म पंचतीर्थ स्नान का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन आस्था, भक्ति और भारतीय संस्कृति के अद्भुत संगम का साक्षी बना। भोर की पहली किरण के साथ ही ब्रह्म सरोवर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। दूर-दूर से आए लाखों श्रद्धालुओं ने “हर हर गंगे” और “जय ब्रह्मा देव” के जयघोषों के बीच पवित्र सरोवर में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जन किया।

मोक्ष और पाप विमोचन की आस्था ने खींचा जनसैलाब
हिंदू परंपरा के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा पर पंचतीर्थ स्नान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन ब्रह्म सरोवर में स्नान करने से समस्त पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी श्रद्धा के साथ राजस्थान सहित देश के विभिन्न राज्यों — उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली से श्रद्धालु पुष्कर पहुंचे।
सरोवर के 52 घाटों पर स्नान का क्रम दिनभर चलता रहा। श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद भगवान ब्रह्मा मंदिर, विष्णु मंदिर और पापमोचनी तीर्थ में पूजा-अर्चना की। इस वर्ष महिलाओं की उपस्थिति पुरुषों की तुलना में अधिक रही, जिससे घाटों पर विशेष चहल-पहल बनी रही।
भक्ति और दीपों से जगमगाया पुष्कर धाम
सुबह से ही पूरा पुष्कर धाम भक्ति से सराबोर नजर आया। घाटों पर मंत्रोच्चार, आरती और दीपदान के दृश्यों ने वातावरण को दिव्य बना दिया। श्रद्धालुओं ने परिवार सहित सरोवर के चारों ओर दीप प्रज्ज्वलित किए, जिससे पुष्कर की पावन वेला एक स्वर्गीय दृश्य में बदल गई।
सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम
जिला प्रशासन और पुलिस ने स्नान पर्व को लेकर चाक-चौबंद व्यवस्था की।
- चार लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने सरोवर में डुबकी लगाई।
- सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस बल, होमगार्ड और स्वयंसेवक तैनात किए गए।
- पूरे क्षेत्र में ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी गई।
- घाटों पर सफाई, पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाओं के लिए विशेष दल तैनात रहे।
महाआरती के साथ संपन्न हुआ पुष्कर मेला
कार्तिक पूर्णिमा के पावन स्नान के साथ ही पुष्कर का प्रसिद्ध धार्मिक मेला संपन्न हुआ।
शाम को जयपुर घाट, गौ घाट, ब्रह्म घाट सहित प्रमुख घाटों पर महाआरती का भव्य आयोजन किया गया। आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने दीपों से सरोवर को आलोकित किया और मंत्रध्वनियों के बीच पुष्कर की दिव्यता चरम पर पहुंच गई।
श्रद्धालु लौटे आत्मिक शांति और संतोष के साथ
स्नान और पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालु पुण्य लाभ की अनुभूति और मन की शांति लेकर अपने घरों को लौटे। पुष्कर का यह वार्षिक महास्नान एक बार फिर भारतीय संस्कृति, श्रद्धा और आस्था के अद्भुत संगम का प्रतीक बन गया।