पुष्कर में आस्था का महासैलाब: सोमवती अमावस्या पर 3 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी, अधिक मास का 5 दिवसीय महास्नान संपन्न

अव्यवस्थाओं के बीच सिविल डिफेंस ने बचाई कई जानें; गौ घाट पर बिगड़े हालात, ब्रह्मा मंदिर में हुआ दिव्य श्रृंगार

अजमेर/पुष्कर।

विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: हरिप्रसाद शर्मा, पुष्कर/अजमेर

धार्मिक नगरी पुष्कर में सोमवार को सोमवती अमावस्या के पावन पर्व पर आस्था का ऐसा महासैलाब उमड़ा कि चारों ओर जनसमुद्र ही नजर आया। इसी के साथ तीन साल में एक बार आने वाले ‘अधिक मास’ के पांच दिवसीय महास्नान की भी विधि-विधान से महापूर्णाहुति हो गई। इस बार अधिक मास का समापन सोमवती अमावस्या के दुर्लभ संयोग के साथ होने से तीर्थराज पुष्कर में रिकॉर्डतोड़ भीड़ दर्ज की गई। अनुमान के मुताबिक, करीब 3 लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर के विभिन्न घाटों पर डुबकी लगाकर अक्षय पुण्य कमाया। भीड़ का आलम यह था कि पुष्कर के इतिहास में इस पर्व पर पहले कभी ऐसी बेकाबू भीड़ नहीं देखी गई।

​शास्त्रों के अनुसार, सोमवती अमावस्या पर पुष्कर सरोवर में स्नान व दान-पुण्य करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।

सिविल डिफेंस के जांबाजों ने बचाई कई जिंदगियां, टले बड़े हादसे

​पवित्र सरोवर के 52 घाटों पर उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से सिविल डिफेंस के 30 स्वयंसेवकों को तैनात किया था। स्नान के दौरान गहरे पानी का अंदाजा न होने के कारण कई युवक सरोवर में डूबने लगे। घाटों पर मुस्तैद सिविल डिफेंस के जवानों ने तत्परता और फुर्ती दिखाते हुए डूब रहे कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

जांबाज किशन गोपाल ने दिया नया जीवन

​सरोवर के एक घाट पर गहरे पानी में डूब रहे एक युवक के लिए सिविल डिफेंस के स्थानीय स्वयंसेवक किशन गोपाल जाट देवदूत बनकर सामने आए। किशन गोपाल ने अपनी जान की परवाह न करते हुए पानी में छलांग लगाई और डूबते युवक को सकुशल बाहर निकालकर उसे नया जीवनदान दिया।

 

गौ घाट पर बिगड़े हालात: बच्चे रोए, बुजुर्ग परेशान; प्रशासन की खुली पोल

​सोमवती अमावस्या पर पुष्कर के प्रसिद्ध गौ घाट क्षेत्र में व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गईं। भारी भीड़ के दबाव के कारण हालात इतने बदतर हो गए कि श्रद्धालुओं का एक कदम आगे बढ़ाना भी दूभर हो गया। भीड़ में फंसे बच्चे डर के मारे रोते-चिल्लाते दिखे, वहीं बुजुर्ग और महिला श्रद्धालु सफोकेशन (घुटन) के कारण बेहाल नजर आए।

​गनीमत रही कि भगवान पुष्करराज की असीम कृपा से कोई बड़ा हादसा या भगदड़ नहीं हुई, अन्यथा परिणाम बेहद गंभीर हो सकते थे। स्थानीय नागरिकों ने रोष जताते हुए कहा कि प्रशासन को इतने बड़े पर्व पर भीड़ नियंत्रण, वैकल्पिक मार्ग और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने चाहिए थे। गौ घाट की यह स्थिति भविष्य के लिए एक बड़ी चेतावनी है।

जाम और गंदगी से त्रस्त रहे श्रद्धालु

​एक तरफ जहाँ भक्तों में आस्था का उत्साह था, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक नाकामी ने श्रद्धालुओं के इस उत्साह को फीका करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

  • भीषण जाम: अजमेर रोड, नागौर रोड और मेड़ता रोड पर सुबह से ही वाहनों की किलोमीटर लंबी कतारें लगी रहीं। पार्किंग व्यवस्था फेल होने के कारण श्रद्धालुओं को 2 किलोमीटर पहले ही गाड़ियां छोड़कर कड़कती धूप में पैदल चलना पड़ा।
  • गंदगी के ढेर: मुख्य घाटों और मुख्य परिक्रमा मार्ग पर जगह-जगह कचरे के ढेर लगे रहे, जिन्हें उठाने की नगर पालिका या प्रशासन की कोई समुचित व्यवस्था नजर नहीं आई।

ब्रह्मा मंदिर में दिव्य श्रृंगार, दर्शन के लिए लगी लंबी कतारें

​सोमवती अमावस्या के अवसर पर विश्व प्रसिद्ध जगतपिता ब्रह्मा मंदिर को फल, फूल और आकर्षक रंग-बिरंगी रोशनी से अलौकिक रूप से सजाया गया। ब्रह्ममुहूर्त में मंगला आरती के बाद से ही ब्रह्मा जी के दिव्य दर्शनों के लिए भक्तों की मीलों लंबी कतारें लग गईं। इसके अलावा सावित्री माता मंदिर, वराह मंदिर और रंगजी मंदिर सहित पुष्कर के तमाम देवालयों में दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।

भीड़ में बिछड़ीं 60 वर्षीय उमराव कंवर, परिजन परेशान

​आस्था के इस महाकुंभ के बीच एक दुखद घटना भी सामने आई। नागौर जिले के दागड़ी गांव से सोमवती अमावस्या का स्नान करने आईं 60 वर्षीय महिला उमराव कंवर सरोवर क्षेत्र में मची भारी

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