पुष्कर: संस्कृत के साधक नेहरू पंडित उपखंड स्तर पर सम्मानित, संस्कृत सेवा के लिए मिला प्रशस्ति पत्र
पुष्कर (हरिप्रसाद शर्मा)। तीर्थ नगरी पुष्कर के प्रसिद्ध मेला मैदान में आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस के उपखंड स्तरीय मुख्य समारोह में संस्कृत भाषा के उत्थान और प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित नेहरू पंडित को उनकी विशिष्ट सेवाओं हेतु सम्मानित किया गया।
अतिथियों ने किया प्रतिभा का सम्मान
समारोह के मुख्य अतिथि उपखंड अधिकारी (SDM) गुरु प्रसाद तंवर, नगर परिषद आयुक्त जनार्दन शर्मा और इंद्रजीत सिंह चौहान ने नेहरू पंडित को संस्कृत सेवक के रूप में प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। प्रशासनिक अधिकारियों ने पंडित के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि देववाणी संस्कृत को जन-जन तक पहुँचाने के उनके प्रयास सराहनीय और प्रेरणादायक हैं।
30 से अधिक निःशुल्क शिविरों का आयोजन
नेहरू पंडित लंबे समय से संस्कृत भारती, भारत संस्कृत परिषद और विश्व संस्कृत प्रतिष्ठान जैसे प्रतिष्ठित संगठनों के माध्यम से संस्कृत की सेवा कर रहे हैं। उनके द्वारा अब तक:
- निःशुल्क संभाषण: 30 से अधिक निःशुल्क संस्कृत संभाषण शिविरों का सफल आयोजन किया गया।
- रचनात्मक कार्य: संस्कृत काव्य रचना, लेख लेखन और नाटकों के माध्यम से इस प्राचीन भाषा को आधुनिक स्वरूप में प्रस्तुत किया।
- अभिनव प्रयोग: विशेष रूप से संस्कृत गीतों, फिल्मी गीतों और गजलों का संस्कृत में रूपांतरण कर युवाओं के बीच इस भाषा को लोकप्रिय बनाने का कार्य किया।
संस्कृत के प्रचार-प्रसार का संकल्प
सम्मान प्राप्त करने के बाद नेहरू पंडित ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति का आधार है। उनका लक्ष्य है कि आधुनिक समय में भी लोग संस्कृत में सहजता से संवाद कर सकें।
”देववाणी संस्कृत का प्रचार-प्रसार मेरे जीवन का मुख्य ध्येय है। यह सम्मान मुझे भविष्य में और अधिक तत्परता से अपनी संस्कृति की सेवा करने की ऊर्जा प्रदान करेगा।” — नेहरू पंडित
पुष्कर में हर्ष का माहौल
नेहरू पंडित के इस सम्मान पर पुष्कर के विद्वानों, पुजारियों और गणमान्य नागरिकों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। उनका मानना है कि इस तरह के सम्मान से अन्य युवाओं में भी अपनी गौरवशाली भाषा और परंपराओं के प्रति रुचि जागृत होगी।
