पुष्कर: त्रयोदशी पुष्कर अरण्य प्रदक्षिणा का शुभारंभ, संत-महंतों व जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति में शुरू हुआ आध्यात्मिक यात्रा का पाँच दिवसीय आयोजन

पुष्कर: त्रयोदशी पुष्कर अरण्य प्रदक्षिणा का शुभारंभ, संत-महंतों व जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति में शुरू हुआ आध्यात्मिक यात्रा का पाँच दिवसीय आयोजन

By : सुनील शर्मा 
टेलीग्राफ टाइम्स
जुलाई 19,2025

(हरिप्रसाद शर्मा, पुष्कर)
पवित्र तीर्थराज पुष्कर में रविवार को त्रयोदशी के पावन अवसर पर गायत्री शक्ति परिवार की ओर से त्रयोदशी पुष्कर अरण्य प्रदक्षिणा का शुभारंभ हुआ। यह कार्यक्रम आध्यात्मिक जागरण, तीर्थ संरक्षण और सांस्कृतिक चेतना को समर्पित है। प्रातः 6:00 बजे से सामूहिक जप, ध्यान और गायत्री यज्ञ तथा सतसंकल्प पाठ के साथ आयोजन का शुभारंभ हुआ। इसके बाद 8:00 से 9:30 बजे तक मुख्य उद्‍घाटन समारोह सम्पन्न हुआ।

Photo credit Telegraph Times

धार्मिक गरिमा और संत सान्निध्य

इस अवसर पर राम सखा आश्रम पीठाधीश्वर, आचार्य महामंडलेश्वर 1008 नंदराम शरण देवाचार्य सहित अनेक पीठाधीश्वर, संत-महंतगण, समाजसेवी और संस्थाओं के प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत, धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत, जनप्रतिनिधि और स्थानीय सामाजिक संगठनों के प्रमुख लोग भी मौजूद रहे।

परंपराओं के अनुसार विधिवत शुभारंभ

आयोजन का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, आसन ग्रहण, स्वागत भाषण, कार्यक्रम प्रतिवेदन, और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। इसके पश्चात संतों के आशीर्वचन, ब्रह्मा जी व ज्योति कलश रथ का पूजन हुआ तथा रथ को हरी झंडी दिखाकर तीर्थ यात्रा की शुरुआत की गई।

तीर्थों की परिक्रमा और ग्रामीण जागरण

प्रदक्षिणा यात्रा ब्रह्मा मंदिर पर आरती के बाद कपालेश्वर महादेव, सावित्री माता मंदिर, पूरूहुता शक्तिपीठ, राजराजेश्वरी मणिवैदिक गायत्री शक्तिपीठ, चामुंडा माता, और सर्वानंद भैरव के दर्शन और पुष्पांजलि के साथ आगे बढ़ी। यह यात्रा मोतीसर, कानबाय, ककड़ेश्वर, मकड़ेश्वर होते हुए रात्रि विश्राम हेतु नांद गांव पहुंचेगी।

पाँच दिवसीय आयोजन की रूपरेखा

इस पाँच दिवसीय आयोजन के दौरान 24 कोसीय पदयात्रा, 84 कोसीय रथयात्रा, और ग्राम-ग्राम तीर्थ पूजन का भव्य आयोजन होगा। आयोजन का समन्वय तीर्थ जागरण अभियान के समन्वयक घनश्याम पालीवाल द्वारा किया जा रहा है।

इस आयोजन का उद्देश्य न केवल तीर्थों की परिक्रमा करना है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में तीर्थों की महत्ता, संरक्षण और आध्यात्मिक चेतना का संदेश फैलाना भी है।

 

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