पुष्कर गायत्री शक्तिपीठ का 45वां पाट महोत्सव शुरू: 24 घंटे का अखंड जाप और दीप महायज्ञ के साथ गूंजा मंत्र

पुष्कर गायत्री शक्तिपीठ का 45वां पाट महोत्सव शुरू: 24 घंटे का अखंड जाप और दीप महायज्ञ के साथ गूंजा मंत्र

पुष्कर/अजमेर। (हरिप्रसाद शर्मा) तीर्थराज पुष्कर स्थित गायत्री शक्तिपीठ का 45वां पाट महोत्सव सोमवार को पूरी श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के साथ शुरू हुआ। महोत्सव के पहले दिन शक्तिपीठ परिसर मंत्रों की ध्वनि से गुंजायमान रहा, जिसमें बड़ी संख्या में परिजनों और साधकों ने भागीदारी की।

​साधना कक्ष में 24 घंटे का अखंड जाप

​महोत्सव का शुभारंभ सोमवार प्रातः 6:00 बजे से 24 घंटे के अखंड जाप के साथ हुआ। यह जाप उस विशेष साधना कक्ष में किया जा रहा है, जहाँ परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने वर्ष 1980 में अपने पांच दिवसीय प्रवास के दौरान साधना की थी। गुरुदेव की तपोस्थली होने के कारण इस कक्ष में जाप करना साधकों के लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभव रहा।

​दीप महायज्ञ से आलोकित हुई शक्तिपीठ

​सायंकाल 5:00 बजे गायत्री दीप महायज्ञ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर:

  • ​गायत्री मंदिर, शिवालय, प्रखर प्रज्ञा, सजल श्रद्धा स्थल और भव्य यज्ञशाला को दीपों से सजाया गया।
  • ​पूरे परिसर में दीपदान किया गया, जिससे शक्तिपीठ का वातावरण अलौकिक और दिव्य नजर आया।
  • ​परिजनों ने सामूहिक रूप से विश्व कल्याण और राष्ट्र की सुख-समृद्धि की कामना की।

​मंगलवार के विशेष आयोजन: युग निर्माण सम्मेलन

​महोत्सव के दूसरे दिन यानी मंगलवार को प्रातः 5:00 बजे से गायत्री माता के पाट महोत्सव के अंतर्गत विभिन्न मांगलिक और अभिषेक कार्यक्रम संपन्न किए जाएंगे।

नवयुग का संविधान: 18 सत्संकल्प

दोपहर 11:30 बजे से ‘युग निर्माण सम्मेलन’ का आयोजन होगा। यह सम्मेलन वैचारिक क्रांति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि:

  • ​गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने 1959-69 के हिमालय प्रवास के बाद वापस लौटकर युग निर्माण योजना के उद्देश्यों और शतसूत्री कार्यक्रमों की घोषणा की थी।
  • ​उन्होंने गीता के 18 अध्यायों की भांति 18 सत्संकल्प जारी किए थे, जिन्हें ‘युग निर्माण घोषणा पत्र’ या नवयुग का संविधान माना जाता है।
  • ​सम्मेलन के दौरान इन संकल्पों का वाचन किया जाएगा और वर्तमान समय में इनकी प्रासंगिकता पर गहन विवेचन किया जाएगा।

​परिजनों में भारी उत्साह

​पाट महोत्सव के उपलक्ष्य में पुष्कर गायत्री शक्तिपीठ को विशेष रूप से सजाया गया है। स्थानीय निवासियों के साथ-साथ दूर-दराज से आए गायत्री परिजन इस उत्सव में भाग ले रहे हैं। शक्तिपीठ प्रबंधन ने सभी श्रद्धालुओं से इन कार्यक्रमों में सम्मिलित होकर पुण्य लाभ कमाने की अपील की है।

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