पुष्कर अरण्य तीर्थ प्रदक्षिणा का भव्य आगाज़, आध्यात्मिक ऊर्जा से गुंजायमान हुआ तीर्थराज पुष्कर

पुष्कर अरण्य तीर्थ प्रदक्षिणा का भव्य आगाज़, आध्यात्मिक ऊर्जा से गुंजायमान हुआ तीर्थराज पुष्कर

By : नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
जुलाई 21,2025

(हरिप्रसाद शर्मा) पुष्कर/अजमेर।
गायत्री परिवार द्वारा आयोजित त्रयोदशी पुष्कर अरण्य तीर्थ प्रदक्षिणा का शुभारंभ रविवार प्रातः गायत्री शक्तिपीठ, पुष्कर से भव्य वैदिक मंत्रोच्चार, पूजन एवं दो दिव्य रथों के रवाना होने के साथ हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर पूरे पुष्कर में आध्यात्मिक उल्लास एवं धर्ममय वातावरण देखने को मिला।

विशिष्ट अतिथियों ने दिखायी हरी झंडी

प्रदक्षिणा का शुभारंभ राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं माटी कला संस्कृति संरक्षण बोर्ड के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत, महामंडलेश्वर रामसखा आचार्य नंदराम शरण देवाचार्य, पूर्व सभापति कमल पाठक, पंडित कैलाश नाथ दाधीच, सामाजिक कार्यकर्ता अरुण पाराशर सहित अनेक संत-महापुरुषों व तीर्थ पुरोहितों की उपस्थिति में हुआ।
गायत्री परिवार की ओर से अतिथियों का स्वागत ओमप्रकाश अग्रवाल ने गायत्री मंत्र पट्टिकाएं पहनाकर व तिलक कर किया।

शुभारंभ समारोह का भव्य आयोजन

मंच संचालन गोपाल स्वामी ने किया जबकि स्वागत उद्बोधन गायत्री शक्तिपीठ पुष्कर के व्यवस्थापक सुरेश शर्मा ने दिया। घनश्याम पालीवाल ने यात्रा के उद्देश्य, महत्व व अब तक की तैयारियों की विस्तार से जानकारी दी।

सरकारी सहयोग का मिला आश्वासन

ओंकार सिंह लखावत ने अपने संबोधन में कहा कि पुष्कर तीर्थ की 24 कोसी परिक्रमा को सुव्यवस्थित करने का संकल्प लिया गया है। उन्होंने वादा किया कि अगले वर्ष तक इस मार्ग को अधिक सुविधाजनक बनाने हेतु हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। साथ ही यह भी बताया कि सावित्री माताराजराजेश्वरी मणि वेदिका तक अलग परिक्रमा पथ बनाया जाएगा। सिद्ध पाइथन पर्वत की भी विशेष परिक्रमा योजना तैयार की जा रही है।

ज्योति कलश और रथ यात्रा बनी आकर्षण का केंद्र

इस यात्रा में दो रथ शामिल हैं — एक ब्रह्मा जी का रथ, तथा दूसरा गायत्री परिवार के शांतिकुंज, हरिद्वार से आया हुआ मातृ शक्ति एवं अखंड दीप ज्योति कलश
यात्रा ब्रह्मा जी के दर्शन से शुरू होकर सावित्री माता, कपालेश्वर, मोतीसर, कानबाय, ककड़ेश्वर होते हुए नंदगांव में विश्राम के लिए रुकी।

श्रद्धालुओं का उत्साह और सहभागिता

सुबह 8 बजे तक उज्जैन, इंदौर, मालवा, मेवाड़, वागड़, शेखावाटी, बीकानेर, भरतपुर, अलवर, सीकर, झुंझुनू व जयपुर सहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से 500 से अधिक श्रद्धालु पदयात्रा में सम्मिलित हुए। यात्रा के तहत 24 टोलियां अलग-अलग गांवों में शिव अभिषेक, गायत्री यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठानों हेतु पूजा सामग्री लेकर रवाना हुईं।

सेवा कार्य बना यात्रा की विशेषता

  • मोतीसर में ग्रामवासियों व सरपंच की ओर से 700 यात्रियों को निःशुल्क प्रातः भोजन कराया गया।
  • जयमल कोट समिति द्वारा यात्रियों के लिए जलपान व नाश्ते की व्यवस्था की गई।
  • यात्रा में दो सेवा गाड़ियाँ भी शामिल हैं, जिनके माध्यम से जल स्रोतों की सफाई और वृक्षारोपण अभियान चलाया जा रहा है।
  • हेमंत चतुर्वेदी के नेतृत्व में क्षीर सागर कुंड, कानबाय, नंदा सरस्वती कुंड, मकड़ेश्वर कुंड आदि की सफाई की गई।

दीपदान व पर्यावरणीय पहल

रात्रि विश्राम के दौरान नंदगांव में दीपदान किया गया। यात्रा के दौरान हर स्थान पर वृक्षारोपण कर पर्यावरण-संदेश भी दिया जा रहा है। इस त्रयोदशी तीर्थ यात्रा का अंक ज्योतिष में विशेष महत्व माना गया है। यह यात्रा शिव आराधना और सूर्य-राहु शांति के उद्देश्य से समर्पित की गई है।

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