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पुराणों में वर्णित गुरू की महिमा – दाधीच
Edited By : सुनील शर्मा
टेलीग्राफ टाइम्स
जुलाई 09,2025
(हरिप्रसाद शर्मा) पुष्कर/अजमेर।
धार्मिक नगरी पुष्कर में आगामी गुरु पूर्णिमा पर्व इस बार विशेष ज्योतिषीय योग के साथ मनाया जाएगा। पं. कैलाशनाथ दाधीच के अनुसार, इस वर्ष आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा, 10 जुलाई गुरुवार को पड़ रही है, जो स्वयं ‘गुरुवार’ के दिन होने के कारण और भी अधिक शुभ और दुर्लभ योग बनाता है।
दाधीच ने बताया कि इस दिन पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र, ऐंद्र योग, विष्कुंभ करण, मिथुन राशि में सूर्य तथा धनु राशि में चंद्रमा का संयोग बन रहा है, जो गुरु पूजन के लिए अत्यंत लाभकारी है। उन्होंने कहा कि “ऐसे संयोग वर्षों बाद बनते हैं और इस दिन गुरु पूजन, गुरु मंत्र दीक्षा व गुरु वंदन करने से जीवन में सुख-समृद्धि, शांति एवं आत्मिक उन्नति प्राप्त होती है।”
पुष्कर – तीर्थों का गुरु
पं. दाधीच ने शास्त्रों का हवाला देते हुए बताया कि पुष्कर तीर्थ को “तीर्थों का गुरु” कहा गया है। वेदों, पुराणों एवं ब्रह्मांडीय ग्रंथों में वर्णन है कि पुष्कर तीर्थ आदि तीर्थ है और सतयुग से ब्रह्मा का निवास स्थान रहा है। उन्होंने कहा कि “विश्व के समस्त तीर्थों में पुष्कर का स्थान सबसे उच्चतम है। यहां पर गुरु पूजन करने से हजार गुना फल की प्राप्ति होती है।”
गुरु का स्थान – गोविंद से भी ऊपर
दाधीच ने गुरु की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कबीरदास जी का प्रसिद्ध दोहा उद्धृत किया:
“गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागू पाय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय॥”
उन्होंने कहा कि गुरु के माध्यम से ही व्यक्ति ईश्वर की ओर अग्रसर होता है। गुरु ही जीवन में अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला मार्गदर्शक होता है।
गुरु दीक्षा का श्रेष्ठ मुहूर्त
इस दिन गुरु मंत्र लेने तथा किसी योग्य संत या विद्वान को अपना दीक्षा गुरु बनाने का उत्तम अवसर होता है। दाधीच ने बताया कि “गुरु पूर्णिमा पर गुरु दीक्षा लेना, जीवन में अध्यात्मिक ऊर्जा का प्रवेश कराता है और व्यक्ति का जीवन दिशा व उद्देश्य प्राप्त करता है।”
संन्यासी चातुर्मास एवं वेदव्यास पूजन
गुरु पूर्णिमा के साथ ही वेदव्यास पीठ पूजन, वायु परीक्षा, और सन्यासी चातुर्मास की भी शुरुआत होती है। इस दिन भारतवर्ष में हजारों आश्रमों और गुरुकुलों में विशेष पूजन, प्रवचन और सत्संग का आयोजन होता है।
गुरु पूर्णिमा न केवल श्रद्धा का पर्व है, बल्कि यह आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी श्रेष्ठ अवसर है।

