नरेश गुनानी
जयपुर, 6 जून। राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में शनिवार को पीएम स्वनिधि (प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि) योजना के अंतर्गत लंबित आवेदनों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में योजना के तहत अब तक प्राप्त आवेदनों की स्थिति, ऋण स्वीकृति व वितरण की प्रगति और विभिन्न स्तरों पर लंबित चल रहे मामलों की विस्तार से समीक्षा की गई।
27 जनवरी के बाद आए करीब 35 हजार आवेदन
बैठक में अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, 27 जनवरी 2026 के बाद से राज्य में योजना के अंतर्गत कुल 34,893 नए आवेदन प्राप्त हुए हैं। प्रगति रिपोर्ट इस प्रकार है:
- स्वीकृत आवेदन: 14,169 आवेदनों को मंजूरी दी जा चुकी है।
- ऋण वितरण: 12,129 मामलों में लाभार्थियों को ऋण राशि वितरित की जा चुकी है।
- लंबित मामले: तकनीकी या अन्य कारणों से अटके 2,616 आवेदनों पर बैठक में गहन चर्चा की गई।
समयबद्ध लाभ और आपसी समन्वय पर जोर
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ समय पर मिलना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्वीकृति और वितरण प्रक्रिया में आ रही बाधाओं को दूर कर लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण करने को कहा।
”पीएम स्वनिधि योजना का मूल उद्देश्य रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे स्वरोजगार से जुड़े नागरिकों को बिना किसी परेशानी के वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। इसके लिए सभी संबंधित विभाग, स्थानीय निकाय और बैंकिंग संस्थान आपसी समन्वय के साथ काम करें।”
— वी. श्रीनिवास, मुख्य सचिव
वर्ष 2030 तक जारी रहेगी योजना
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा पीएम स्वनिधि योजना का शुभारंभ वर्ष 2020 में कोरोना काल के दौरान रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों को संबल देने के लिए किया गया था। इस योजना का प्रथम चरण दिसंबर 2025 में सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुका है। अब इसका क्रियान्वयन वर्ष 2030 तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है, ताकि अधिक से अधिक छोटे उद्यमियों को इसका लाभ मिल सके।
बैठक में ये रहे उपस्थित
समीक्षा बैठक में स्वायत्त शासन विभाग के शासन सचिव रवि जैन सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इसके साथ ही विभिन्न सरकारी व निजी बैंकों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया, जिन्हें ऋण वितरण की प्रक्रिया को और अधिक सरल और तेज करने के निर्देश दिए गए।