पीएम नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर साझा किया प्रेरक संस्कृत सुभाषित; सकारात्मक चिंतन और शुभ विचारों को अपनाने का दिया संदेश

गौरव कोचर /प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक प्रेरक संस्कृत सुभाषित साझा कर देशवासियों को सकारात्मक चिंतन का संदेश दिया है। प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए श्लोक में मन की एकाग्रता और विचारों की दिशा पर प्रकाश डाला गया है। पीएम मोदी लगातार भारतीय ज्ञान परंपरा, वेदों और उपनिषदों से जुड़े सुभाषितों के माध्यम से समाज को सदाचार, ज्ञान और नैतिक मूल्यों की प्रेरणा देते रहे हैं।

​सकारात्मक चिंतन और विचारों की शक्ति

​प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर श्लोक साझा करते हुए लिखा:

“यद् यदेव प्रसक्तं हि वितर्कयति मानवः।

अभ्यासात् तेन तेनास्य नतिर्भवति चेतसः॥”

 

भावार्थ: मनुष्य जिस विषय या वस्तु के बारे में निरंतर विचार और चिंतन करता है, अभ्यास के कारण उसका मन धीरे-धीरे उसी दिशा में झुकने और आकर्षित होने लगता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को सदैव सकारात्मक, शुभ और सर्वकल्याणकारी विचारों का ही चिंतन करना चाहिए, जिससे जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सके।

​पिछले दिनों साझा किए गए प्रमुख सुभाषित

​प्रधानमंत्री मोदी पिछले कई दिनों से निरंतर ‘एक्स’ पर ज्ञानवर्धक संस्कृत श्लोक और उनके अर्थ साझा कर रहे हैं:

  • 28 अगस्त — रक्षा सूत्र की महत्ता: पीएम ने श्लोक साझा किया था— “एष प्रभावो रक्षायाः कथितस्ते युधिष्ठिर। जयदः सुखदश्चैव पुत्रारोग्यधनप्रदः॥” इसका अर्थ बताते हुए उन्होंने रक्षा सूत्र के प्रभाव का उल्लेख किया था कि यह जीवन में विजय, सुख, उत्तम संतति, आरोग्य और ऐश्वर्य प्रदान करने वाला है।
  • 27 अगस्त — परंपरा और श्रेष्ठ कर्म का मार्ग: पीएम मोदी ने संदेश दिया था कि मनुष्य को अपनी गौरवशाली परंपराओं और ज्ञान को आगे बढ़ाते हुए हमेशा श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए। उन्होंने कहा कि बुद्धि द्वारा निर्मित न्यायपूर्ण व प्रकाशमय मार्ग का अनुसरण कर श्रेष्ठ जनों के सदाचार को जीवन में उतारना चाहिए, ताकि दिव्य गुणों से युक्त समाज का निर्माण हो सके।
  • 26 अगस्त — सद्भाव और परस्पर सेवा की सीख: प्रधानमंत्री ने श्लोक साझा किया था— “ज्ञानवृद्धाः प्रशंसन्ति शुश्रूषन्तः परस्परम्। विनिवृत्ताभिसन्धानाः सुखमेधन्ति सर्वशः॥” इसका भावार्थ है कि ज्ञानी और सज्जन व्यक्ति स्वार्थ से ऊपर उठकर परस्पर सम्मान, सेवा और सद्भाव का व्यवहार करते हैं और यही आचरण समाज में वास्तविक सुख और उन्नति लाता है।

​सांस्कृतिक चेतना का प्रसार

​सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए जाने वाले ये संस्कृत सुभाषित न केवल प्राचीन भारतीय वांग्मय के गूढ़ दर्शन को सरल रूप में प्रस्तुत करते हैं, बल्कि युवाओं को जीवन प्रबंधन, मानसिक शांति और नैतिक आचरण के प्रति भी प्रेरित कर रहे हैं। डिजिटल मंचों पर इन विचारों को व्यापक सराहना मिल रही है।

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