गणपत चौहान
दुर्ग, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला आज पारिवारिक विवादों को सुलझाने की दिशा में पूरे देश के लिए एक प्रेरणास्रोत बनकर उभरा है। जिले द्वारा अपनाई गई ‘काउंसलिंग-फर्स्ट’ (परामर्श प्रथम) पहल ने न केवल कानूनी बोझ को कम किया है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को सुरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसे छत्तीसगढ़ में अपनी तरह की पहली और अनूठी पहल माना जा रहा है, जिसने विवाद समाधान के पारंपरिक तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है।
संतुलित और समावेशी दृष्टिकोण
जहां देश के कई हिस्सों में पारिवारिक विवादों को सुलझाने के लिए आज भी एकतरफा या पारंपरिक कानूनी प्रक्रियाओं का सहारा लिया जाता है, वहीं दुर्ग के इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी समावेशिता है।
- समान मंच: इस व्यवस्था के तहत महिलाओं, पुरुषों और बुजुर्गों—सभी पक्षों को एक साझा मंच पर लाया जाता है।
- समान सुनवाई: यहां किसी एक पक्ष को प्राथमिकता देने के बजाय, सभी की बातों को अत्यंत धैर्य और निष्पक्षता के साथ सुना जाता है।
- सहानुभूतिपूर्ण संवाद: इसका मुख्य उद्देश्य दोषारोपण के बजाय विवाद की जड़ तक पहुंचना और आपसी समझ विकसित करना है।
विवादों का समयबद्ध समाधान और टूटते परिवारों को सहारा
दुर्ग की इस ‘संवाद आधारित व्यवस्था’ के परिणाम धरातल पर दिखाई दे रहे हैं। आंकड़ों और फीडबैक के अनुसार, यह मॉडल निम्नलिखित कारणों से प्रभावी साबित हो रहा है:
- समय की बचत: लंबी अदालती कार्रवाइयों के बजाय, काउंसलिंग के माध्यम से मामलों का निपटारा कम समय में हो रहा है।
- परिवारों का पुनर्मिलन: ऐसे कई परिवार जो टूटने की कगार पर थे, वे आज इस पहल के कारण फिर से एक साथ सुखमय जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
- बुजुर्गों का सम्मान: मॉडल ने विशेष रूप से बुजुर्गों के प्रति संवेदनशीलता दिखाई है, जिससे पीढ़ीगत अंतराल (Generation Gap) के कारण होने वाले विवादों में कमी आई है।
राष्ट्रीय पटल पर बढ़ती स्वीकार्यता
दुर्ग की इस सफलता की गूंज अब दिल्ली तक सुनाई दे रही है। पारिवारिक स्थिरता और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञ इसे एक ‘इफेक्टिव केस स्टडी’ के रूप में देख रहे हैं।
”दुर्ग का यह मॉडल साबित करता है कि यदि कानूनी प्रक्रिया में संवेदना और संवाद को जोड़ दिया जाए, तो जटिल से जटिल पारिवारिक विवाद भी सुलझाए जा सकते हैं।”
यही कारण है कि अन्य राज्य भी अब अपने यहां इस मॉडल का अध्ययन करने और इसे लागू करने की दिशा में विचार कर रहे हैं। यदि यह पहल व्यापक स्तर पर अपनाई जाती है, तो यह देश की न्याय प्रणाली में पारिवारिक मामलों के प्रबंधन के लिए एक क्रांतिकारी कदम साबित होगी।