प्रीति बालानी
जयपुर | 24 अप्रैल, 2026
विश्वकर्मा समाज के युवाओं को आधुनिक तकनीक से लैस करने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड, राजस्थान के अध्यक्ष रामगोपाल सुथार ने शुक्रवार को जयपुर स्थित भारतीय स्किल डेवलपमेंट यूनिवर्सिटी (BSDU) का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पारंपरिक हस्तशिल्प और कला को उन्नत तकनीकों के साथ एकीकृत करने पर बल दिया।
विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड का विजन और उद्देश्य
दौरे के दौरान रामगोपाल सुथार ने बोर्ड के गठन के मुख्य लक्ष्यों को साझा किया। उन्होंने बताया कि राजस्थान सरकार ने इस बोर्ड की स्थापना विशेष रूप से विश्वकर्मा समाज को धातु और लकड़ी के कार्यों में प्रशिक्षित करने के लिए की है।
बोर्ड के प्रमुख कार्य:
- प्रशिक्षण: पारंपरिक लकड़ी और धातु कला से जुड़े युवाओं को आधुनिक प्रशिक्षण देना।
- योजना निर्माण: इस क्षेत्र के विकास के लिए नई योजनाओं के सुझाव देना।
- समीक्षा: वर्तमान में संचालित योजनाओं की प्रभावशीलता की जांच करना और उनमें सुधार करना।
BSDU के साथ संयुक्त प्रशिक्षण योजना का प्रस्ताव
अध्यक्ष ने विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ चर्चा करते हुए समाज के युवाओं के लिए एक संयुक्त कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि समाज के अनेक युवा पहले से ही पारंपरिक रूप से इन कार्यों में लगे हुए हैं, लेकिन उन्हें उन्नत प्रशिक्षण की आवश्यकता है।
”यदि पारंपरिक कौशल को आधुनिक और उन्नत तकनीक के साथ मिला दिया जाए, तो युवाओं की आय और कौशल दोनों में भारी वृद्धि होगी। इससे न केवल व्यक्तिगत लाभ होगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था भी सुदृढ़ बनेगी।” — रामगोपाल सुथार
उद्योग-आधारित शिक्षा पर विश्वविद्यालय का जोर
भारतीय स्किल डेवलपमेंट यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर संजय गोयल ने इस सहयोग का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का मूल उद्देश्य उद्योग-केंद्रित और व्यावहारिक शिक्षा देना है, जिससे युवाओं को सीधे रोजगार प्राप्त हो सके।
सहयोग के लाभ:
- पारंपरिक कौशल को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना।
- युवाओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना।
- रोजगार के प्रत्यक्ष और बेहतर अवसरों का सृजन।
प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण चर्चा और भ्रमण के दौरान कई प्रमुख विशेषज्ञ और प्रतिनिधि उपस्थित रहे:
- राजकुमार शर्मा एवं राजीव कुमार (प्रतिनिधि, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम)।
- रोल्फ सीबोल्ड (मानद निदेशक, प्लानिंग व स्ट्रेटेजी, स्विट्जरलैंड)।
- डॉ. सत्येन्द्र सिंह (प्रभारी, फैकल्टी ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड रिन्यूएबल इंजीनियरिंग)।
सभी उपस्थित विशेषज्ञों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए एक क्रांतिकारी कदम बताया। बोर्ड अध्यक्ष ने आश्वासन दिया कि जल्द ही इस संबंध में एक ठोस कार्ययोजना तैयार कर इसे धरातल पर उतारा जाएगा।