पहले नोटबंदी फिर वोटबंदी, लोकतंत्र पर खतरा— सेन
मतदाता सूची में अचानक बदलाव, 65 लाख मतदाता नाम कटे, नागरिकता साबित करना होगा मुश्किल
रिपोर्ट: टेलीग्राफ टाइम्स/ हरि प्रसाद शर्मा
By : नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
अगस्त 09,2025
अजमेर। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ओबीसी विभाग के राष्ट्रीय समन्वयक राजेन्द्र सेन ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जारी नई मतदाता सूची को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि अगर वोट देने का ही अधिकार छिन गया तो लोकतंत्र का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। सेन ने आरोप लगाया कि “पहले नोटबंदी हुई, अब वोटबंदी की तैयारी हो रही है”।
सेन ने प्रेस वक्तव्य में बताया कि बिहार में पहले से ही एक उचित प्रक्रिया से तैयार मतदाता सूची मौजूद थी, जिसे आधार सूची कहा जा सकता है। लेकिन 24 जून 2025 को भारत निर्वाचन आयोग ने अचानक नई मतदाता सूची तैयार करने का आदेश जारी कर दिया। 1 अगस्त को जारी मसौदा सूची में केवल 7.24 करोड़ मतदाता दर्ज हैं, जबकि आधार सूची में यह संख्या 7.89 करोड़ थी। यानी लगभग 65 लाख मतदाताओं के नाम सूची से गायब हो गए हैं।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने नागरिकता साबित करने के लिए 11 दस्तावेज तय किए हैं, जिनमें दसवीं का प्रमाण पत्र, स्थायी निवास प्रमाण-पत्र, जाति प्रमाण-पत्र, पासपोर्ट आदि शामिल हैं। लेकिन इनमें से एक-दो को छोड़कर कोई भी दस्तावेज वास्तव में नागरिकता सिद्ध नहीं करता। इसके अलावा कई लोगों के पास इनमें से कोई भी दस्तावेज मौजूद नहीं है। इस स्थिति में अंतिम निर्णय का अधिकार प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) को दिया गया है, जिससे मनमानी और भेदभाव का खतरा बढ़ जाएगा।
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी ओबीसी विभाग के प्रदेश अध्यक्ष हर सहाय यादव, प्रदेश महासचिव मामराज सेन और अजमेर जिला अध्यक्ष सतीश वर्मा ने भी सेन की चिंताओं का समर्थन किया। उनका कहना है कि यह समस्या केवल बिहार तक सीमित नहीं रहेगी। यह विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान पूरे देश में लागू होना है, जिससे ओबीसी, एससी, एसटी और आदिवासी समुदाय के वे लोग, जो कम शिक्षित हैं और दस्तावेजी प्रक्रिया से अनजान हैं, वोट देने के अधिकार से वंचित हो जाएंगे।
सेन ने इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताते हुए कहा— “मतदान का अधिकार छीनना, जनता की आवाज दबाने जैसा है। यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए खतरनाक मिसाल बनेगा।”