परिवहन विभाग में ‘डिजिटल भ्रष्टाचार’: अवैध वसूली के लिए बना रखे थे कॉल सेंटर; एसीबी ने निरीक्षक समेत 13 को दबोचा
अजमेर/ब्यावर | 09 जनवरी, 2026
| हरि प्रसाद शर्मा
राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने परिवहन विभाग में जड़ें जमा चुके एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। यहाँ अधिकारी और कर्मचारी राजमार्गों पर चलने वाले वाहनों से दलालों के मार्फत संगठित वसूली कर रहे थे। इस सिंडिकेट ने वसूली को इतना आधुनिक बना लिया था कि दलालों के माध्यम से बाकायदा कॉल सेंटर संचालित किए जा रहे थे, जहाँ रिश्वत की राशि नकद के साथ-साथ ऑनलाइन (पेटीएम और डिजिटल माध्यम) भी स्वीकार की जा रही थी।
कोड वर्ड और ढाबों का ‘कंट्रोल रूम’
एसीबी महानिदेशक गोविन्द गुप्ता के निर्देशन में ब्यूरो की 12 टीमों ने अजमेर संभाग के ब्यावर, नसीराबाद, विजयनगर, केकड़ी, किशनगढ़ और अजमेर कार्यालयों से जुड़े 11 ठिकानों पर एक साथ छापा मारा। जाँच में सामने आया है कि:
- वसूली दर: राजमार्गों से गुजरने वाले प्रत्येक वाहन से 600 से 1000 रुपए तक की अवैध वसूली की जा रही थी।
- कोड वर्ड का खेल: ‘शेरे पंजाब’ और ‘जगदम्बा टी स्टॉल’ जैसे ढाबों को अवैध वसूली का केंद्र बनाया गया था। दलाल जैसे ही वाहन से पैसे वसूलते, वाहन का नंबर आरटीओ (RTO) टीम को ‘कोड वर्ड’ में भेज दिया जाता था, जिसके बाद उस वाहन को बिना किसी चेकिंग के निकलने दिया जाता था।
निरीक्षक सहित 13 डिटेन, लाखों का हिसाब बरामद
एसीबी की इस बड़ी कार्रवाई में परिवहन विभाग के निरीक्षक जलसिंह और उनके निजी सहायक प्रदीप जोधा सहित कुल 13 लोगों को हिरासत में लिया गया है। पकड़े गए अन्य लोगों में:
- दलाल विक्रम सिंह पिपरोली, संजय यादव और संदिग्ध रामूराम, मनोहर गांधी, बुद्धिप्रकाश प्रजापत, कृष्णा सिंह।
- ढाबा संचालक बुधे सिंह, महेंद्र कुमार और सुनील कुमार।
- संविदा गार्ड लक्ष्मण काठात और गुलाब काठात।
जब्त सामग्री और डिजिटल रिकॉर्ड
ब्यूरो की टीम ने इनके कब्जे से 1,16,700 रुपये की संदिग्ध नकद राशि बरामद की है। इसके अलावा 19 मोबाइल फोन, 4 सीसीटीवी डीवीआर और सबसे महत्वपूर्ण 12 संदिग्ध डायरियाँ मिली हैं। इन डायरियों में लाखों रुपये की रिश्वत का हिसाब-किताब और डिजिटल पेमेंट का विस्तृत रिकॉर्ड दर्ज है।
भ्रष्टाचार का नेटवर्क खंगाल रही टीमें
एसीबी की इस कार्रवाई से परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का मानना है कि यह केवल एक जिले का मामला नहीं है, बल्कि यह नेटवर्क काफी बड़ा हो सकता है। फिलहाल पकड़े गए सभी 13 लोगों से कड़ी पूछताछ की जा रही है और उनके बैंक खातों व मोबाइल डेटा को खंगाला जा रहा है ताकि इस ‘वसूली कॉल सेंटर’ के मास्टरमाइंड तक पहुँचा जा सके।

