पद्मश्री गीता चंद्रन ने भरतनाट्यम की माधुर्य से कलाप्रेमियों को किया मंत्रमुग्ध

पद्मश्री गीता चंद्रन ने भरतनाट्यम की माधुर्य से कलाप्रेमियों को किया मंत्रमुग्ध

राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में हुआ ‘काव्य कथा’ का भव्य आयोजन
जयपुर, 25 अगस्त। प्रीति बालानी। टेलीग्राफ टाइम्स 

राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर, जयपुर की सांस्कृतिक संध्या सोमवार को भरतनाट्यम की लय और भाव से सराबोर हो गई। अवसर था ‘काव्य कथा’ का, जिसे प्रस्तुत किया पद्मश्री से सम्मानित ख्यातनामा भरतनाट्यम नृत्यांगना गीता चंद्रन और उनके डांस कलेक्टिव नृत्यवृक्ष ने।

Photo credit Telegraph Times

कार्यक्रम का शुभारंभ शिव स्तुति की दिव्यता के साथ हुआ, जिसने वातावरण को आध्यात्मिकता से भर दिया। इसके बाद गोविंद वंदना की भक्ति, ओंकारकारिणी की ऊर्जा, वसंत ऋतु की काव्यात्मकता और सूरदास के पदों पर आधारित रामायण की लोरी ने दर्शकों को गहरे भावनात्मक अनुभव से जोड़ा। संध्या का समापन ऊर्जावान तिल्लाना से हुआ, जिसे दर्शकों ने खड़े होकर सराहा और सभागार देर तक तालियों से गूंजता रहा।

गीता चंद्रन के साथ नृत्यवृक्ष की प्रतिभाशाली कलाकार राधिका कथल, मधुरा भ्रुशुंडी, सौम्या लक्ष्मी नारायणन और यादवी शकधर मेनन ने भी मंच पर अपनी अद्भुत प्रस्तुतियों से भाव और सौंदर्य का संतुलन साधा। जीवंत संगीत के साथ इनकी सामूहिक प्रस्तुति ने पूरे कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बना दिया।

प्रस्तुति के उपरांत गीता चंद्रन ने कहा कि भरतनाट्यम उनके लिए केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि प्रार्थना, दर्शन और काव्य का जीवंत संगम है। ‘काव्य कथा’ के माध्यम से वे जयपुर के दर्शकों तक शाश्वत कहानियाँ पहुँचाना चाहती हैं, जिन्हें वे अपने हृदय में सहेज सकें।

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इस मौके पर जयपुर के अनेक गणमान्य अतिथि, साहित्यकार, कला-प्रेमी और सामाजिक हस्तियाँ मौजूद थीं। पूरा सभागार मानो सांस्कृतिक उत्सव में तब्दील हो गया। कार्यक्रम के अंत में कलाकारों को खड़े होकर दी गई तालियों ने इस बात को सिद्ध कर दिया कि भरतनाट्यम की यह प्रस्तुति लंबे समय तक दर्शकों के हृदय में गूंजती रहेगी।

‘काव्य कथा’ केवल एक नृत्य प्रस्तुति भर नहीं थी, बल्कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य की उस परंपरा का उत्सव थी, जो जीवन के गहरे मूल्यों, आस्था और दर्शन का जीवंत प्रतिबिंब है।

 

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