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“पंडित” शब्द पर सियासी संग्राम: अशोक गहलोत की टिप्पणी से उठी बहस, BJP ने दी व्याख्या
रिपोर्ट: मुस्कान तिवाड़ी
Edited By : नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
जुलाई 09,2025
जयपुर। राजस्थान की राजनीति में एक साधारण से प्रतीत होने वाले शब्द “पंडित” को लेकर इन दिनों सियासी शास्त्रार्थ देखने को मिल रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की एक टिप्पणी ने जहां राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा की, वहीं भाजपा को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस शब्द का अर्थ तक स्पष्ट करना पड़ा।
गहलोत की टिप्पणी से शुरू हुआ नया अध्याय
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को कहा,
“सीएम भजनलाल शर्मा के प्रति मेरी हमदर्दी है। पंडित भजनलाल जैसा सौभाग्य हर किसी को नहीं मिलता। अभी इनको बने हुए डेढ़ साल हुआ है, पांच साल राज करो भाई, कौन रोक रहा है।”
गहलोत की इस टिप्पणी को जहां सियासी व्यंग्य के तौर पर देखा गया, वहीं भाजपा ने इसे अपने पक्ष में लेने में देर नहीं की।
BJP की ‘पंडित’ व्याख्या
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पंडित शब्द की व्याख्या करनी पड़ी। उन्होंने स्पष्ट किया कि
“पंडित का अर्थ विद्वान या ज्ञानी होता है। भजनलाल शर्मा जैसे कर्मठ और समझदार व्यक्ति को इस शब्द से संबोधित करना गौरव की बात है। वे पूरे पांच साल मुख्यमंत्री रहेंगे, इसमें कोई संदेह नहीं।”
राठौड़ ने यह भी कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पहले ही कह चुके हैं कि भजनलाल शर्मा पूरे कार्यकाल तक मुख्यमंत्री बने रहेंगे, अब गहलोत भी यही कह रहे हैं। इसे स्वीकार्यता की शुरुआत मानना चाहिए।
राजनीति में ‘पंडित’ शब्द का ऐतिहासिक संदर्भ
“पंडित” शब्द का राजनीतिक इस्तेमाल नया नहीं है। भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, जनसंघ के वैचारिक स्तंभ पंडित दीनदयाल उपाध्याय, और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम के साथ भी यह शब्द यदा-कदा जुड़ा रहा।
वहीं, उत्तर प्रदेश के पंडित गोविंद वल्लभ पंत, कमलापति त्रिपाठी, नारायण दत्त तिवारी, श्यामा चरण शुक्ल, और राजस्थान के पंडित नवल किशोर शर्मा जैसे नेता ब्राह्मण समुदाय से होने के साथ-साथ अपने विद्वतापूर्ण व्यक्तित्व के लिए भी पहचाने जाते रहे हैं।
राजस्थान में 30 साल बाद ब्राह्मण चेहरा सीएम पद पर
राजस्थान की राजनीति में लगभग तीन दशक बाद भजनलाल शर्मा के रूप में एक ब्राह्मण नेता मुख्यमंत्री पद पर काबिज हुए हैं। इससे पहले टीकाराम पालीवाल, जयनारायण व्यास, और हरिदेव जोशी जैसे ब्राह्मण नेता मुख्यमंत्री रहे हैं। यही कारण है कि “पंडित” शब्द अब सामाजिक और राजनीतिक दोनों विमर्शों का केंद्र बन गया है।
‘पंडित’ शब्द के मायने और परिप्रेक्ष्य
संस्कृत मूल से निकले “पंडित” शब्द के कई पर्यायवाची हैं—विद्वान, सुधी, मनीषी, प्राज्ञ, बुध, विचक्षण आदि। ये सभी ऐसे व्यक्ति को दर्शाते हैं जो ज्ञान, तर्क और परंपरा का ज्ञाता हो। ब्राह्मण समाज में यह उपाधि वंशानुगत भी रही है, लेकिन राजनीति में इसे सम्मानजनक संबोधन के तौर पर भी अपनाया गया है।
राजनीति में कभी ‘फाउल’ भी बनता है ‘गोल’
राजनीति में कई बार विपक्ष द्वारा कहे गए शब्द या वाक्य सरकार के लिए अवसर बन जाते हैं। सियासी पंडित इसे ‘फाउल से बना गोल’ कहते हैं। गहलोत की टिप्पणी भी कुछ ऐसा ही संकेत दे रही है, जिसे भाजपा अपने पक्ष में मोड़ने में जुटी है।
ब्राह्मण राजनीति और समाजिक समीकरण
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो “पंडित” शब्द को ब्राह्मण राजनीति से जोड़ना सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि सामाजिक गणित का हिस्सा भी है। कांग्रेस और भाजपा—दोनों ही इस वर्ग को साधने की कोशिश में लगे हैं। गहलोत का बयान जहां एक तरफ राजनीतिक व्यंग्य प्रतीत होता है, वहीं भाजपा इसे स्वीकार्यता के रूप में देख रही है।