​‘नो योर आर्मी’ मेला: 4 किमी दूर से दुश्मन का काल बनेगा ‘प्रलय’ ड्रोन, जयपुर में दिखा सेना का आधुनिक शौर्य

​‘नो योर आर्मी’ मेला: 4 किमी दूर से दुश्मन का काल बनेगा ‘प्रलय’ ड्रोन, जयपुर में दिखा सेना का आधुनिक शौर्य

जयपुर | 9 जनवरी, 2026

| नरेश गुनानी

​78वें सेना दिवस के उपलक्ष्य में जयपुर के भवानी निकेतन शिक्षा समिति परिसर में चार दिवसीय ‘नो योर आर्मी’ प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस प्रदर्शनी के माध्यम से आमजन को न केवल भारतीय सेना की आधुनिक सैन्य शक्ति के दर्शन हो रहे हैं, बल्कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जांबाज सैनिकों के त्याग और अनुशासन को करीब से समझने का अवसर भी मिल रहा है।

​प्रलय ड्रोन: दुश्मन के लिए सटीक चेतावनी

​प्रदर्शनी में सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र ‘प्रलय’ ड्रोन बना हुआ है। आधुनिक युद्ध कौशल में तकनीक की भूमिका को दर्शाते हुए इस ड्रोन की मारक क्षमता ने सभी को चकित कर दिया:

  • सटीक प्रहार: यह ड्रोन 2 किलोग्राम पेलोड के साथ दुश्मन के ठिकानों पर अचूक हमला करने में सक्षम है।
  • रेंज और ऊँचाई: अधिकतम 300 मीटर की ऊँचाई पर उड़ान भरते हुए यह 4 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन पर प्रहार कर सकता है।
  • समय क्षमता: यह एक बार में 30 से 40 मिनट तक आसमान में रहकर टोह लेने और हमला करने की क्षमता रखता है।

​अत्याधुनिक हथियारों और तकनीकी कौशल का प्रदर्शन

​भवानी निकेतन परिसर में आयोजित इस मेले में सेना के उन अत्याधुनिक हथियारों और उपकरणों को प्रदर्शित किया गया है, जो आज भारतीय सेना को दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेनाओं की कतार में खड़ा करते हैं। प्रदर्शनी में मिसाइल सिस्टम, आधुनिक राइफल्स, संचार उपकरण और निगरानी तंत्र की तकनीकी बारीकियों को विशेषज्ञों द्वारा आमजन को समझाया जा रहा है।

​शौर्य और बलिदान की गौरवगाथा

​हथियारों के साथ-साथ यह प्रदर्शनी भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास को भी जीवंत कर रही है। वर्ष 1947 से लेकर अब तक के विभिन्न सैन्य अभियानों और युद्धों में भारतीय सैनिकों द्वारा दिए गए सर्वोच्च बलिदान और पराक्रम की प्रेरक गाथाओं को चित्रों और दस्तावेजों के माध्यम से दर्शाया गया है।

​अनुशासन और राष्ट्र सेवा का संदेश

​प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य युवाओं और देशवासियों में राष्ट्रभक्ति का संचार करना है। आज जब नागरिक अपने घरों में सुरक्षित हैं, तब सीमाओं पर तैनात जवानों की कर्तव्यनिष्ठा और अनुशासन ही देश की रीढ़ है। यह मेला आम नागरिकों को सेना के प्रति गौरव महसूस कराने और युवाओं को सैन्य सेवाओं की ओर आकर्षित करने का एक सशक्त माध्यम साबित हो रहा है।

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