जयपुर/ योगेश शर्मा/फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) द्वारा जयपुर स्थित राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) में ‘नेशनल मस्टर्ड डे 2026’ के दूसरे संस्करण का सफल आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में कृषि नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के दिग्गजों, वैल्यू चेन प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और किसानों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान सरसों उत्पादन बढ़ाने, तकनीकी नवाचार, फसल कटाई के बाद के प्रबंधन और किसानों के सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
उत्पादकता और तकनीकी विकास पर जोर: कृषि आयुक्त
राजस्थान सरकार के कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल (IAS) ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य में सरसों उत्पादन के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को रेखांकित किया:
- उत्पादकता का लक्ष्य: वर्ष 2019-20 में सरसों की उत्पादकता 1,581 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी, जो बढ़कर 1,675 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो चुकी है। वर्ष 2030 तक इसे 2,181 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
- वैश्विक स्थान: कम वर्षा वाला राज्य होने के बावजूद राजस्थान सरसों उत्पादन में विश्व में तीसरे स्थान पर है।
- मुख्य कारक: सही किस्म के बीजों का चयन, समय पर उपलब्धता और कटाई के बाद पर्याप्त अवसंरचना इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
- किसान कल्याण योजनाएं: राजस्थान में ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ से किसानों को काफी लाभ मिला है, जहां जमा प्रीमियम की तुलना में चार गुना भुगतान हुआ है। इसके अलावा लोन सुविधाएं, कस्टम हायरिंग सेंटर्स और विभिन्न अनुदान योजनाएं भी किसानों को राहत दे रही हैं।
विशेषज्ञ एवं उद्योग जगत के विचार
1. नीतिगत उपाय और सीड मिनी-किट (डॉ. एस.के. मल्होत्रा)
महाराणा प्रताप हॉर्टिकल्चरल विश्वविद्यालय, करनाल के वाईस चांसलर एवं पूर्व कृषि आयुक्त (भारत सरकार)
”नेशनल मिशन फॉर एडिबल ऑयल्स के तहत ब्लेंडेड तेलों के बजाय सिंगल एडिबल ऑयल को बढ़ावा देने और 20 क्विंटल/हेक्टेयर से अधिक पैदावार वाली किस्मों के सीड मिनी-किट बांटने से सरसों उत्पादन बढ़ा है। अब केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि फसल सुरक्षा, ब्रांडिंग और पैकेजिंग पर भी ध्यान देना होगा।”
2. मौसम-अनुकूल हाइब्रिड किस्में (अर्जुन राजपूत)
क्रॉप मार्केटिंग लीड (मिलेट एवं मस्टर्ड), कॉर्टेवा एग्रीसाइंस (दक्षिण एशिया)
”सरसों एक अधिक उत्पादन देने वाली और मौसम के बदलाव को सहने वाली फसल है। इसमें हाइब्रिड किस्मों के विकास की अपार संभावनाएं हैं। बीमारियों के प्रति सहनशील हाइब्रिड बीजों और खरपतवार व कीट प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाना आवश्यक है।”
3. दक्षिण भारत में बढ़ती मांग (नवनीत चांडक)
सीनियर जनरल मैनेजर (कमर्शियल), पतंजलि फूड्स
”कोविड के बाद औषधीय गुणों के प्रति जागरूकता और उत्तर-पूर्व से दक्षिण की ओर लोगों के पलायन के कारण दक्षिण भारत में सरसों के तेल की मांग बढ़ी है। हालांकि, व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य प्रोसेसिंग प्लांट्स की कमी और असंगठित इकाइयों का होना इस क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियां हैं।”
4. ‘हार्ट स्मार्ट’ के रूप में सही नैरेटिव (डॉ. सुदीप्ति अरोड़ा)
डायरेक्टर (रिसर्च एंड इनोवेशन), डॉ. बी. लाल इंस्टीट्यूट ऑफ़ बायोटेक्नोलॉजी, जयपुर
”सरसों के तेल को केवल ‘हार्ट हेल्दी’ कहने के बजाय ‘हार्ट स्मार्ट’ विकल्प के रूप में पेश किया जाना चाहिए। भ्रामक दावों के बजाय पारदर्शिता और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर उपभोक्ताओं का विश्वास जीतना होगा।”
विकास की रूपरेखा (Framework)
पीडब्ल्यूसी (PwC) की प्रतिनिधि कृतिका सुभाषिनी ने सरसों क्षेत्र के समग्र विकास के लिए तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित ढांचा प्रस्तुत किया:
- उत्पादकता में वृद्धि: हाइब्रिड किस्मों को अपनाकर उत्पादन 30% से 40% तक बढ़ाना।
- बाजार एवं अवसंरचना: नए उपभोक्ता वर्गों तक पहुंच, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और वैल्यू एडिशन को मजबूत करना।
- नीतिगत सहयोग: योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर किसानों की आय और लाभ में वृद्धि करना।
किसान कार्यशाला और महिला कृषकों का सम्मान
- कैपेसिटी बिल्डिंग वर्कशॉप: फिक्की द्वारा सीसीएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एग्रीकल्चरल मार्केटिंग (NIAM) के सहयोग से “From Farm to Market: Unlocking the Value of Mustard” विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें भाग लेने वाले किसानों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
- अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026: इस अवसर पर टिकाऊ खेती (Sustainable Farming) और देश की खाद्य तेल सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली महिला सरसों किसानों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।