नेशनल बोर्ड ऑफ ट्रेड सदस्य के साथ ‘आरतिया’ का संवाद: विदेशी कंसल्टेंसी कंपनियों और चीनी माल की आपूर्ति पर जताई चिंता

नेशनल बोर्ड ऑफ ट्रेड सदस्य के साथ ‘आरतिया’ का संवाद: विदेशी कंसल्टेंसी कंपनियों और चीनी माल की आपूर्ति पर जताई चिंता

| योगेश शर्मा

जयपुर। अखिल राज्य ट्रेड एंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आरतिया) के बैनर तले राजस्थान के दिग्गज उद्यमियों और कारोबारियों ने भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय के नेशनल बोर्ड ऑफ ट्रेड की सदस्य डॉ. स्मिता शाह के साथ एक महत्वपूर्ण संवाद सत्र आयोजित किया। इस बैठक में व्यापारिक समुदाय के समक्ष आ रही चुनौतियों, सरकारी खरीद नीतियों और विदेशी कंपनियों के बढ़ते दखल पर गहन मंथन किया गया।

​नेशनल बोर्ड ऑफ ट्रेड: हर सोमवार समस्याओं का समाधान

​संवाद के दौरान डॉ. स्मिता शाह ने कारोबारियों को एक महत्वपूर्ण मंच की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि:

  • ऑनलाइन संवाद: हर सोमवार दोपहर 3 से 4 बजे के बीच एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म आयोजित किया जाता है।
  • विभागीय उपस्थिति: इस बैठक में वाणिज्य मंत्रालय सहित 9 प्रमुख सरकारी विभागों के उच्चाधिकारी मौजूद रहते हैं, जिससे समस्याओं का त्वरित और व्यावहारिक समाधान संभव होता है।
  • कोलेटरल फ्री लोन: उन्होंने भारत सरकार की उस योजना पर भी प्रकाश डाला, जिसके तहत सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को 20 लाख रुपये तक का ऋण बिना किसी गारंटी (कोलेटरल फ्री) उपलब्ध कराया जा रहा है।

​चीनी माल और ऑनलाइन ट्रेड पर प्रहार

​टीम आरतिया ने संगठित क्षेत्र की बड़ी कंपनियों और ऑनलाइन ट्रेडिंग के कारण खुदरा दुकानदारों (Retails Shopkeepers) के अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट पर गंभीर चिंता जताई। इसके साथ ही सरकारी खरीद को लेकर दो प्रमुख मांगें रखी गईं:

  1. स्वदेशी को प्राथमिकता: सरकारी निविदाओं में केवल भारत में निर्मित वस्तुओं की आपूर्ति ही अनिवार्य की जाए।
  2. ब्लैकलिस्टिंग: कम कीमत का हवाला देकर सरकारी सप्लाई में चीनी माल खपाने वाले सप्लायर्स को तत्काल प्रभाव से ‘ब्लैक लिस्ट’ किया जाए।

​’बिग फोर’ कंपनियों और डेटा सुरक्षा का मुद्दा

​बैठक में ‘बिग फोर’ (विदेशी कंसल्टेंसी कंपनियां) को सरकारी तंत्र में तकनीकी सलाहकार नियुक्त करने पर कड़ा ऐतराज जताया गया। चर्चा में तीन मुख्य बिंदु उभरे:

  • ​ये मूलतः विदेशी कंपनियां हैं, जिनका प्राथमिक कार्य ऑडिट (अंकेक्षण) है, न कि तकनीकी सलाह।
  • ​सरकारी तंत्र में इनकी गहरी पैठ होने के कारण भारत के गोपनीय डेटा और सूचनाओं तक इनकी पहुंच राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक है।

​प्रभावी सूचना तंत्र का सुझाव

​आरतिया ने केंद्र एवं राज्य सरकारों को सुझाव दिया कि सरकारी योजनाओं की जानकारी आम उद्यमी तक नहीं पहुंच पा रही है। इसके समाधान के लिए:

  • ​पंजीकृत व्यापारियों के ई-मेल और मोबाइल नंबर पर योजनाओं और संशोधनों की जानकारी नियमित रूप से भेजी जाए।
  • ​सूचना एवं जनसंपर्क विभाग एक ऐसा रोडमैप तैयार करे जिससे योजनाओं का लाभ सीधे संबंधित स्टेकहोल्डर्स तक पहुंचना सुनिश्चित हो सके।

उपस्थिति: संवाद कार्यक्रम में कमल कंदोई, आशीष सर्राफ, जसवंत मील, अजय गुप्ता, कैलाश शर्मा, ओ पी राजपुरोहित, डॉ. रवि गोयल सहित अनेक वरिष्ठ उद्यमी और पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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