नेपाल में ‘बालेन सरकार’ के खिलाफ उग्र हुआ Gen-Z: झुग्गी-बस्ती हटाने और गरीबों की बेदखली के विरोध में सड़कों पर उतरे युवा

काठमांडू/ गौरव कोचर/भारत के पड़ोसी देश नेपाल में एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मी बढ़ गई है। कभी प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन शाह) को सत्ता के शीर्ष पर पहुंचाने वाले देश के युवा (Generation Z) अब उन्हीं की नीतियों के खिलाफ काठमांडू की सड़कों पर उतर आए हैं। बालेन शाह सरकार द्वारा बिना किसी ठोस पुनर्वास योजना के झुग्गी-बस्तियों और अस्थायी आवासों को हटाने के फैसले ने नेपाल में एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। काठमांडू घाटी सहित देश के विभिन्न हिस्सों में गरीबों और भूमिहीनों पर चलाए गए बुलडोज़र के खिलाफ युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा है।

​क्या है पूरा विवाद? (क्रोनोलॉजी और कार्रवाई)

​विवाद की शुरुआत अप्रैल 2026 में हुई, जब सरकार ने काठमांडू घाटी और देश के अन्य हिस्सों में सार्वजनिक जमीनों पर अतिक्रमण हटाने के नाम पर भूमिहीन लोगों की झुग्गियों और अस्थायी ढांचों को ध्वस्त कर दिया।

  • 15,000 लोग प्रभावित: इस अचानक की गई कार्रवाई से लगभग 2,600 परिवारों के 15,000 से अधिक लोग रातों-रात बेघर हो गए।
  • अस्थायी शिविरों से भी बेदखली: इनमें से करीब 325 पीड़ित परिवारों को काठमांडू के विभिन्न हिस्सों में बने होल्डिंग सेंटर्स (अस्थायी आवास केंद्रों) में रखा गया था।
  • अल्टीमेटम: सरकार ने 2 जुलाई 2026 को एक और सख्त आदेश जारी कर इन भूमिहीन झुग्गीवासियों को 6 जुलाई तक उन अस्थायी होल्डिंग सेंटर्स को भी खाली करने का निर्देश दे दिया, जिससे संकट और गहरा गया।

​होल्डिंग सेंटर में बाढ़ और पुलिस लाठीचार्ज ने भड़काया गुस्सा

​विस्थापित परिवारों को जिन होल्डिंग सेंटर्स (जैसे कीर्तिपुर केंद्र) में शिफ्ट किया गया था, मानसून की बारिश के कारण वहां बाढ़ जैसे हालात बन गए। घुटनों तक भरे पानी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बीमार, बुजुर्ग और बच्चों की हालत बद से बदतर हो गई।

​जब ‘Gen-Z’ और ‘नेशनल जेन-जी सिटीजंस कैंपेन’ से जुड़े युवा कार्यकर्ता शनिवार को पीड़ितों की स्थिति जानने और राहत सामग्री के वितरण में मदद करने पहुंचे, तो वहां प्रशासन के साथ तीखी बहस हो गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने युवा प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया, जिसमें कई कार्यकर्ता घायल हो गए। इसके साथ ही पुलिस ने मौके से करीब 26 युवा कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।

​कोशी प्रांत के मोरांग जिला पुलिस कार्यालय के बाहर भी इन गिरफ्तारियों और पुलिस दुर्व्यवहार के खिलाफ धरना दे रहे 26 अन्य कार्यकर्ताओं को रविवार को गिरफ्तार कर लिया गया।

​राजनीतिक विरोध और चौतरफा आलोचना

​युवाओं पर हुए लाठीचार्ज और गरीबों के प्रति सरकार के इस अमानवीय रवैये की नेपाल के सियासी गलियारों में भी तीखी आलोचना हो रही है।

​”सरकार द्वारा युवा कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज करना और उन्हें गिरफ्तार करना पूरी तरह अनुचित है। पुलिस की इस दमनकारी कार्रवाई पर हमें सख्त आपत्ति है और गिरफ्तार किए गए सभी युवाओं को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए।”

गगन कुमार थापा, अध्यक्ष, नेपाली कांग्रेस

 

​भूमि और आवास अधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि प्रधानमंत्री बालेन शाह बिना किसी कानूनी प्रक्रिया और कोर्ट के आदेश के, सिर्फ सोशल मीडिया स्टेटस के आधार पर बुलडोज़र चलवा रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि वे 50 से अधिक वर्षों से वहां रह रहे हैं और उन्हें अचानक ‘अतिक्रमणकारी’ बताकर सड़कों पर फेंक दिया गया, जबकि नेताओं और सांसदों के अवैध ढांचों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

​बालेन शाह के लिए क्यों बड़ी चुनौती है Gen-Z का यह गुस्सा?

​यह विरोध प्रदर्शन प्रधानमंत्री बालेन शाह के लिए सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा साबित होने जा रहा है। गौरतलब है कि बालेन शाह (36 वर्ष) को मार्च 2026 के आम चुनावों में ऐतिहासिक जीत दिलाने और प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाने में इसी Gen-Z (युवा पीढ़ी) ने सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक सबसे बड़ी भूमिका निभाई थी।

​बालेन शाह कभी खुद रैपर और एक्टिविस्ट के रूप में अपने गानों (जैसे ‘गरीबको चमेली’) के जरिए गरीबों के हक और व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाते थे। आज प्रदर्शनकारी युवा उन्हीं के पुराने गानों और कविताओं को तख्तियों पर लिखकर मैतीघर मंडाला (काठमांडू का प्रसिद्ध विरोध स्थल) पर गा रहे हैं। युवाओं का साफ कहना है कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन “बिना पुनर्वास के बेदखली मंजूर नहीं”। सरकार को वास्तविक भूमिहीनों की पहचान कर पहले उनके सुरक्षित आवास का इंतजाम करना होगा, तभी कोई प्रशासनिक कार्रवाई की जानी चाहिए।

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