गौरव कोचर/भारत और नेपाल के बीच पिछले कुछ वर्षों से जारी सीमा विवाद के बीच भारत को एक बड़ी कूटनीतिक जीत हासिल हुई है। नेपाल सरकार ने अपने 1 रुपये के नए सिक्के के डिजाइन से विवादित क्षेत्रों—कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा—वाले नए विवादित नक्शे को शामिल करने के फैसले को फिलहाल टाल दिया है।
इस कदम को दोनों देशों के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने और भारत की मजबूत कूटनीतिक रणनीति का परिणाम माना जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
- फैसले से पीछे हटने की वजह: नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) द्वारा 1 रुपये के नए सिक्के छापने की तैयारी की जा रही थी, जिसमें नेपाल का ‘चुचू नक्शा’ (Chuche Map — जिसमें भारत के उत्तराखंड के कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को शामिल किया गया था) अंकित होना था। हालांकि, भारत के कड़े कूटनीतिक ऐतराज और द्विपक्षीय बातचीत के रास्ते बंद होने के डर से नेपाल ने इस फैसले पर रोक लगा दी है।
- पुराने डिजाइन पर ही जारी होंगे सिक्के: अब नेपाल का केंद्रीय बैंक 1 रुपये के नए सिक्के बिना किसी विवादित नक्शे के ही जारी करेगा।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई थी?
- 2020 का ‘चुचू नक्शा’ विवाद: मई 2020 में तत्कालीन नेपाली प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के कार्यकाल में नेपाल की संसद ने एक नया राजनीतिक नक्शा पारित किया था। इसमें भारत के नियंत्रण वाले कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था।
- भारत का कड़ा रुख: भारत ने नेपाल के इस कदम को “एकतरफा” और “ऐतिहासिक तथ्यों व साक्ष्यों के विपरीत” बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया था। भारत ने साफ कहा था कि ऐसे कृत्रिम क्षेत्रीय दावों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
- सिक्के पर नक्शा छापने का प्रस्ताव: मई 2024 में नेपाल की कैबिनेट ने इस विवादित नक्शे को 100 रुपये के नोट और 1 रुपये के सिक्कों पर छापने की मंजूरी दी थी, जिसका भारत ने कड़ा विरोध किया था।

भारत के लिए क्यों है यह बड़ी कूटनीतिक जीत?
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- भारत का कड़ा कूटनीतिक संदेश: भारत ने स्पष्ट कर दिया था कि सीमा से जुड़ा कोई भी एकतरफा फैसला दोनों देशों के बीच संबंधों, व्यापार और सीमा वार्ता पर प्रतिकूल असर डालेगा।
- नेपाल को समझ आया आर्थिक व व्यावहारिक सच: नेपाल की अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला काफी हद तक भारत पर निर्भर है। सिक्के जैसी रोजमर्रा की चीज पर विवादित नक्शा छापने से सीमावर्ती इलाकों में व्यापारिक भ्रम पैदा हो सकता था।
- द्विपक्षीय बातचीत के रास्ते खुले: नेपाल के इस कदम से दोनों देशों के बीच औपचारिक सीमा वार्ता (Boundary Working Group) के फिर से पटरी पर आने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
विशेषज्ञों की राय:
“नेपाल का सिक्के से विवादित नक्शा हटाना या रोकना इस बात का संकेत है कि काठमांडू अब काठमांडू-नई दिल्ली संबंधों की संवेदनशीलता को समझ रहा है। उकसावे की राजनीति की जगह अब दोनों देश बातचीत और जमीनी हकीकत को प्राथमिकता दे रहे हैं।”