नरेश गुनानी
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने किया 150वें नि:शुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर का भव्य शुभारंभ; सेवा को बताया राष्ट्र निर्माण का आधार।
जयपुर | 17 अप्रैल, 2026
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने शुक्रवार को जयपुर स्थित नृसिंह मंदिर में अशोका फाउंडेशन द्वारा आयोजित 150वें नि:शुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर का दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने मंदिर में दर्शन-पूजन कर प्रदेश की खुशहाली, सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना की।
सेवा और आध्यात्म का संगम
शिविर को संबोधित करते हुए देवनानी ने कहा कि नेत्र चिकित्सा सेवा केवल एक सामाजिक कार्य नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक साधना है। उन्होंने मार्मिक शब्दों में कहा:
”जब किसी व्यक्ति की आंखों में दृष्टि का प्रकाश लौटता है, तो वह केवल बाहरी दुनिया को ही नहीं देखता, बल्कि अपने भीतर के अस्तित्व और ईश्वर की अनंत कृपा को भी नए सिरे से महसूस करता है। यहाँ सेवा और साधना एक हो जाते हैं।”
समाज की जागरूकता से सशक्त होगा राष्ट्र
देवनानी ने जोर देकर कहा कि समाज में वास्तविक और स्थायी परिवर्तन केवल सरकारी नीतियों या योजनाओं से संभव नहीं है। इसके लिए निस्वार्थ सेवा-भाव, समर्पण और मानवता के प्रति सामूहिक जागरूकता की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि जब समाज स्वयं आगे बढ़कर सेवा के कार्यों की जिम्मेदारी उठाता है, तभी राष्ट्र वास्तविक रूप में सशक्त, समृद्ध और संस्कारवान बनता है।
150वाँ शिविर: सेवा यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव
अशोक फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि यह 150वाँ शिविर केवल एक संख्यात्मक उपलब्धि नहीं है, बल्कि निस्वार्थ सेवा यात्रा का एक गौरवशाली पड़ाव है। उन्होंने आह्वान किया कि सेवा का यह पावन दीपक कभी बुझना नहीं चाहिए, बल्कि इसे और अधिक प्रज्ज्वलित कर समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक मदद पहुंचानी चाहिए।
चिकित्सा जगत और स्वयंसेवकों का आभार
कार्यक्रम के दौरान देवनानी ने शिविर में अपनी सेवाएं दे रहे चिकित्सकों, स्वयंसेवकों और सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि निर्धन और जरूरतमंद वर्ग को नि:शुल्क जांच, परामर्श और उपचार उपलब्ध कराना एक महान मानवीय पहल है और ऐसे प्रयास समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
इस गरिमामयी कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, चिकित्सा विशेषज्ञ और बड़ी संख्या में लाभार्थी उपस्थित रहे।