नीलाम खानों में शीघ्र आरंभ हो खनन कार्य – मुख्य सचिव
– परिचालन में आने से निवेश, रोजगार के नए अवसर और राजस्व में बढ़ोतरी
– बजरी ब्लॉकों के परिचालन में नहीं आने से आमजन को नहीं मिल रही राहत
जयपुर, 7 अक्टूबर 2025
नरेश गुनानी , वरिष्ठ पत्रकार, खैरथल तिजारा।
मुख्य सचिव सुधांश पंत ने नीलाम मिनरल ब्लॉकों को शीघ्र परिचालन में लाने की आवश्यकता पर बल देते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक अनुमतियां प्राथमिकता से जारी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि समय पर अनुमतियां जारी होने से नीलाम ब्लॉकों में खनन कार्य आरंभ हो सकेगा, जिससे खनन क्षेत्र में निवेश के साथ रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और राज्य सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी।
सुधांश पंत मंगलवार को सचिवालय के चिंतन कक्ष में नीलाम खनिज ब्लॉकों में शीघ्र खनन कार्य आरंभ कराने हेतु गठित उच्चस्तरीय समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने बताया कि राजस्थान ने अब तक 112 मेजर मिनरल ब्लॉकों की नीलामी कर देश में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है, लेकिन आवश्यक अनुमतियों में विलंब के कारण इन ब्लॉकों में खनन कार्य शुरू नहीं हो सका है। केंद्र सरकार भी इस विषय पर गंभीर है।
उन्होंने निर्देश दिए कि संबंधित विभाग एक स्पष्ट चेकलिस्ट तैयार करें ताकि आवेदन के समय ही सभी औपचारिकताएं पूर्ण हो सकें। उन्होंने सुझाव दिया कि सिस्टम को इस प्रकार विकसित किया जाए कि यदि आवेदन में कोई आवश्यक दस्तावेज़ अधूरा है तो उसे स्वीकृत ही न किया जाए। बार-बार नई कमियां इंगित करने की प्रवृत्ति को उन्होंने गलत बताते हुए कहा कि इससे अनावश्यक देरी होती है।
प्री-एम्बेडेड ब्लॉकों के ऑक्शन पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही इस दिशा में गंभीर हैं, इसलिए जल्द से जल्द अनुमतियां प्राप्त कर ऑक्शन प्रक्रिया पूरी की जाए। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जिलों में जनसुनवाई कार्य शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए।
एलओआई धारकों द्वारा अनुमतियों के लिए समय पर आवेदन नहीं करने पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्य सचिव ने तय समय सीमा में सभी औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने पोस्ट ऑक्शन फेसिलिटेशन सेल को और अधिक सक्रिय बनाते हुए विभागों के बीच बेहतर समन्वय और मार्गदर्शन सुनिश्चित करने को कहा।
मुख्य सचिव ने एलओआई धारकों और संबंधित विभागों के बीच ओरियंटेशन कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए ताकि प्रक्रिया की जानकारी मिलने से आवेदन सही दस्तावेजों के साथ प्रस्तुत हों और अनुमतियों में देरी न हो। उन्होंने चरागाह और प्लांटेशन से संबंधित प्रकरणों पर भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
बजरी खानों की नीलामी के बावजूद पर्यावरण स्वीकृतियों में देरी पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि बजरी खनन शुरू होने से आमजन को बड़ी राहत मिल सकेगी।
वन एवं पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार ने कहा कि अनुमतियों में हो रही देरी को आपसी समन्वय और सहयोग से दूर किया जाएगा तथा विभागीय स्तर पर मॉनिटरिंग व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव दिनेश कुमार ने बताया कि चरागाह क्लीयरेंस से जुड़े प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण किया जाएगा।
खनन एवं भूविज्ञान विभाग के प्रमुख सचिव टी. रविकांत ने बताया कि पिछले दो वर्षों में प्रदेश में बड़ी संख्या में मेजर मिनरल ब्लॉकों और बजरी प्लॉटों की नीलामी के बावजूद कई खानें अभी परिचालन में नहीं आ पाई हैं। केंद्र और प्रधानमंत्री कार्यालय स्तर पर भी नीलाम खानों को शीघ्र चालू कराने पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में दो खानें परिचालन में हैं, जबकि इस वर्ष के अंत तक आठ मेजर मिनरल ब्लॉकों में खनन कार्य आरंभ कराने का लक्ष्य है। नीलाम बजरी खानों के परिचालन में विलंब से बजरी की मांग और आपूर्ति में भारी अंतर है, जिससे आमजन को राहत नहीं मिल पा रही। अन्य खानों में खनन शुरू होने से औद्योगिक निवेश, रोजगार और राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन रविकुमार सुरपुर ने कहा कि जिला कलक्टरों के समन्वय से नीलाम खानों की पर्यावरण अनुमतियों हेतु लंबित जनसुनवाई कार्य जल्द पूरा कराया जाएगा।
बैठक में हॉफ पी.के. उपाध्याय, सदस्य सचिव स्टेट एनवायरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी विजय एन., संयुक्त सचिव वन महेंद्र कुमार, निदेशक खान एवं भूविज्ञान महावीर प्रसाद मीणा, संयुक्त सचिव खान अरविंद सारस्वत, प्रभारी फेसिलिटेशन सेल प्रताप मीणा, ओएसडी श्रीकृष्ण शर्मा सहित खान, वन, राजस्व और गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।