जयपुर, 19 जुलाई 2026 / नरेश गुनानी / मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार द्वारा निवेश को बढ़ावा देने और औद्योगिक विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों पर राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी मुहर लगी है। नीति आयोग द्वारा जारी देश के पहले ‘निवेश अनुकूलता सूचकांक’ (Investment Readiness Index) में राजस्थान को ‘अग्रणी राज्य’ (Front-Runner State) की श्रेणी में शामिल किया गया है।
नीति आयोग की इस रिपोर्ट में समग्र (ओवरऑल) रैंकिंग में राजस्थान पूरे देश में 10वें स्थान पर और बड़े राज्यों की श्रेणी में 8वें स्थान पर रहा है। वहीं, बड़े राज्यों की श्रेणी के तहत अलग-अलग मानकों में राजस्थान ने देश के शीर्ष राज्यों में जगह बनाई है। यह कामयाबी राज्य में कारोबार को आसान बनाने (इज़ ऑफ डूइंग बिजनेस) और उद्योगों के लिए एक पारदर्शी एवं बेहतर माहौल तैयार करने की दिशा में किए गए सतत सुधारों का परिणाम है।
विभिन्न श्रेणियों में राजस्थान का राष्ट्रीय प्रदर्शन
नीति आयोग के सूचकांक के अनुसार, बड़े राज्यों की श्रेणी में राजस्थान ने प्रमुख क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है:
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प्रदर्शन का मानक (Parameter) |
देश भर में स्थान (बड़े राज्यों में) |
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नियामकीय सुगमता (नियमों का सरलीकरण) |
दूसरा स्थान |
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निवेश प्रोत्साहन नीतियां |
तीसरा स्थान |
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संसाधनों की उपलब्धता |
पांचवां स्थान |
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समग्र रैंकिंग (Overall Ranking) |
आठवां स्थान |
राज निवेश पोर्टल से प्रक्रियाओं का सरलीकरण: आधे समय में मिल रहे बिजली कनेक्शन
राज्य में उद्योगों की स्थापना को आसान बनाने के लिए सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम यानी राज निवेश पोर्टल को बेहद मजबूत और आधुनिक बनाया है। वर्तमान में इस एकल खिड़की पोर्टल पर 18 अलग-अलग विभागों की 190 सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं।
- आवेदनों का त्वरित निस्तारण: वित्तीय वर्ष 2025-26 में पोर्टल पर कुल 34,704 आवेदन मिले थे, जबकि चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 30 जून तक ही 30 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इनमें से 17 हजार से ज्यादा आवेदनों का निस्तारण भी किया जा चुका है।
- निस्तारण की दर: वर्तमान में आवेदनों के निपटारे की समग्र दर 64 प्रतिशत है, जबकि सबसे ज्यादा उपयोग में आने वाली 11 प्रमुख सेवाओं में यह दर 68 प्रतिशत दर्ज की गई है।
- समय की भारी बचत: सरकारी प्रयासों से प्रमुख सेवाओं के औसत निस्तारण समय में बड़ी कमी आई है। प्रदेश में नए औद्योगिक या व्यावसायिक विद्युत कनेक्शन की औसत स्वीकृति अवधि पिछले वित्तीय वर्ष के 20 दिनों से घटकर मात्र 10 दिन रह गई है। इसी तरह, पर्यटन परियोजनाओं की मंजूरी की अवधि भी 22 दिनों से घटकर 16 दिन हो गई है।
ढाई वर्षों में लागू हुईं 30 से अधिक नई औद्योगिक नीतियां
नीति आयोग द्वारा राजस्थान की नीतियों को देश में तीसरा स्थान देने के पीछे राज्य सरकार की दूरगामी सोच है। पिछले ढाई वर्षों के दौरान राज्य में औद्योगिक निवेश को रफ्तार देने के लिए 30 से अधिक नई और संशोधित नीतियां लागू की गई हैं।
इनमें एमएसएमई (MSME), निर्यात प्रोत्साहन, टेक्सटाइल एवं अपैरल, लॉजिस्टिक्स, स्वच्छ ऊर्जा (क्लीन एनर्जी), डेटा सेंटर और देश में पहली बार बनीं ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC), सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस एवं डिफेंस जैसी कई सेक्टर-आधारित अनूठी नीतियां शामिल हैं। इन नीतिगत सुधारों ने देश-विदेश के निवेशकों को राजस्थान की ओर आकर्षित किया है।
निवेशकों का बढ़ा भरोसा और ‘राइजिंग राजस्थान’ का असर
नीति आयोग के इस सूचकांक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह केवल सरकारी कागजों और आंकड़ों पर आधारित नहीं है। इसमें देशभर के वास्तविक निवेशकों से प्राप्त ग्राउंड फीडबैक, उनके अनुभवों और सुझावों को भी शामिल किया गया है। इससे साफ है कि राजस्थान के प्रति निवेशकों का भरोसा बेहद मजबूत हुआ है।
हाल ही में आयोजित ‘राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट’ ने राज्य में एक बेहद सकारात्मक माहौल तैयार किया है। इस समिट के दौरान अलग-अलग सेक्टर्स में 35 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश समझौते (MoUs) हुए हैं, जिनमें से लगभग 9 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं की ग्राउंड ब्रेकिंग (धरातल पर शुरुआत) भी हो चुकी है। इन परियोजनाओं की खुद मुख्यमंत्री स्तर पर नियमित समीक्षा की जा रही है।
क्या है निवेश अनुकूलता सूचकांक?
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को पूरा करने के लिए राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नीति आयोग ने इस सूचकांक को तैयार किया है। जुलाई 2024 में नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में प्रधानमंत्री ने राज्यों के लिए एक निवेश-अनुकूल इकोसिस्टम विकसित करने का आह्वान किया था, जिसके बाद केंद्रीय बजट 2025-26 में इस ‘निवेश अनुकूलता सूचकांक’ को विकसित करने की आधिकारिक घोषणा की गई थी। इस राष्ट्रीय सूचकांक में अग्रणी बनकर राजस्थान ने देश के औद्योगिक मानचित्र पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।