नरेश गुनानी
जयपुर, 12 मई। राजस्थान ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। नीति आयोग द्वारा जारी नवीनतम रिपोर्ट ‘स्कूल एजुकेशन सिस्टम इन इंडिया-टेम्पोरल एनालिसिस एण्ड पाॅलिसी रौडमेप फाॅर क्वालिटी इन्हेंसमेंट’ में राजस्थान के सकारात्मक शैक्षणिक परिदृश्य की सराहना की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कक्षा 1 से 12 तक की एकीकृत शिक्षा (Integrated Education) उपलब्ध करवाने के मामले में राजस्थान पूरे देश में अव्वल स्थान पर है।
देश का हर तीसरा एकीकृत विद्यालय राजस्थान में
नीति आयोग के आंकड़े चौंकाने वाले और गौरवपूर्ण हैं। रिपोर्ट के अनुसार:
- वर्ष 2024-25 में पूरे देश के मात्र 5.4 प्रतिशत विद्यालयों में ही कक्षा 1 से 12 तक की एकीकृत शिक्षा उपलब्ध थी।
- इसके विपरीत, राजस्थान ने इस क्षेत्र में 35 प्रतिशत की विशाल हिस्सेदारी दर्ज की है।
- सरल शब्दों में कहें तो, भारत में कक्षा 1 से 12वीं तक की शिक्षा एक ही छत के नीचे देने वाला हर तीसरा विद्यालय राजस्थान में स्थित है।
- वर्तमान में प्रदेश के 27,889 विद्यालय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर की शिक्षा एक साथ प्रदान कर रहे हैं।
ड्रॉप-आउट दर में आएगी कमी
नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि जब प्राथमिक से उच्च माध्यमिक तक की शिक्षा अलग-अलग संस्थानों में होती है, तो विद्यार्थियों को बार-बार प्रवेश प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इस स्थानांतरण के कारण अक्सर छात्र पढ़ाई छोड़ देते हैं (ड्रॉप-आउट)। राजस्थान में एकीकृत विद्यालयों का इतना मजबूत नेटवर्क होने से:
- विद्यार्थियों को स्कूल बदलने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
- शैक्षणिक संकेतकों (Educational Indicators) में निरंतर सुधार हो रहा है।
- छात्रों के लिए एक स्थिर और बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार हुआ है।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शैक्षणिक सुदृढ़ीकरण
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान तेजी से शैक्षणिक उपलब्धियों के केंद्र के रूप में उभर रहा है। उनके मार्गदर्शन में राज्य सरकार शैक्षणिक संस्थानों के विकास, विस्तार और उनके बुनियादी ढांचे के उन्नयन (Upgradation) पर विशेष ध्यान दे रही है। यह रिपोर्ट सरकार के उन्हीं प्रयासों का परिणाम है, जिससे प्रदेश का शैक्षिक ढांचा अन्य राज्यों की तुलना में अधिक व्यवस्थित और सुलभ हुआ है।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का रोडमैप
नीति आयोग की यह रिपोर्ट न केवल राजस्थान की वर्तमान सफलता को दर्शाती है, बल्कि भविष्य के लिए एक ‘पॉलिसी रोडमैप’ भी प्रस्तुत करती है। राजस्थान का यह मॉडल अब अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है, जहां शिक्षा की निरंतरता बनाए रखने के लिए एकीकृत विद्यालयों पर जोर दिया जा रहा है।