नीट पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; एनटीए को लगाई फटकार, कहा- ‘अतीत की घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया’

नई दिल्ली। गणपत चौहान 

देश की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा ‘नीट-यूजी’ (NEET-UG) में पेपर लीक और कथित अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने बेहद तल्ख टिप्पणी की और कहा कि एनटीए ने पहले की घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया है। अदालत ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था की तरफ से ‘0.001% भी लापरवाही’ हुई है, तो उससे पूरी कड़ाई से निपटा जाना चाहिए।

​जस्टिस की पीठ ने मामलों की सुनवाई करते हुए कहा कि लाखों छात्रों की मेहनत और देश की चिकित्सा व्यवस्था की गरिमा को किसी भी एजेंसी की प्रशासनिक लापरवाही के कारण दांव पर नहीं लगाया जा सकता।

अदालत की तीन सबसे तल्ख टिप्पणियां

1. ‘गलतियों को स्वीकार कर सुधार करे एनटीए’

​सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परीक्षा आयोजित करने वाली एक नोडल एजेंसी के रूप में एनटीए को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होना चाहिए। अदालत ने कहा, “यदि प्रक्रिया में कोई चूक हुई है, तो उसे छिपाने के बजाय स्वीकार किया जाना चाहिए और तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए। हमें यह देखकर दुख होता है कि पिछली परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के बावजूद सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत नहीं किया गया।”

2. ‘छात्रों की मेहनत को कमतर नहीं आंका जा सकता’

​पीठ ने टिप्पणी की कि जो छात्र दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं, उनके मन में व्यवस्था के प्रति अविश्वास की भावना पैदा नहीं होनी चाहिए। अगर पेपर लीक या धांधली के जरिए अयोग्य लोग डॉक्टर बनते हैं, तो यह समाज और पूरी स्वास्थ्य प्रणाली के लिए बेहद खतरनाक साबित होगा।

3. ‘समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए गए?’

​अदालत ने एनटीए के वकीलों से पूछा कि जब देश के अलग-अलग हिस्सों (जैसे बिहार और गुजरात) से पेपर लीक और डमी कैंडिडेट बैठाने की एफआईआर (FIR) सामने आ रही थीं, तब एजेंसी ने आंतरिक स्तर पर ठोस और पारदर्शी कदम क्यों नहीं उठाए?

केंद्र सरकार और एनटीए का पक्ष

​सुनवाई के दौरान एनटीए और केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए वकीलों ने अदालत को आश्वस्त करने की कोशिश की कि परीक्षा पूरी तरह रद्द करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि गड़बड़ी कुछ चुनिंदा केंद्रों तक ही सीमित थी।

  • उच्च स्तरीय समिति का गठन: सरकार ने अदालत को बताया कि भविष्य में परीक्षाओं को पूरी तरह सुरक्षित और लीक-प्रूफ बनाने के लिए विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो सुधारों की रूपरेखा तैयार कर रही है।
  • दोषियों पर कार्रवाई: सरकार ने यह भी तर्क दिया कि इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) समेत अन्य राज्यों की पुलिस कर रही है और कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है।

आगे क्या? सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

​सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एनटीए और केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वे एक व्यापक हलफनामा (Affidavit) दायर करें। इस हलफनामे में निम्नलिखित जानकारियां मांगी गई हैं:

    1. लीक का दायरा: पेपर लीक का नेटवर्क कहां-कहां फैला था और इससे कितने छात्र सीधे तौर पर लाभांवित हुए?
    2. डाटा एनालिसिस: क्या लीक का असर पूरी परीक्षा पर पड़ा है या इसे अलग किया जा सकता है?
    3. सुरक्षा ढांचा: भविष्य में ऐसी परीक्षाओं को साइबर हमलों और फिजिकल लीक से बचाने के लिए एनटीए क्या कड़े कदम उठाने जा रही है?

​मामले की अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट जांच एजेंसियों की स्टेटस रिपोर्ट और एनटीए द्वारा सुझाए गए सुधारात्मक उपायों की समीक्षा करेगा। देश भर के 24 लाख से अधिक छात्र और उनके अभिभावक इस ऐतिहासिक सुनवाई पर अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं।

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