नरेश गुनानी
- शिक्षा के साथ मानवीय मूल्यों को भी आत्मसात करें युवा पीढ़ी, तभी देश का कल स्वर्णिम होगा
- डिग्री केवल कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि मानव जीवन का पवित्र दायित्व है: विधान सभा अध्यक्ष
- विशिष्ट अतिथि गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने शिक्षा की गुणवत्ता और प्राचीन गौरव को लौटाने पर दिया जोर
- राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित हुआ भव्य समारोह; शोधार्थियों को पीएचडी और विद्यार्थियों को मिलीं उपाधियां
जयपुर, 16 मई 2026
राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष डॉ. वासुदेव देवनानी ने युवाओं का आव्हान किया है कि वे विज्ञान को आध्यात्म, तकनीक को संस्कृति और आधुनिकता को मानवता से जोड़ें। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी दुनिया को नई दिशा देने की क्षमता रखती है। यदि युवा पीढ़ी शिक्षा के साथ-साथ मानवीय मूल्यों को भी अपने जीवन में आत्मसात करेगी, तो आने वाले कल का परिदृश्य देश के लिए स्वर्णिम होगा।
डॉ. देवनानी शनिवार को जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित निर्वाण विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
भारत की चेतना ने सदैव ज्ञान को मानव कल्याण से जोड़ा
मुख्य अतिथि ने भारत के वैश्विक योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत ने विश्व को शून्य, आयुर्वेद, योग, ध्यान और आध्यात्म का विज्ञान दिया है। आज भारत अंतरिक्ष, डिजिटल तकनीक, चिकित्सा, रक्षा अनुसंधान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में विश्व की अग्रणी शक्तियों में शामिल हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन केवल तकनीकी उपलब्धियों का नहीं, बल्कि उस चेतना का प्रमाण है जो सदैव ज्ञान को मानव कल्याण से जोड़ती आई है।
डिग्री एक पवित्र दायित्व, भारत को बनाएं स्वास्थ्य गुरु
विश्वविद्यालय के दर्शन की सराहना करते हुए उन्होंने कहा:
”डिग्री केवल एक कागज मात्र नहीं है, यह मानव जीवन का पवित्र दायित्व है। निर्वाण विश्वविद्यालय ने जिस दर्शन को अपनाया है वह है ‘ज्ञानार्जन को जीवन-निर्माण से जोड़ना’, जो अपने आप में अद्वितीय है। विद्यार्थी देश में आरोग्य संस्कृति विकसित करें और भारत को पुनः स्वास्थ्य गुरु बनाएं।”
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि अपने जीवन और आचरण को इतना ऊँचा बनाइए कि आपकी सफलता केवल आपका व्यक्तिगत परिचय न बने, बल्कि भारत की आत्मा का परिचय बने।
प्राचीन गौरव की ओर लौटने की आवश्यकता: जवाहर सिंह बेढ़म
समारोह के विशिष्ट अतिथि गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में भारत के विश्वविद्यालयों में विदेशी लोग अध्ययन के लिए आते थे। आज हमें उसी मूल की ओर लौटने की आवश्यकता है। हमें ऐसे उत्कृष्ट संस्थान बनाने होंगे कि अन्य देशों के लोग भारतीय संस्कृति, भारतीय दर्शन और आध्यात्म को पढ़ने और समझने के लिए वापस भारत का रुख करें।
शोध और नवाचार से मिलेगी राष्ट्र को नई दिशा
इस अवसर पर राज्यपाल के सलाहकार (उच्च शिक्षा) प्रो. कैलाश सोडाणी ने कहा कि शोध और नवाचार के क्षेत्र में विद्यार्थियों को नई सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए, जिससे समाज और राष्ट्र को नई दिशा मिल सके। समारोह में राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (RUHS), जयपुर के पूर्व कुलपति प्रो. (डॉ.) राजा बाबू पंवार की विशेष उपस्थिति रही। इसके साथ ही निर्वाण चैरिटेबल ट्रस्ट श्री गंगानगर के चेयरपर्सन डॉ. मंजीत सिंह निर्वाण ने भी कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त किए।
विश्वविद्यालय परिवार ने जताई प्रसन्नता
- चेयरमैन डॉ. एस. एल. सिहाग ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के वर्षों के परिश्रम, अनुशासन और उपलब्धियों का उत्सव है। उन्होंने विद्यार्थियों से इस ज्ञान का उपयोग समाजहित में करने की अपील की।
- कुलपति प्रो. एस. एल. गोदारा ने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं शोध के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है और शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
- उपकुलपति प्रो. भावना देथा ने प्रथम दीक्षांत समारोह को संस्थान के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और कहा कि विद्यार्थियों की सफलता ही विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी पहचान है।
- कुलसचिव डॉ. सी. एम. राजोरिया ने बताया कि समारोह के सफल आयोजन के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अतिथियों के स्वागत, विद्यार्थियों के पंजीकरण, बैठक व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
चेहरे पर मेडल की चमक और हाथों में डिग्रियों की खुशियां
गौरतलब है कि इस प्रथम दीक्षांत समारोह में विभिन्न संकायों के शोधार्थियों को पीएचडी (Ph.D.) की उपाधि प्रदान की गई, साथ ही स्नातक (Undergraduate) और स्नातकोत्तर (Postgraduate) के छात्र-छात्राओं को डिग्रियां वितरित की गईं। मेडल और उपाधियां पाकर विद्यार्थियों के चेहरे पर सफलता की मुस्कान थी और अभिभावकों की आंखों में गर्व साफ झलक रहा था। पूरे परिसर में उत्सव जैसा माहौल रहा और यह दिन विद्यार्थियों के जीवन की सबसे यादगार उपलब्धियों में शामिल हो गया।