नागौर: साडोकन में गोचर भूमि पर प्रशासन का ‘पीला पंजा’, हाईकोर्ट के आदेश पर बड़ी कार्रवाई

| गौरव कोचर

नागौर | 24 मार्च 2026

​नागौर जिले के साडोकन गांव की गोचर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए प्रशासन ने राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेशों की पालना में एक बार फिर सख्त और प्रभावी कार्रवाई को अंजाम दिया है। यह कार्रवाई वर्षों से सार्वजनिक उपयोग की चारागाह भूमि पर जमाए गए कब्जों को हटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम साबित हुई है।

उच्च न्यायालय के आदेश की कड़ाई से पालना

राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर ने डी.बी. सिविल रिट पिटीशन संख्या 11629/2013 में 13 नवंबर 2013 को पारित अपने विस्तृत आदेश के तहत साडोकन गांव की चारागाह भूमि के खसरा नंबर 33, 195, 215, 351, 441, 627, 746 एवं 751 पर स्थित सभी अतिक्रमणों को नियमानुसार हटाने के निर्देश दिए थे।

​न्यायालय के इस आदेश की पालना में तहसीलदार नागौर ने समय-समय पर अतिक्रमणों का बारीकी से चिन्हीकरण किया। राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956 की धारा 91 के तहत सभी अतिक्रमियों को विधिवत नोटिस जारी किए गए और उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित अवसर प्रदान किया गया। इसके बाद ही नियमानुसार बेदखली और अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने की कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया।

सैकड़ों बीघा गोचर भूमि हुई बहाल

वर्ष 2013 में इस गोचर भूमि पर कुल 77 अतिक्रमण दर्ज किए गए थे। उस समय लगभग 53.09 बीघा भूमि पर कच्चे-पक्के निर्माण और बाड़बंदी कर अवैध कब्जा किया गया था। राजस्व टीम द्वारा चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की गई:

  • 25 सितंबर 2017: एक बड़ी कार्रवाई में लगभग 18.15 बीघा गोचर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया।
  • 09 दिसंबर 2017: पुनः कार्रवाई कर शेष अतिक्रमणों को हटाया गया।
  • 09 जनवरी 2018: 12 अतिक्रमियों को बेदखल किया गया।
  • 26 जनवरी 2020: 9 और अतिक्रमियों के खिलाफ बेदखली की कार्रवाई हुई।
  • 08 सितंबर 2021: राजस्व टीम द्वारा पुनः अतिक्रमण हटाए गए।

विधिक चुनौतियां और प्रशासन का रुख

कार्रवाई को रोकने के लिए कुछ अतिक्रमियों द्वारा उच्च न्यायालय में एस.बी. सिविल रिट संख्या 10258/2018 एवं 4043/2018 दायर की गई। न्यायालय ने दिनांक 22.02.2018 एवं 10.04.2018 को क्रमशः इन मामलों में अंतरिम आदेश पारित किए। यह प्रकरण वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय के अनुसार आगे की कार्रवाई को अमली जामा पहनाया जाएगा।

​वर्तमान में यह पूरा मामला जिला स्तरीय सतर्कता समिति और पीएलपीसी (Public Land Protection Cell) में भी दर्ज है। यहां न्यायालय के आदेशों की पालना की नियमित रूप से समीक्षा की जा रही है। नागौर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि गोचर एवं अन्य किसी भी प्रकार की सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के विरुद्ध बिना किसी शिथिलता के सख्त कार्रवाई अनवरत जारी रहेगी।

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