‘नागरिक देवो भव’ के मंत्र से विकसित भारत का मार्ग प्रशस्त करेंगे कर्मयोगी: प्रधानमंत्री मोदी

गणेश शर्मा 

नई दिल्ली, 02 अप्रैल 2026

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्षमता निर्माण आयोग (सीबीसी) के स्थापना दिवस के अवसर पर ‘कर्मयोगी साधना सप्ताह’ को वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने सार्वजनिक सेवाओं को आधुनिक बनाने, तकनीक को अपनाने और लोक सेवकों में सेवा भाव जागृत करने पर विशेष बल दिया।

​​नागरिक केंद्रित शासन: प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार का मूल सिद्धांत ‘नागरिक देवो भव’ है। शासन को अब सक्षम और नागरिकों के प्रति संवेदनशील बनाकर एक नई पहचान दी जा रही है।
  • अधिकारी नहीं, कर्मयोगी बनें: प्रधानमंत्री ने प्रशासनिक संस्कृति में बदलाव का आह्वान करते हुए कहा कि अब ‘अधिकारी’ होने के बजाय ‘कर्तव्य’ पर ध्यान केंद्रित करना होगा। उन्होंने याद दिलाया कि संविधान कर्तव्यों के निर्वाह से ही अधिकार प्रदान करता है।
  • प्रौद्योगिकी और डेटा की शक्ति: भविष्य की चुनौतियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक बेहतर लोक सेवक वही है जिसे प्रौद्योगिकी और डेटा की गहरी समझ हो। उन्होंने विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग और इसके निरंतर सीखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
  • संवादहीनता की समाप्ति: प्रधानमंत्री ने विभागों के बीच तालमेल की कमी (साइलो) को खत्म करने की बात कही। उन्होंने कहा कि ‘होल ऑफ गवर्नमेंट अप्रोच’ (समग्र सरकारी दृष्टिकोण) और बेहतर समन्वय से ही हर मिशन को सफल बनाया जा सकता है।
  • विकसित भारत का संकल्प: उन्होंने कहा कि आज का भारत आकांक्षी है। नागरिकों के सपनों को पूरा करने के लिए लोक सेवकों को अपने व्यक्तिगत परिवर्तन को संस्थागत परिवर्तन में बदलना होगा।

​प्रधानमंत्री ने अंत में कहा कि स्थानीय सरकारी कार्यालय ही जनता के लिए सरकार का चेहरा होते हैं, इसलिए अधिकारियों का व्यवहार ऐसा होना चाहिए जो लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को और मजबूत करे।

‘नागरिक देवो भव’ के संकल्प के साथ प्रधानमंत्री ने किया कर्मयोगी साधना सप्ताह का शुभारंभ

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्षमता निर्माण आयोग के स्थापना दिवस पर ‘कर्मयोगी साधना सप्ताह’ को संबोधित करते हुए लोक सेवकों को ‘नागरिक देवो भव’ का मूल मंत्र दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब शासन में ‘अधिकारी’ भाव के स्थान पर ‘कर्तव्य’ भाव सर्वोपरि है। उन्होंने बेहतर निर्णय लेने के लिए डेटा और AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) की समझ को अनिवार्य बताया।

​प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि विभागों के बीच की संवादहीनता खत्म कर साझा समझ विकसित करनी होगी, ताकि आम नागरिक के जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो सके। उन्होंने लोक सेवकों से आग्रह किया कि वे अपनी कार्यशैली से लोकतंत्र में जनता का विश्वास बनाए रखें।

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