जयपुर / गौरव कोचर/ पत्र सूचना कार्यालय (PIB), जयपुर द्वारा ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ विषय पर एक दिवसीय ‘वार्ता’ (मीडिया कार्यशाला) का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री द्वारा 2 अगस्त 2026 को शुरू किए गए 100 सप्ताह के राष्ट्रव्यापी अभियान को राजस्थान के प्रत्येक कोने तक पहुँचाने में मीडिया की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करना तथा युवाओं में मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
2029 तक भारत को नशा मुक्त बनाने का रोडमैप: NCB
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अभिषेक नारायण सिन्हा (जोनल डायरेक्टर, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो – NCB) ने कहा कि नशा केवल एक कानूनी समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक चुनौती है।
उन्होंने महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा करते हुए बताया:
- विज़न डॉक्यूमेंट (2026–2029): गृह मंत्रालय द्वारा जून 2026 में “विज़न डॉक्यूमेंट ऑन नारकोटिक्स कंट्रोल (2026–2029)” लॉन्च किया गया है। इसका लक्ष्य खुफिया अभियानों, उन्नत तकनीक और अंतर-एजेंसी समन्वय से पूरे ड्रग नेटवर्क को ध्वस्त कर 2029 तक भारत को नशा मुक्त बनाना है।
- राजस्थान में कार्रवाई: राजस्थान में NCB के जयपुर और जोधपुर में दो प्रमुख कार्यालय हैं। पुलिस व अन्य एजेंसियों के सहयोग से राज्य में अब तक 4 हज़ार किलोग्राम ड्रग्स जब्त कर नष्ट की जा चुकी है। वर्ष 2025 में दर्ज 6,387 मामलों की तुलना में जुलाई 2026 तक ही लगभग 5 हज़ार मामले दर्ज हो चुके हैं।
- डार्क नेट और नई तकनीक पर नजर: डार्क नेट तथा क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से होने वाली मादक पदार्थों की खरीद-बिक्री पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। NCB की विशेष अदालतों की संख्या भी 9 से बढ़ाकर 13 कर दी गई है।
- हेल्पलाइन 1933: आम नागरिक मादक पदार्थों से जुड़ी किसी भी सूचना के लिए NCB के हेल्पलाइन नंबर 1933 पर संपर्क कर सकते हैं।
”मीडिया समाज का दर्पण भी है और मार्गदर्शक भी”
पत्र सूचना कार्यालय, जयपुर के निदेशक अनुभव बैरवा ने कहा कि भारत विश्व का सबसे युवा देश है और यही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। युवाओं को नशे की लत से बचाकर उनकी ऊर्जा का सही उपयोग शिक्षा, खेल, कौशल और राष्ट्र निर्माण में करना ही इस अभियान का मुख्य ध्येय है।
उन्होंने मीडिया से अपील की कि वह नशा मुक्ति अभियानों, सफल पुनर्वास की प्रेरक कहानियों और युवाओं की सकारात्मक उपलब्धियों को प्रमुखता से प्रकाशित करे, ताकि समाज में जागरूकता का प्रसार हो सके।
नशा एक जटिल बीमारी, इलाज और सहयोग संभव: चिकित्सा विशेषज्ञ
वार्ता की विशिष्ट अतिथि डॉ. रेणु खंडेलवाल (CGHS, जयपुर) ने कहा कि नशे को महज एक आदत नहीं, बल्कि एक जटिल बीमारी के रूप में देखा जाना चाहिए, जिसमें जेनेटिक और मनोवैज्ञानिक कारणों की भी भूमिका होती है।
उन्होंने बताया कि नशे की गिरफ्त से बाहर निकलने के लिए:
- डिटॉक्सिफिकेशन (Detoxification) से शुरुआत कर मनोवैज्ञानिक परामर्श लिया जाना चाहिए।
- पारिवारिक सहयोग और इच्छाशक्ति से नशे की लालसा को नियंत्रित किया जा सकता है।
- ध्यान एवं योग के माध्यम से भी व्यक्ति को पुनः सामान्य जीवन शैली में लाया जा सकता है।
’ऑपरेशन युवा रक्षा’ और ‘माय भारत’ की पहल
- केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN): प्रिवेंटिव एंड इंटेलिजेंस सेल के सुपरिंटेंडेंट डी. के. सोथी ने बताया कि सीबीएन पारंपरिक ड्रग्स के साथ-साथ सिंथेटिक ड्रग्स और अवैध मेडिकल इंजेक्शनों के गिरोह का भंडाफोड़ कर रहा है। युवाओं को जागरूक करने के लिए ‘ऑपरेशन युवा रक्षा’ के तहत स्कूल-कॉलेजों और कोचिंग सेंटरों के पास नुक्कड़ नाटक व रैलियाँ आयोजित की जा रही हैं।
- माय भारत (MY Bharat): सहायक निदेशक प्रदीप कुमार ने बताया कि युवा मामले एवं खेल मंत्रालय द्वारा राज्यभर में कविता, भाषण और लोक नृत्य के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। जल्द ही राज्य स्तरीय विजेताओं को राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए नई दिल्ली भेजा जाएगा।
’ज़िंदगी को हाँ, नशे को ना’ का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी अधिकारियों, पत्रकारों एवं प्रतिनिधियों ने “ज़िंदगी को ‘हां’, नशे को ‘ना'” की शपथ ली।
पत्र सूचना कार्यालय, जयपुर के उप निदेशक धर्मेश भारती ने सभी आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर PIB और केंद्रीय संचार ब्यूरो (ROB), जयपुर के वरिष्ठ अधिकारी तथा कर्मचारी उपस्थित रहे।