नव विधान – न्याय की नई पहचान प्रदर्शनी का चौथा दिन: त्वरित और पारदर्शी न्याय की दिशा में राजस्थान की नई पहल

नव विधान – न्याय की नई पहचान प्रदर्शनी का चौथा दिन: त्वरित और पारदर्शी न्याय की दिशा में राजस्थान की नई पहल

जयपुर, 18 अक्टूबर 2025

गौरव कोचर •

राजधानी जयपुर के जेईसीसी (जयपुर एग्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर) में आयोजित “नव विधान – न्याय की नई पहचान” प्रदर्शनी का चौथा दिन नई तकनीक, आधुनिक जांच प्रक्रिया और पारदर्शी न्याय प्रणाली का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा। राज्य सरकार द्वारा आमजन को नए आपराधिक कानूनों से परिचित कराने के उद्देश्य से आयोजित इस प्रदर्शनी में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।

समयबद्ध अन्वेषण और पारदर्शी प्रक्रिया से त्वरित न्याय

प्रदर्शनी के चौथे दिन का मुख्य विषय रहा “समयबद्ध अन्वेषण और पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया से पीड़ित को त्वरित न्याय”। नए आपराधिक कानूनों ने न केवल न्याय प्रणाली को अधिक कुशल बनाया है, बल्कि इसे पीड़ित-केंद्रित भी किया है। प्रदर्शनी में विभिन्न लाइव मॉडल के माध्यम से यह दिखाया गया कि घटना घटित होने के बाद से लेकर पीड़ित को न्याय मिलने तक की पूरी प्रक्रिया किस तरह तकनीक-संचालित और पारदर्शी हो गई है।

जीवंत मॉडल से समझाई गई नई न्याय प्रक्रिया

प्रदर्शनी के विभिन्न स्टॉलों पर पुलिस कंट्रोल रूम, घटनास्थल, थाना, एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब), अस्पताल, न्यायालय और जेल प्रशासन के लाइव मॉडल बनाए गए, जिनमें कलाकारों और अधिकारियों ने न्याय प्रक्रिया का सजीव रूपांतरण प्रस्तुत किया।
इन मॉडलों में यह दर्शाया गया कि—

  • कंट्रोल रूम में शिकायत प्राप्त होते ही पुलिस किस तरह ई-साक्ष्य ऐप के जरिए घटनास्थल की वीडियो रिकॉर्डिंग, फोटोग्राफी, टाइम स्टैंप, जीपीएस लोकेशन और हैश वैल्यू जैसे डिजिटल प्रमाण जुटाती है।
  • CRIMAC (Crime Multi Agency Centre) पोर्टल के माध्यम से विभिन्न जांच एजेंसियां अपराध और अपराधियों से जुड़ी सूचनाओं का रीयल-टाइम आदान-प्रदान करती हैं।

फेस रिकॉग्निशन और फिंगरप्रिंट सिस्टम का आधुनिक प्रयोग

पुलिस थाना मॉडल में चित्र खोजी ऐप का प्रदर्शन किया गया — यह एक फेस रिकॉग्निशन सॉफ्टवेयर है जिसमें एक करोड़ से अधिक अपराधियों का डेटाबेस मौजूद है। इस तकनीक से संदिग्धों की तुरंत पहचान संभव हो जाती है।
इसी प्रकार, NAFIS (National Automated Fingerprint Identification System) को भी प्रदर्शित किया गया, जो देशभर के अपराधियों के फिंगरप्रिंट का राष्ट्रीय संग्रह बनाता है। इसमें सभी राज्यों और एजेंसियों को जोड़ा गया है ताकि अपराधियों की पहचान तुरंत की जा सके।

फॉरेंसिक क्षमताओं में विस्तार

नए कानूनों के तहत एफएसएल की क्षमताओं का भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। पहले जहां रिपोर्ट महीनों लंबित रहती थी, वहीं अब समयबद्ध रिपोर्टिंग सिस्टम लागू होने से जांच तेजी से पूरी होती है। प्रदर्शनी में बताया गया कि इससे न्याय प्रणाली में देरी कम हुई है और पीड़ितों को शीघ्र राहत मिलने लगी है।

ई-प्रॉसीक्यूशन और ऑनलाइन चार्जशीट प्रणाली

नए कानूनों ने ई-प्रॉसीक्यूशन प्रणाली को मजबूत किया है। अब चार्जशीट, साक्ष्य और कानूनी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड होने लगे हैं। इससे न केवल समय की बचत हो रही है बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ी है।
ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की व्यवस्था से अब आरोपियों के पेशी में देरी, सुरक्षा खर्च और पुलिस बल की तैनाती में कमी आई है — जिससे सरकार के संसाधनों की बचत हो रही है।

विशेषज्ञों का सत्र: कानून, एआई और न्याय का नया युग

प्रदर्शनी में आयोजित विशेष सत्रों में कानूनविदों, पुलिस अधिकारियों, विधि विद्यार्थियों और विशेषज्ञों ने “नवीन कानून, फोरेंसिक तकनीक, एआई और जेल सुधार” जैसे विषयों पर गहन चर्चा की।
सत्र में कहा गया कि नई आपराधिक संहिताओं ने न्याय प्रक्रिया को अधिक सुसंगत, वैज्ञानिक और मानव-केंद्रित बनाया है। इससे सजा प्रतिशत में वृद्धि हुई है और अपराध नियंत्रण में प्रभावी सुधार आए हैं।

जनभागीदारी और विधिक शिक्षा का समावेश

इस अवसर पर विधि महाविद्यालयों के छात्र-छात्राएं, शिक्षक, विधिवेत्ता और आम नागरिक बड़ी संख्या में पहुंचे। प्रतिभागियों ने कहा कि ऐसी प्रदर्शनी आमजन को न केवल कानूनों से परिचित कराती है बल्कि पुलिस और न्याय प्रणाली के प्रति विश्वास भी बढ़ाती है।

राज्य सरकार की पहल को मिली सराहना

प्रदर्शनी के आयोजन की सराहना करते हुए आगंतुकों ने कहा कि यह पहल न केवल न्याय व्यवस्था को आधुनिक रूप दे रही है, बल्कि “न्याय सबके लिए सुलभ और शीघ्र” बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है।

 

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