नव वर्ष पर ‘सरस राजसखी मेले’ में उमड़ा जनसैलाब: रिकॉर्ड बिक्री के साथ आत्मनिर्भर दीदियों के चेहरों पर लौटी मुस्कान

नव वर्ष पर ‘सरस राजसखी मेले’ में उमड़ा जनसैलाब: रिकॉर्ड बिक्री के साथ आत्मनिर्भर दीदियों के चेहरों पर लौटी मुस्कान

जयपुर | 1 जनवरी 2026

| नरेश गुनानी

​नव वर्ष 2026 का पहला दिन जयपुर के सरस राजसखी राष्ट्रीय मेले के लिए ऐतिहासिक रहा। साल की पहली सुबह से ही मेले में उत्साह और उमंग का माहौल रहा। रंग-बिरंगे स्टॉल्स, पारंपरिक संगीत और हस्तशिल्प की खुशबू ने पूरे परिसर को एक जीवंत उत्सव में बदल दिया। बड़ी संख्या में पहुंचे आगंतुकों ने न केवल मेले का आनंद लिया, बल्कि स्वयं सहायता समूहों (SHG) की दीदियों द्वारा तैयार उत्पादों की जमकर खरीदारी भी की।

​बिक्री में भरतपुर और बाड़मेर का दबदबा

​मेले में इस बार बिक्री के नए कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार:

  • भरतपुर का जय शिव शंकर एसएचजी: अब तक की सबसे ज्यादा बिक्री के साथ पहले स्थान पर है। समूह की सदस्य नीलम ने बताया कि उनके जूट प्रोडक्ट्स की बाजार में भारी मांग है।
  • बाड़मेर का दिनुवानी एसएचजी: कशीदाकारी के बेहतरीन उत्पादों के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
  • बाड़मेर का जोगमाया एसएचजी: अजरक प्रिंट के कपड़ों की लोकप्रियता के कारण रिकॉर्ड बिक्री कर रहा है। समूह सदस्य गंगादेवी ने इस सफलता का श्रेय राजीविका द्वारा प्रदान किए गए मंच को दिया।

​स्वाद का जादू: जयपुर की पाव भाजी और सवाई माधोपुर के व्यंजन

​फूड स्टॉल्स पर भी लोगों की भारी भीड़ देखी गई।

  • जयपुर का राधास्वामी एसएचजी: अपनी जायकेदार पाव भाजी के साथ सेल में सबसे आगे रहा।
  • सवाई माधोपुर का सरस्वती एसएचजी: अपने पारंपरिक व्यंजनों के स्वाद से लोगों को लुभाकर दूसरे स्थान पर बना हुआ है।

​सपनों को मिल रही उड़ान: दीदियों की जुबानी

​मेले में केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों की महिलाएं भी अपनी कला का प्रदर्शन कर रही हैं।

  • आंध्र प्रदेश से आई एक दीदी ने बताया कि पहली बार इतने बड़े मंच पर आने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है।
  • हरियाणा की सदस्य ने खुशी जताई कि उनके हैंडलूम उत्पादों की मांग इतनी अधिक है कि स्टॉक कम पड़ रहा है।
  • आत्मनिर्भरता: कई महिलाओं ने भावुक होकर बताया कि राजीविका के सहयोग से वे आज आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो पाई हैं। ग्राहकों से मिल रही सराहना उनके लिए केवल कमाई नहीं, बल्कि सम्मान की बात है।

​ग्राहकों का अनुभव: विविधता और अपनापन

​मेले में आए देसी-विदेशी पर्यटकों और स्थानीय निवासियों ने इस आयोजन की जमकर तारीफ की।

  • ​जयपुर की कविता और कॉलेज छात्र राहुल ने बताया कि यहाँ एक ही छत के नीचे पूरे भारत की संस्कृति और शिल्प देखने को मिल रहा है।
  • ​विदेशी पर्यटक सारा भारतीय हस्तशिल्प और वस्त्रों की बारीकी देखकर मंत्रमुग्ध नजर आईं।
  • ​युवाओं के बीच स्टाइलिश बैग्स, विंटर वियर और सिल्क स्टॉल्स का विशेष क्रेज देखा गया।

​सांस्कृतिक संध्या का आकर्षण

​मेले की रौनक को शाम के समय होने वाली सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और चार चाँद लगा रही हैं। लाइव परफॉर्मेंस और लोकनृत्य देखने के लिए लोग बार-बार मेले का रुख कर रहे हैं। दिल्ली से आए पर्यटक अंकित ने सुझाव दिया कि ऐसे आयोजन नियमित रूप से होने चाहिए क्योंकि ये भारत की विविधता को खूबसूरती से दर्शाते हैं।

​सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 अब केवल एक बाजार नहीं रहा, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण, मेहनत और आत्मनिर्भरता का एक सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है।

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