नवोदय विद्यालयों में बुनियादी ढांचा मजबूत: तीन वर्षों में हजारों नए छात्रावास बिस्तरों का निर्माण

नई दिल्ली/ प्रीति बालानी/देशभर के जवाहर नवोदय विद्यालयों (JNV) में ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए आवासीय एवं शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। शिक्षा मंत्रालय ने संसद (लोकसभा) में प्रस्तुत जानकारी में बताया कि पिछले तीन वर्षों में देश के विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में बड़े पैमाने पर नए डॉर्मिटरी (छात्रावास) बिस्तरों का निर्माण पूर्ण किया गया है और कई नए प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं।

​लोकसभा में सांसद रामभुआल निषाद द्वारा पूछे गए अतारांकित प्रश्न संख्या 1290 के उत्तर में शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने नवोदय विद्यालयों में छात्रावासों के चरणबद्ध निर्माण और उपलब्ध क्षमताओं का ब्यौरा प्रस्तुत किया।

​तीन चरणों में होता है विद्यालयों एवं छात्रावासों का निर्माण

​सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि जवाहर नवोदय विद्यालयों (एनवी) के स्थायी भवनों एवं छात्रावासों का निर्माण एक सतत प्रक्रिया है। यह उपयुक्त भूमि की पहचान, प्रायोजक प्राधिकारियों द्वारा नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस) के पक्ष में पट्टा (लीज) औपचारिकताएं पूरी करने, निर्माण एजेंसियों द्वारा नक्शा व लागत अनुमान प्रस्तुत करने, धनराशि की उपलब्धता, आवश्यक स्वीकृतियों तथा विद्यालयों के क्रमिक विस्तार पर निर्भर करता है।

​विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि तथा उपलब्ध अवसंरचना के प्रभावी उपयोग को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य को तीन चरणों में विभाजित किया जाता है:

  1. चरण-ए (Phase-A): इसके अंतर्गत मुख्य विद्यालय भवन, रसोई सह भोजन कक्ष (Kitchen & Dining Hall), आंशिक छात्रावास (Partial Hostel) तथा आंशिक स्टाफ आवासों का निर्माण किया जाता है।
  2. चरण-बी (Phase-B): इसके अंतर्गत शेष आंशिक छात्रावास तथा स्टाफ आवासों का निर्माण किया जाता है।
  3. चरण-बी शेष (Phase-B Remaining): इसके अंतर्गत वास्तविक आवश्यकता के अनुसार शेष छात्रावासों का निर्माण पूर्ण किया जाता है।

​उत्तर प्रदेश में छात्रावासों का निर्माण और विस्तार

​उत्तर प्रदेश में वर्ष 2023-24 के दौरान विभिन्न नवोदय विद्यालयों में छात्रावास निर्माण पूरा किया गया, जिसमें:

  • कांशीरामनगर: 192 बिस्तर
  • हापुड़: 384 बिस्तर
  • शामली: 192 बिस्तर
  • बदायूं: 192 बिस्तर
  • सुल्तानपुर: 288 बिस्तर

​इसके अलावा, वर्ष 2025-26 के दौरान उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर (24 बिस्तर) तथा सीतापुर-I (48 बिस्तर) में नए छात्रावासों के निर्माण का कार्य प्रारंभ किया गया है।

​पिछले तीन वर्षों में राज्यवार डॉर्मिटरी (बिस्तरों) के निर्माण का विवरण

​(i) वर्ष 2023-24 में निर्मित डॉर्मिटरी (बिस्तर)

क्र. सं.

राज्य / केंद्रशासित प्रदेश

डॉर्मिटरी (बिस्तरों की संख्या)

1.

अरुणाचल प्रदेश

1,056

2.

बिहार

192

3.

छत्तीसगढ़

1,824

4.

गुजरात

1,728

5.

हिमाचल प्रदेश

192

6.

जम्मू और कश्मीर

2,112

7.

कर्नाटक

288

8.

मध्य प्रदेश

480

9.

महाराष्ट्र

192

10.

मणिपुर

192

11.

मेघालय

288

12.

नागालैंड

288

13.

ओडिशा

240

14.

त्रिपुरा

384

15.

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह

384

16.

उत्तर प्रदेश

1,248

17.

पश्चिम बंगाल

480

(ii) वर्ष 2024-25 में निर्मित डॉर्मिटरी (बिस्तर)

क्र. सं.

राज्य / केंद्रशासित प्रदेश

डॉर्मिटरी (बिस्तरों की क्षमता)

1.

अरुणाचल प्रदेश

1,248

2.

बिहार

384

3.

छत्तीसगढ़

576

4.

दिल्ली

480

5.

गुजरात

384

6.

जम्मू और कश्मीर

1,176

7.

झारखंड

840

8.

कर्नाटक

192

9.

मध्य प्रदेश

384

10.

महाराष्ट्र

192

11.

मेघालय

696

12.

त्रिपुरा

240

13.

पश्चिम बंगाल

384

(iii) वर्ष 2025-26 में प्रारंभ / स्वीकृत डॉर्मिटरी (बिस्तर)

क्र. सं.

राज्य / केंद्रशासित प्रदेश

डॉर्मिटरी (बिस्तरों की क्षमता)

1.

आंध्र प्रदेश

168

2.

अरुणाचल प्रदेश

1,632

3.

असम

480

4.

बिहार

480

5.

छत्तीसगढ़

336

6.

दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव

72

7.

गुजरात

192

8.

जम्मू और कश्मीर

192

9.

झारखंड

312

10.

कर्नाटक

96

11.

मध्य प्रदेश

1,464

12.

महाराष्ट्र

168

13.

मणिपुर

48

14.

ओडिशा

1,704

15.

पुडुचेरी

24

16.

पंजाब

48

17.

सिक्किम

96

18.

तेलंगाना

48

19.

उत्तर प्रदेश

72

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