नववर्ष का प्रथम पुष्य नक्षत्र: मोती डूंगरी में ‘नक्षत्र राज’ का महाभिषेक, 151 किलो दूध और शहद की बहेगी धार

नववर्ष का प्रथम पुष्य नक्षत्र: मोती डूंगरी में ‘नक्षत्र राज’ का महाभिषेक, 151 किलो दूध और शहद की बहेगी धार

| योगेश शर्मा

जयपुर। नववर्ष के प्रथम और नक्षत्रों के राजा माने जाने वाले पुष्य नक्षत्र के पावन अवसर पर सोमवार को जयपुर के प्रसिद्ध मोती डूंगरी गणेश मंदिर में भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। इस विशेष संयोग पर विघ्नहर्ता गजानन महाराज का भव्य पंचामृत अभिषेक संपन्न होगा, जिसकी तैयारियां मंदिर प्रशासन द्वारा पूर्ण कर ली गई हैं।

​151 किलो दूध और पंचद्रव्यों से होगा अभिषेक

​मंदिर महंत कैलाश शर्मा ने बताया कि पुष्य नक्षत्र के शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश का अभिषेक अत्यंत विशिष्ट द्रव्यों से किया जाएगा। अभिषेक के लिए तैयार किए जाने वाले पंचामृत में शुद्धता और परंपरा का विशेष ध्यान रखा गया है:

  • दूध: 151 किलो
  • दही: 21 किलो
  • बूरा (शर्करा): 21 किलो
  • घी: सवा पाँच किलो
  • शहद: विशेष मात्रा में

​अभिषेक के पश्चात भगवान गजानन को नवीन सिंदूरी चोला धारण कराया जाएगा और स्वर्ण मुकुट व दिव्य आभूषणों से उनका अलौकिक श्रृंगार होगा।

​मंत्रोच्चार और महाभोग की तैयारी

​पंचामृत अभिषेक के दौरान मंदिर के विद्वान पंडितों द्वारा अथर्वशीर्ष का सामूहिक पाठ किया जाएगा। वैदिक मंत्रों की गूंज से संपूर्ण मोती डूंगरी क्षेत्र भक्तिमय हो उठेगा। अभिषेक के बाद भगवान को उनकी प्रिय वस्तुओं का महाभोग लगाया जाएगा:

  1. राजभोग: मुख्य भोग में केसरिया खीर और गरमा-गरम मालपुए अर्पित किए जाएंगे।
  2. मोदक अर्पण: गणनायक को उनकी अति प्रिय वस्तु 1008 मोदकों का विशेष भोग लगाया जाएगा।

​सुख-समृद्धि और कार्य सिद्धि का संयोग

​ज्योतिष शास्त्र में पुष्य नक्षत्र को अत्यंत फलदायी माना गया है। इस दिन की गई गणेश आराधना से न केवल कार्यों में आने वाले विघ्न दूर होते हैं, बल्कि घर में स्थायी सुख-समृद्धि का वास होता है। नववर्ष का पहला पुष्य नक्षत्र होने के कारण इस दिन भक्तों की भारी भीड़ जुटने की संभावना है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में विशेष बेरिकेडिंग और सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं।

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