जयपुर/ गौरव कोचर/नगर निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं के आगामी आम चुनावों के दौरान साइबर ठगी और भ्रामक सूचनाओं के बढ़ते खतरे को देखते हुए राजस्थान पुलिस ने व्यापक एडवाइजरी जारी की है। पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार मतदाताओं, प्रत्याशियों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम एवं तकनीकी सेवाएं) वी.के. सिंह के अनुसार, चुनाव के दौरान साइबर अपराधी फर्जी लिंक, OTP, QR कोड, फिशिंग ईमेल और डीपफेक सामग्री का सहारा लेकर वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दे सकते हैं।
प्रमुख खतरे और बचाव के उपाय
- ‘वोटर लिस्ट में नाम देखें’ जैसे फर्जी लिंक से बचें: व्हाट्सएप या एसएमएस पर प्राप्त होने वाले ऐसे संदेशों पर भरोसा न करें जिनमें वोटर लिस्ट में नाम देखने या पोलिंग बूथ बदलने का दावा किया गया हो। मतदान संबंधी अधिकृत जानकारी के लिए केवल राज्य निर्वाचन आयोग अथवा मुख्य निर्वाचन अधिकारी की आधिकारिक वेबसाइट का ही प्रयोग करें।
- OTP और बैंकिंग विवरण कभी साझा न करें: चुनाव आयोग का अधिकारी बनकर वोटर कार्ड अपडेट या सत्यापन के नाम पर आने वाली कॉल्स से सावधान रहें। किसी भी अनजान व्यक्ति को फोन पर OTP, बैंक खाते का विवरण या UPI पिन न दें।
- डीपफेक और भ्रामक सामग्री की पुष्टि करें: सोशल मीडिया पर नेताओं के नाम से वायरल होने वाले फर्जी भाषण, वीडियो और ऑडियो संदेशों की सत्यता जांचे बिना उन्हें आगे फॉरवर्ड न करें।
- प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं के सोशल मीडिया की सुरक्षा: प्रत्याशी व राजनीतिक कार्यकर्ता अपने फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स और व्हाट्सएप खातों पर टू-स्टेप वेरिफिकेशन (2FA) अनिवार्य रूप से सक्रिय रखें और मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें।
- चुनावी चंदे और QR कोड से ठगी: डोनेशन या फंड जुटाने के नाम पर भेजे जा रहे यूपीआई लिंक और क्यूआर कोड की पड़ताल करें। ध्यान रखें कि राशि प्राप्त करने के लिए कभी भी UPI पिन दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होती।
- व्हाट्सएप ग्रुप एडमिन की जिम्मेदारी: चुनाव संबंधी ग्रुप्स में केवल अधिकृत सदस्यों को ही पोस्ट करने की अनुमति दें। भ्रामक सामग्री की रोकथाम के लिए आवश्यकतानुसार ग्रुप सेटिंग में “Only Admins” का विकल्प चुनें।
- चुनाव कार्मिकों के लिए दिशा-निर्देश: चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारी चुनावी डेटा अथवा ईवीएम/वीवीपैट से जुड़ी संवेदनशील जानकारी निजी डिवाइस या पब्लिक वाई-फाई नेटवर्क पर साझा न करें। अनजान ईमेल से आए सर्कुलर या अटैचमेंट को न खोलें।
ठगी होने पर तुरंत यहां करें शिकायत
साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होने पर ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें। इसके अलावा राजस्थान पुलिस की साइबर हेल्पडेस्क के नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी सूचना दी जा सकती है। नागरिक नजदीकी साइबर थाने या राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।