नई दिल्ली/ गौरव कोचर/भारत की अध्यक्षता में आयोजित होने जा रहा 18वां ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन वैश्विक सहयोग को सुदृढ़ करने और ‘ग्लोबल साउथ’ के हितों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से उठाने की दिशा में एक अहम पड़ाव साबित होगा। अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चौना में ने इस सम्मेलन के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत इस बहुपक्षीय मंच को अधिक समावेशी, प्रभावी और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में निरंतर काम कर रहा है।
चौना में ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए अपने संदेश में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘ह्यूमैनिटी फर्स्ट’ (मानवता प्रथम) विजन के अनुरूप भारत का लक्ष्य ब्रिक्स को केवल औपचारिक वार्ताओं तक सीमित न रखकर इसे आम लोगों के जीवन से जुड़ी वास्तविक चुनौतियों के समाधान का माध्यम बनाना है।
भारत मंडपम में जुटेगा वैश्विक नेतृत्व
18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली स्थित अत्याधुनिक ‘भारत मंडपम’ में आयोजित किया जा रहा है।
- 20 वर्षों का सफर: वर्ष 2026 ब्रिक्स समूह की स्थापना का 20वां वर्ष भी है। दो दशकों की इस यात्रा में यह संगठन वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक संतुलन का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।
- भारत की चौथी अध्यक्षता: भारत ने 1 जनवरी 2026 को ब्रिक्स की कमान संभाली थी। यह चौथा अवसर है जब भारत इस प्रभावशाली समूह की अध्यक्षता कर रहा है।
सम्मेलन की मुख्य थीम और प्राथमिकताएं
भारत की अध्यक्षता का केंद्रीय विषय ‘Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability’ (लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और संधारणीयता का निर्माण) तय किया गया है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक स्थिरता और सतत विकास के साझा लक्ष्यों को गति देना है।
इस बार के एजेंडे में तकनीकी और वित्तीय आत्मनिर्भरता से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीक: तकनीकी नवाचार, सुरक्षित डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और उत्तरदायी AI के उपयोग पर विशेष विमर्श होगा।
- मजबूत सप्लाई चेन व वित्तीय सहयोग: वैश्विक उथल-पुथल के बीच लचीली और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण करना तथा स्थानीय मुद्राओं (Local Currencies) में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना।
- जलवायु परिवर्तन और हरित ऊर्जा: स्वच्छ ऊर्जा के स्रोतों को अपनाना और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यावहारिक कार्ययोजनाएं तैयार करना।
- युवा सशक्तीकरण: कौशल विकास, उद्यमिता और भविष्य की अर्थव्यवस्था के अनुरूप युवाओं को अवसर उपलब्ध कराना।
- आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस: सीमा पार आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा खतरों के खिलाफ ब्रिक्स मंच से ‘जीरो टॉलरेंस’ के साझा संकल्प को पुनः दोहराया जाएगा।
सामूहिक समाधान का सशक्त मंच
चौना में के अनुसार, भारत का यह नेतृत्व एक अधिक संतुलित, न्यायसंगत और टिकाऊ वैश्विक भविष्य के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाएगा। वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनावों और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच, भारत ब्रिक्स को ऐसी संस्था के रूप में विकसित कर रहा है जो उभरती अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों के सामूहिक और सर्वसमावेशी समाधान प्रस्तुत कर सके।