धर्म, संस्कृति और संत परंपरा के प्रति समर्पित है मंत्री सुरेश सिंह रावत — गुरु पूर्णिमा पर तीर्थराज पुष्कर में संतों का सम्मान

धर्म, संस्कृति और संत परंपरा के प्रति समर्पित है मंत्री सुरेश सिंह रावत — गुरु पूर्णिमा पर तीर्थराज पुष्कर में संतों का सम्मान

Edited By : नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
जुलाई 11,2025

Photo credit Telegraph Times

(हरिप्रसाद शर्मा)
पुष्कर/अजमेर, 11 जुलाई 2025 — गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर तीर्थराज पुष्कर धार्मिक श्रद्धा और संत सम्मान का केंद्र बना रहा। इस अवसर पर राजस्थान सरकार के जल संसाधन मंत्री एवं पुष्कर विधायक सुरेश सिंह रावत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का संदेश लेकर पुष्कर पहुंचे और वहां उपस्थित संतजनों का विधिवत पूजन व सम्मान कर सनातन परंपरा के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।

संत सम्मान के माध्यम से सनातन मूल्यों का संदेश

मंत्री रावत ने कहा, “सनातन की रक्षा करने वाले संतों का सम्मान करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। यही हमारे संस्कारों की पहचान है।”
उन्होंने कहा कि वर्तमान भौतिकतावादी युग में जब समूचा विश्व आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है, ऐसे समय में भारतीय संत समाज ही सनातन परंपरा, संस्कृति और मूल्यों का संरक्षण कर रहा है। उनका जीवन और मार्गदर्शन समाज के लिए प्रकाश स्तंभ के समान है।

संतों के चरणों में श्रद्धांजलि

गुरु पूर्णिमा के इस अवसर पर मंत्री रावत ने पुष्कर में विभिन्न प्रमुख संतों का सम्मान किया। उन्होंने संत सुदर्शन दास महाराज (हनुमान गढ़ी), नंदशरण राम महाराज (रामसखा आश्रम), भगवानदास महाराज (गुलाब दास आश्रम), हनुमाना राम महाराज (उदासीन आश्रम), मधुसूदन दास महाराज (दादू दयाल वामदेव आश्रम), अभीराम दास महाराज (गीता आश्रम), सांवरा महाराज (रावत मंदिर) सहित अन्य संतों को माल्यार्पण कर, शॉल ओढ़ाकर और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया।

धर्मनिष्ठ जनसेवक के रूप में पहचान

सुरेश सिंह रावत सिर्फ एक कुशल प्रशासक नहीं, बल्कि एक धर्मनिष्ठ, संस्कृति अनुरागी और संत परंपरा के प्रति समर्पित जनसेवक हैं। पुष्कर जैसे आध्यात्मिक नगरी का प्रतिनिधित्व करते हुए वे संत समाज के सतत संपर्क में रहते हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में जहां एक ओर जल संसाधन, सिंचाई, शिक्षा और आधारभूत विकास को गति दी है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को भी सशक्त करने का कार्य किया है।

उनकी यही कार्यशैली उन्हें सामान्य जनप्रतिनिधियों से अलग एक संस्कारशील जननेता के रूप में स्थापित करती है। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था में भारतीय संस्कृति को प्रतिष्ठा दिलाने का निरंतर प्रयास किया है।

जनसहभागिता और उत्साह

इस पुण्य अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक, संत अनुयायी, भाजपा पदाधिकारी व श्रद्धालुजन उपस्थित रहे। जिनमें प्रमुख रूप से कमल पाठक, अरुण वैष्णव, पुष्कर नारायण भाटी, भुवनेश पाठक, घनश्याम भाटी, धीरज जादम, अशोक पाराशर, अंशुमान पाराशर, धर्मेंद्र नागोरा, कमल रामावत, लक्ष्मी पाराशर, सुमन कुमावत, मोहन सिंह रावत, बने सिंह रावत, कमल सिंह रावत, हरिशंकर चौहान, मदन सांखला, सुरेश नागोरा, दामु पाराशर, लक्ष्मीकांत गौड़ सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

 

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