धरमजयगढ़ में हाथियों का तांडव: मां ने जान देकर बचाई दुधमुंही बच्ची, दो ग्रामीणों की दर्दनाक मौत, वन विभाग की गाड़ी पर भी हमला

बुधराम अग्रवाल/ कूड़ेकेला //रायगढ़/ छत्तीसगढ़,धरमजयगढ़ वन मंडल में हाथियों का रौद्र रूप देखकर इलाके के लोग थर्रा उठे हैं। वन मंडल की अलग-अलग रेंजों में इस वक्त कुल 106 हाथियों का दल डेरा डाले हुए है, जिससे पूरे क्षेत्र में भारी दहशत का माहौल है। शनिवार की तड़के हाथियों ने एक के बाद एक दो लोगों को बेरहमी से कुचलकर मौत के घाट उतार दिया, जबकि एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई।

​हाथियों के इस कहर ने न केवल दो जिंदगियां तबाही कीं, बल्कि 9 ग्रामीणों के आशियाने भी जमींदोज कर दिए। तबाही का आलम यह था कि हाथियों की निगरानी कर रही वन विभाग की टीम को भी अपनी जान बचाकर भागना पड़ा और गुस्से में आए गजराज ने सरकारी गाड़ी (बुलेरो) को भी तहस-नहस कर दिया। इस भीषण त्रासदी के बाद वन विभाग की खोखली ‘मुनादी’ और दावों को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।

कटहल की महक खींच लाई काल: मां ने कलेजे के टुकड़े को सीने से लगाकर दी जान

दिल को झकझोर देने वाली पहली घटना भोर के ठीक 4 बजे कापू परिक्षेत्र के लिप्ती गांव में हुई। ग्रामीण शकुंतला सिदार के घर के पास कटहल का एक पेड़ है। पके हुए कटहल की तेज खुशबू सूंघकर एक विशालकाय हाथी आधी रात को वहां धमक पड़ा।

​घर के बाहर हाथी की चिंघाड़ सुनकर शकुंतला की आंख खुल गई। दहशत से कांपती मां ने तुरंत अपनी दुधमुंही बच्ची को कलेजे से लगाया और जान बचाने के लिए बाहर की तरफ भागी। लेकिन भागते समय हाथी ने उन्हें देख लिया और पीछा करके उन पर हमला कर दिया। हाथी ने शकुंतला को बेरहमी से कुचल दिया, जिससे मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई। हालांकि, मौत के मुंह में जाने से पहले मां ने अपनी बच्ची को इस तरह छुपाया कि मासूम को एक खरोंच तक नहीं आई। मां की ममता ने खुद मिटकर भी अपनी औलाद को नया जीवन दे दिया। इसी दौरान हाथी के हमले में चांदनी चौहान नामक एक अन्य महिला गंभीर रूप से घायल हो गईं, जिन्हें अस्पताल में दाखिल कराया गया है।

सुबह की दिनचर्या बनी आखिरी सुबह: घर की गली में ही पटककर मारा

​अभी इस घटना की गूंज शांत भी नहीं हुई थी कि सुबह ठीक 5 बजे छाल परिक्षेत्र के अवरनारा (ओरानारा) गांव में मौत का दूसरा तांडव हुआ। यहाँ के निवासी 52 वर्षीय बंधन सिंह अगरिया (पिता डोकरी) रोज की तरह सुबह-सुबह शौच के लिए घर से बाहर निकले थे। उन्हें जरा भी भनक नहीं थी कि मौत बनकर हाथी उनके घर के ठीक बाहर गली में ही खड़ा है।

​बंधन जैसे ही गली में आए, सड़क पार कर जंगल की ओर जा रहे हाथी से उनका आमना-सामना हो गया। अचानक सामने आए विशालकाय हाथी को देखकर बंधन जान बचाकर भागने लगे, लेकिन हाथी ने फुर्ती दिखाते हुए उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। हाथी ने बंधन को उठाकर सड़क पर पटका और पैरों से कुचलकर मार डाला।

9 ग्रामीणों के आशियाने उजड़े, रहने का बड़ा संकट

​हाथियों के इस दल ने न सिर्फ इंसानों पर हमला किया, बल्कि जमकर आर्थिक नुकसान भी पहुंचाया है। क्षेत्र में उत्पात मचाते हुए हाथियों ने कुल 9 मकानों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। गजराज के गुस्से का शिकार हुए प्रमुख ग्रामीणों के नाम इस प्रकार हैं:

  • ​हृदय लकड़ा
  • ​अभय तिग्गा
  • ​कृष्णा लकड़ा
  • ​मधुसूदन यादव
  • ​बसंत चौहान
  • ​तेज राम सिदार
  • ​सुखराम चौहान

​इन सभी परिवारों के सामने अब सिर छुपाने और रहने का बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

वन विभाग की टीम पर हमला: जान बचाकर भागे ‘हाथी मित्र’

​इन दोनों घटनाओं से पहले ही वन विभाग और हाथी मित्र दल की टीम इलाके में एक्टिव थी। 106 हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए कापू रेंज के तालगांव में टीम लगातार हाथियों की लोकेशन ट्रेस कर मॉनिटरिंग कर रही थी। लेकिन हाथियों को इंसानों का यह पहरा रास नहीं आया।

​निगरानी के दौरान ही अचानक एक आक्रामक हाथी चिंघाड़ता हुआ वन विभाग की सरकारी गाड़ी की तरफ तेजी से बढ़ा। हाथी का रौद्र रूप और उसकी रफ्तार देख टीम के हौसले पस्त हो गए। अधिकारी और हाथी मित्र तुरंत गाड़ी छोड़-छाड़ कर अपनी जान बचाकर भागे। पीछे छूटी वन विभाग की बुलेरो गाड़ी पर हाथी ने अपना पूरा गुस्सा उतार दिया और उसे अपनी सूंड से उठाकर पटक दिया।

वन विभाग के दावों पर सवाल: ‘मुनादी’ फेल, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

​इस भीषण हादसे के बाद वन विभाग एक बार फिर ‘मुनादी’ कराने का ढिंढोरा पीटकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहा है। विभाग का कहना है कि उन्होंने जंगल की तरफ न जाने की अपील की थी। लेकिन ग्रामीणों का आक्रोश सातवें आसमान पर है और वे बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं:

  • ट्रैकिंग सिस्टम फेल क्यों? हाथियों की मूवमेंट की सटीक निगरानी क्यों नहीं की जा रही? हाथी आसानी से रिहायशी बस्तियों तक कैसे पहुंच रहे हैं?
  • सिर्फ मुनादी के भरोसे जान? क्या जंगलों के किनारे बसे गांवों में सोलर फेंसिंग, हाथी रोधक खाई या त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) की तैनाती सिर्फ कागजों पर ही सीमित है?
  • मुआवजा ही स्थायी समाधान नहीं: हर बार किसी की जान जाने के बाद चंद रुपयों का मुआवजा देकर विभाग अपनी पीठ थपथपा लेता है, लेकिन उजड़ते परिवारों के दर्द और हाथी-मानव द्वंद्व को रोकने का कोई स्थायी इलाज ढूंढने में पूरी तरह नाकाम रहा है।

अधिकारियों का पक्ष और वर्तमान स्थिति

​दोनों दर्दनाक हादसों की खबर मिलते ही वन विभाग और पुलिस की आला टीमें मौके पर पहुंचीं। विभाग ने तत्परता दिखाते हुए पीड़ित परिवारों को तत्काल सहायता राशि प्रदान की है और आगे की वैधानिक व कागजी कार्रवाई शुरू कर दी है।

कापू वनपरिक्षेत्र अधिकारी सूर्यकांत नेताम का बयान:

“यह कापू वनपरिक्षेत्र की घटना है, जहां तीन हाथियों का दल सक्रिय था, जिसमें नर-मादा के साथ एक शावक हाथी भी शामिल था। हमारी सरकारी गाड़ी गश्त पर थी, इसी बीच हाथी अचानक सामने आ गया, जिसके बाद स्टाफ ने गाड़ी छोड़कर अपनी जान बचाई। इससे पहले चिंतामाड़ा में भी हाथी ने अटैक किया था। वर्तमान में इस पूरे क्षेत्र में 29 हाथियों का एक अन्य दल भी विचरण कर रहा है।”

 

​फिलहाल पूरे क्षेत्र में तनाव, डर और भारी दहशत का माहौल है। वन विभाग ने मुनादी कराकर ग्रामीणों को अकेले जंगलों की तरफ न जाने और सुबह-शाम घरों में ही रहने की सख्त हिदायत दी है। लेकिन इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर वन विभाग ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया और ठोस उपाय नहीं अपनाए, तो यह खूनी खेल थमने वाला नहीं है।

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