गौरव कोचर
नई दिल्ली / रायसेन, 31 मई 2026: बढ़ती रासायनिक खादों के इस्तेमाल से घटती मिट्टी की उपजाऊ क्षमता और जलवायु परिवर्तन के संकट के बीच देश के कृषि तंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। देश की मिट्टी और खेती के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से 1 जून 2026 से मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के रामसिया गांव से राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ का औपचारिक शुभारंभ होने जा रहा है।
इस ऐतिहासिक अभियान की शुरुआत से पहले, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK), आईसीएआर (ICAR) संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वर्चुअल संवाद किया। उन्होंने आह्वान किया कि यह कोई प्रशासनिक कर्मकांड नहीं है, बल्कि पूरी अंतरात्मा से खेतों में उतरकर काम करने का राष्ट्रीय दायित्व है।
अभियान का मुख्य रोडमैप और बहुआयामी उद्देश्य
1 जून से शुरू होकर 30 जून 2026 तक चलने वाले इस देशव्यापी जनआंदोलन का मुख्य फोकस किसानों को जागरूक करने और मौके पर ही समाधान देने पर रहेगा। इसके तहत निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष कार्य किया जाएगा:
- संतुलित उर्वरक और सॉयल हेल्थ: किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के असंतुलित उपयोग को रोकने, मिट्टी परीक्षण (Soil Testing) और सॉयल हेल्थ कार्ड के महत्व को समझाया जाएगा।
- प्राकृतिक और टिकाऊ खेती: रासायनिक खेती के विकल्प के रूप में प्राकृतिक खेती, हरी खाद के उपयोग और फसल विविधीकरण (Crop Selection) को बढ़ावा देना।
- नकली इनपुट पर प्रहार: बाजार में बिकने वाले नकली खाद, बीज और पेस्टिसाइड की पहचान करने के लिए किसानों को सक्षम बनाना।
- जल संरक्षण और वैकल्पिक पद्धतियां: पानी के सही प्रबंधन के साथ-साथ कम वर्षा की स्थिति में अपनाई जाने वाली वैकल्पिक कृषि पद्धतियों की जानकारी देना।
वैज्ञानिक प्रमाण और जमीनी डेमो पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को केवल कागजी सलाह देना पर्याप्त नहीं होगा। कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों को खुद खेतों में उतरकर लाइव डेमो, वैज्ञानिक प्रमाण और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से किसानों का विश्वास जीतना होगा।
”बढ़ता तापमान, रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध उपयोग और मिट्टी के स्वास्थ्य में आ रही गिरावट खेती के सामने गंभीर चुनौती हैं। धरती मां की लाज रखना हम सबका साझा दायित्व है और इसके लिए व्यापक व्यवहारिक हस्तक्षेप जरूरी है।”
— शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि मंत्री
मजबूत मॉनिटरिंग और राष्ट्रव्यापी समन्वय
अभियान को पूरी तरह पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल और प्रशासनिक तंत्र को मुस्तैद किया गया है:
- डैशबोर्ड आधारित मॉनिटरिंग: 30 जून तक का एक विस्तृत जिलावार रोडमैप तैयार किया गया है, जिसके तहत कौन सा वैज्ञानिक या अधिकारी किस तारीख को किस गांव में जाएगा, यह पहले से तय होगा। इसकी निगरानी सीधे डैशबोर्ड से की जाएगी।
- सभी राज्यों की सहभागिता: इस महाअभियान में देश के सभी राज्यों को जोड़ने के लिए केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्रियों से फोन पर चर्चा की है। साथ ही केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की गई है।
- मंत्री का सीधा संवाद: केंद्रीय कृषि मंत्री खुद इस अभियान के दौरान विभिन्न राज्यों के गांवों का दौरा करेंगे और चौपालों पर किसानों से सीधा संवाद करेंगे।
सरकारी योजनाओं का एकमुश्त लाभ
‘खेत बचाओ अभियान’ केवल जागरूकता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे बहुउद्देश्यीय स्वरूप देते हुए किसानों को आर्थिक और तकनीकी रूप से सशक्त करने वाली योजनाओं से भी जोड़ा जाएगा। अभियान के दौरान गांवों में पात्र किसानों को निम्नलिखित योजनाओं का लाभ मौके पर सुनिश्चित कराया जाएगा:
- किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और पीएम किसान सम्मान निधि
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
- मिनी बीज किट और दलहन-तिलहन मिशन
- कृषि यंत्रीकरण (Agricultural Mechanization) योजनाएं
व्यापक प्रचार-प्रसार की अपील
केंद्रीय मंत्री ने देशहित के इस कार्यक्रम को जन-जन तक पहुंचाने के लिए अधिकारियों और वैज्ञानिकों को बिना किसी संकोच के मीडिया से निरंतर संवाद करने को कहा। उन्होंने भरोसा जताया कि जिस तरह पहले ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ ने सफलता के नए आयाम छुए थे, उसी तरह ‘खेत बचाओ अभियान’ भी देश में कृषि सुधार का नया और सफल अध्याय लिखेगा।
इस उच्च स्तरीय वर्चुअल बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण सचिव अतिश चंद्र, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट सहित देशभर के कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति, कृषि वैज्ञानिक और केंद्र व राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।