CDSCO ने दी हरी झंडी | 4 से 60 वर्ष के लोग लगवा सकेंगे टीका | बिना पूर्व जांच के दी जाएगी खुराक
नरेश गुनानी | नई दिल्ली
भारत में हर साल मानसून के दौरान कहर ढाने वाले डेंगू संक्रमण पर लगाम लगाने के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने देश की पहली डेंगू वैक्सीन ‘क्यूडेंगा’ (QDENGA) के इस्तेमाल को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है।
टीकाकरण प्रक्रिया होगी आसान
इस नए टीके की सबसे बड़ी खासियत इसका आसान और सीधा प्रयोग है। अब तक उपलब्ध डेंगू रोधी टीकों के साथ सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि टीका लगाने से पहले यह जांचना अनिवार्य होता था कि व्यक्ति को पहले कभी डेंगू हुआ है या नहीं।
क्यूडेंगा के मामले में किसी भी प्रकार के प्री-स्क्रीनिंग या पूर्व ब्लड टेस्ट की आवश्यकता नहीं होगी। व्यक्ति को पहले डेंगू हुआ हो या न हुआ हो, यह टीका दोनों ही स्थितियों में पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी है।
क्यूडेंगा वैक्सीन: एक नजर में
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प्रमुख पहलू |
विवरण |
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वैक्सीन का नाम |
क्यूडेंगा (QDENGA) |
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स्वीकृत आयु सीमा |
4 वर्ष से 60 वर्ष तक |
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खुराक (Dose) |
2 खुराकें (3 महीने के अंतर पर) |
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मुख्य लाभ |
अस्पताल में भर्ती होने और गंभीर संक्रमण का खतरा बेहद कम |
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विशेषता |
टीका लगवाने से पहले किसी डेंगू टेस्ट की आवश्यकता नहीं |
गंभीर मामलों और अस्पताल में भर्ती होने से मिलेगी राहत
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस मंजूरी से देश के स्वास्थ्य ढांचे (Healthcare System) पर मानसून के समय पड़ने वाला दबाव काफी कम होगा।
“डेंगू के चारों सीरोटाइप्स के खिलाफ काम करने वाला यह टीका संक्रमण को गंभीर रूप लेने से रोकता है। इससे विशेष रूप से बच्चों और वयस्कों में डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती होने की दर में भारी गिरावट आएगी।”
— स्वास्थ्य विशेषज्ञ
सतर्कता अभी भी जरूरी
हालाँकि वैक्सीन डेंगू के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम करेगी, लेकिन स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मच्छर नियंत्रण के उपाय, जलभराव रोकना और आसपास स्वच्छता बनाए रखना पहले की तरह ही प्राथमिक बचाव के उपाय बने रहेंगे।