देवधारा बस्ती में उमड़ा आस्था का सैलाब: विराट हिंदू सम्मेलन में गूंजा समरसता और सांस्कृतिक चेतना का स्वर
| योगेश शर्मा
जयपुर। राजधानी के मुरलीपुरा क्षेत्र स्थित विजयनगर की देवधारा बस्ती में रविवार को भक्ति, शक्ति और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम देखने को मिला। रामेश्वरधाम कॉलोनी के महेश पब्लिक स्कूल परिसर में सकल हिंदू समाज के तत्वावधान में आयोजित ‘विराट हिंदू सम्मेलन’ आध्यात्मिक उत्साह और सांस्कृतिक भव्यता के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं ने सम्मिलित होकर अपनी गौरवशाली संस्कृति के संरक्षण का संकल्प लिया।

वैचारिक सत्र: “अच्छे कार्य की शुरुआत स्वयं से करें”
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज में एकता, जागरूकता और समरसता की भावना को सुदृढ़ करना था। इस अवसर पर मुख्य वक्ता, पर्यावरण गतिविधि (राजस्थान) के प्रमुख अशोक कुमार शर्मा ने समाज की वर्तमान दशा और दिशा पर गंभीर चिंतन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा:
”धर्म केवल परंपरा नहीं, बल्कि विज्ञान सम्मत जीवन पद्धति है। हमें धर्म के वैज्ञानिक महत्व को समझना और नई पीढ़ी को समझाना होगा। यदि हम समाज और पर्यावरण में परिवर्तन चाहते हैं, तो अच्छे कार्य की शुरुआत हमें स्वयं के आचरण से करनी होगी।”
संतों का सान्निध्य और दिव्य आयोजन
कार्यक्रम को महामंडलेश्वर नर्बदाशंकर जी, मनु महाराज और साध्वी गीतांजलि जी का पावन आशीर्वाद एवं सान्निध्य प्राप्त हुआ। संतों ने अपने संबोधन में सनातन मूल्यों और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का आह्वान किया।
सांस्कृतिक आकर्षण: भस्म आरती से फागोत्सव तक
सम्मेलन के दौरान आयोजित धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुख्य आकर्षणों में शामिल रहे:
- हनुमान चालीसा पाठ व भजन संध्या: सामूहिक पाठ से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया।
- शिव-पार्वती विवाह एवं शिव तांडव: जीवंत झांकियों और नृत्य प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
- महाकाल की तर्ज पर भस्म आरती: उज्जैन के महाकाल मंदिर की तर्ज पर की गई दिव्य भस्म आरती कार्यक्रम का विशेष केंद्र रही।
- सामूहिक महाआरती: श्रद्धालुओं ने अपने घरों से लाए दीपकों को प्रज्वलित कर एक साथ महाआरती की, जिससे परिसर दीपों के आलोक से जगमगा उठा।
सम्मान एवं समापन
कार्यक्रम के अंतिम चरण में फूलों की होली (फागोत्सव) का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालु अबीर-गुलाल और पुष्पों की वर्षा के बीच झूमते नजर आए। इस अवसर पर समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली विभूतियों को स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।
आयोजन समिति ने सभी संतों, अतिथियों और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास दिलाया कि भविष्य में भी समाज को एकजुट करने और सांस्कृतिक चेतना जगाने के ऐसे प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।

