दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के नवजीवन में प्रवेश का आनंदोत्सव: राज्यपाल हरिभाऊ बागडे

दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के नवजीवन में प्रवेश का आनंदोत्सव: राज्यपाल हरिभाऊ बागडे

तक्षशिला-नालंदा जैसी गौरवशाली ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने का आह्वान; बेटियों ने फिर गाड़े सफलता के झंडे

| नरेश गुनानी

बांसवाड़ा/जयपुर, 8 जनवरी 2026 राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने कहा है कि दीक्षांत समारोह केवल उपाधि वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के नवजीवन में प्रवेश का एक आनंदोत्सव है। वे गुरुवार को बांसवाड़ा स्थित गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय (GGTU) के ‘माही भवन’ में आयोजित सप्तम दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।

फ़ोटो टेलीग्राफ टाइम्स

​शिक्षा ही वंचित समाज की मुख्यधारा का आधार

​राज्यपाल ने अपने संबोधन में शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि गरीब, पिछड़े और वंचित समाज को विकास की मुख्य धारा में लाने का एकमात्र सशक्त साधन शिक्षा ही है। उन्होंने विशेष रूप से प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता जताई, क्योंकि यही भविष्य की शिक्षा का मूल आधार है। उन्होंने समाज और शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी तय करते हुए कहा कि सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उपलब्धता सुनिश्चित होनी चाहिए।

​बेटियों का दबदबा: 35 में से 25 गोल्ड मेडल छात्राओं के नाम

​समारोह के दौरान राज्यपाल ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि शैक्षणिक उत्कृष्टता में बेटियां निरंतर आगे बढ़ रही हैं। विश्वविद्यालय के इस दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले 35 विद्यार्थियों में से 25 छात्राएं रहीं। उन्होंने इसे महिला सशक्तिकरण और बदलते सामाजिक परिदृश्य का एक सुखद संकेत बताया।

​विकसित भारत के लिए ‘आत्मविश्वास और परिश्रम’ का मंत्र

​राज्यपाल ने विद्यार्थियों को सफलता के सूत्र देते हुए कहा:

  • आजीवन सीखें: पढ़ाई से बौद्धिक क्षमता विकसित हुई है, लेकिन ज्ञान की खोज जीवन भर जारी रहनी चाहिए।
  • कठोर परिश्रम: सफलता के लिए आत्मविश्वास और आत्मबल अनिवार्य है, जो केवल निरंतर अभ्यास और कठिन मेहनत से ही प्राप्त किया जा सकता है।
  • नैतिक आचरण: नैतिक आचरण हमारी प्राचीन संस्कृति और परंपरा की नींव है, जिसे हर युवा को अपने जीवन में उतारना चाहिए।

​”फिर लौटेगा तक्षशिला-नालंदा का गौरव”

​भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का स्मरण कराते हुए कुलाधिपति ने कहा कि जब विश्व के अन्य देशों में विश्वविद्यालयों की कल्पना भी नहीं थी, तब भारत में तक्षशिला और नालंदा जैसे महान केंद्र मौजूद थे। उन्होंने आह्वान किया कि आज के शैक्षणिक संस्थानों को भारत का वह स्वर्णिम गौरव वापस लाने का संकल्प लेना चाहिए। राष्ट्रभक्ति की भावना के साथ किए गए प्रयास निश्चित रूप से इतिहास को दोहराएंगे।

​दीक्षांत समारोह के मुख्य आंकड़े:

 

​समारोह में राज्यपाल द्वारा कुल 33,329 अभ्यर्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं:

श्रेणी

संख्या

स्नातक (UG)

29,397

स्नातकोत्तर (PG)

3,903

विद्यावाचस्पति (Ph.D.)

29

कुल स्वर्ण पदक (Gold Medals)

35

समारोह के प्रारंभ में विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर केशव सिंह ठाकुर ने स्वागत उद्बोधन दिया और विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा जनजातीय क्षेत्र में शिक्षा के प्रसार के लिए किए जा रहे प्रयासों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

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