नई दिल्ली/कोलकाता / गौरव कोचर/पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हुए 20 बागी सांसद मंगलवार को नई दिल्ली स्थित बंग भवन में राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ एक अहम बैठक करने जा रहे हैं।
इस बैठक के सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार गर्म हो गया है।
बैठक का प्रमुख एजेंडा और रणनीतिक बिंदु
सूत्रों और बीरभूम से सांसद शताब्दी राय की पुष्टि के अनुसार, इस बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और राजनीतिक विषयों पर चर्चा होगी:
- MPLAD (सांसद निधि) फंड का बेहतर उपयोग: चूंकि ये सांसद अब NDA गठबंधन के साथ जुड़ चुके हैं, इसलिए सांसद निधि का उपयोग राज्य सरकार की प्राथमिकताओं और विकासात्मक प्राथमिकताओं के साथ तालमेल बिठाकर करने पर विशेष रणनीति बनाई जाएगी।
- राज्य सरकार के साथ प्रशासनिक समन्वय: विकास कार्यों में दोहराव न हो और योजनाओं का सीधा लाभ जनता तक पहुंचे, इसके लिए राज्य प्रशासन और सांसदों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा।
- संसद सत्र की रणनीति: संसद के चालू सत्र में पश्चिम बंगाल के व्यापक हित से जुड़े प्रमुख मुद्दों को मजबूती से उठाने की रणनीति तैयार की जाएगी।
TMC का विरोध और ‘एंटी-डिफेक्शन’ एक्शन
इन 20 सांसदों के NCPI में शामिल होने के बाद TMC ने आक्रामक रुख अपना रखा है। TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी और महुआ मोइत्रा ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर बागी सांसदों के खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत तत्काल कार्रवाई और सदस्यता रद्द करने की मांग की है।
हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष की ओर से इस दल-बदल को आधिकारिक मान्यता दिया जाना अभी बाकी है, लेकिन संसद में इन सांसदों के बैठने की अलग व्यवस्था पहले ही कर दी गई है।
NCPI-NDA का नया सियासी समीकरण
TMC के दो-तिहाई से अधिक सांसदों का NCPI में विलय और उनका NDA को समर्थन देना बंगाल के नए राजनीतिक परिदृश्य की ओर इशारा करता है। सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक केवल प्रशासनिक तालमेल तक सीमित न रहकर भविष्य की सियासी रणनीतियों और NCPI-BJP के आगामी कदमों पर भी दूरगामी प्रभाव डाल सकती है।