नई दिल्ली/ गौरव कोचर/लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और उनके समर्थकों द्वारा देश की राजधानी में जारी आंदोलन को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। दिल्ली हाई कोर्ट से मिले कड़े निर्देशों के बाद एक्शन में आई दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक और उनके सहयोगियों को जंतर-मंतर से हटा दिया है। कानून व्यवस्था और स्वास्थ्य सुरक्षा का हवाला देते हुए पुलिस प्रशासन ने उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया है, जहाँ डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है।
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हाई कोर्ट की सख्ती के बाद हुई कार्रवाई
लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची (6th Schedule) में शामिल करने और राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अनशन पर बैठे थे। हालांकि, जंतर-मंतर पर बिना अनुमति के लंबे समय तक जमावड़े और सुरक्षा कारणों को देखते हुए मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुँचा था।
हाई कोर्ट ने दिल्ली में कानून व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट के इसी रुख के बाद दिल्ली पुलिस ने भारी बल के साथ जंतर-मंतर पर पहुंचकर वांगचुक और उनके समर्थकों को वहां से हटने का आग्रह किया, और बाद में उन्हें सुरक्षित रूप से सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया।
स्वास्थ्य और सुरक्षा को बताया मुख्य कारण
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह कदम केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए नहीं, बल्कि खुद सोनम वांगचुक के गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए भी उठाया गया है। लगातार अनशन और कड़कड़ाती धूप/मौसम के प्रभाव के कारण उनका शरीर कमजोर हो रहा था।
सफदरजंग अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम उनका मेडिकल चेकअप कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है और अस्पताल में उन्हें सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं व उचित देखभाल दी जा रही है।
राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल तेज
सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाए जाने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई है, जबकि प्रशासन का तर्क है कि दिल्ली की सुरक्षा, आम जनता की सुविधा और अदालती आदेशों का पालन करना उनकी पहली प्राथमिकता है। सोशल मीडिया पर भी इस घटनाक्रम को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं, जहां लोग सरकार से लद्दाख के मुद्दों पर जल्द से जल्द बातचीत की मेज पर आने की अपील कर रहे हैं।
क्या हैं लद्दाख आंदोलन की मुख्य मांगें?
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक लद्दाख की पर्यावरण सुरक्षा, वहां के नाजुक ग्लेशियरों को बचाने और स्थानीय लोगों को राजनीतिक अधिकार देने के लिए लेह से दिल्ली तक की एक लंबी ‘पदयात्रा’ कर राजधानी पहुंचे थे। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देना।
- जनजातीय क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए छठी अनुसूची लागू करना।
- स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर और कड़े पर्यावरण संरक्षण नियम।
फिलहाल, एहतियात के तौर पर सफदरजंग अस्पताल के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और पुलिस प्रशासन स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए है। अब देखना यह होगा कि कोर्ट के इस निर्देश और पुलिसिया कार्रवाई के बाद लद्दाख आंदोलनकारी अपनी अगली रणनीति क्या तय करते हैं।