दरगाह में लाइसेंस अनिवार्यता पर विवाद तेज़, सरवर चिश्ती का कड़ा विरोध – उर्स से पहले तनाव बढ़ा
| रिपोर्ट हरि प्रसाद शर्मा पुष्कर
अजमेर/ विशेष रिपोर्ट
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की प्रसिद्ध दरगाह में जियारत करवाने वाले खादिमों के लिए लाइसेंस अनिवार्य करने के फैसले ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। दरगाह कमेटी द्वारा केंद्र सरकार और कोर्ट के निर्देशों के आधार पर लागू की जा रही इस नई नीति को लेकर अंजुमन सैयद जादगान के सचिव सैयद सरवर चिश्ती ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने इसे “तुगलकी फरमान” बताते हुए कहा कि खादिम समाज इस आदेश को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेगा।
नई लाइसेंस व्यवस्था: आवेदन प्रक्रिया शुरू, 5 जनवरी अंतिम तिथि
दरगाह नाजिम मोहम्मद बिलाल खान ने 1 दिसंबर को विज्ञापन जारी कर खादिमों के लिए जियारत लाइसेंस आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इसमें—
- 5 जनवरी 2026 आवेदन करने की अंतिम तिथि है
- दावा किया गया है कि नई व्यवस्था कोर्ट के निर्देशों और नियमों के अनुसार है
- उद्देश्य व्यवस्था को पारदर्शी और अनुशासित बनाना बताया गया है
लेकिन आदेश जारी होते ही दरगाह परिसर में विरोध की लहर दौड़ गई।
सरवर चिश्ती का आरोप: नाजिम की नियुक्ति अवैध, कमेटी पर मनमानी का आरोप
खादिम समुदाय की बैठक में सैयद सरवर चिश्ती ने नाजिम तथा दरगाह कमेटी पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा—
- “नाजिम की नियुक्ति ही अवैध है, दरगाह कमेटी का अस्तित्व संदेह के घेरे में है।”
- “बिना संवाद और चर्चा के आदेश लागू कर खादिम समुदाय को अपमानित करने की कोशिश की गई है।”
- “ऐक्ट में गरीब खादिमों के मेंटेनेंस की व्यवस्था का प्रावधान है, लेकिन कमेटी कुछ नहीं करती।”
चिश्ती ने दावा किया कि—
- दरगाह के चाबी रजिस्टर का एक साल से पता नहीं
- दरगाह में ‘दादागिरी’ का माहौल बनाया जा रहा है
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा—
“आज बैठक में कुछ लोग आए हैं, लेकिन यदि हमने आवाज दी तो 10 हजार खादिम दरगाह में भर जाएंगे। हमारे लाखों अनुयायी हैं, हमारी सहनशीलता को कमजोरी न समझा जाए।”
उर्स से पहले आदेश जारी होने पर उठे सवाल
चिश्ती ने आरोप लगाया कि उर्स से पहले जानबूझकर ऐसे विवादित आदेश जारी किए जाते हैं जिससे व्यवस्थाएं बाधित हों।
उन्होंने कहा—
“उर्स करीब है, और फिर नया बखेड़ा खड़ा कर दिया गया है। खादिम समुदाय कमजोर नहीं है। हमें हल्के में लेना बड़ी भूल होगी।”
प्रशासन की मौजूदगी में खादिमों ने रखी शिकायतें
उधर, जिला कलेक्टर लोकबंधु, एसपी वंदिता राणा और अन्य अधिकारियों ने उर्स व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर रहे थे।
इसी दौरान सरवर चिश्ती ने प्रशासन के सामने नाजिम के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी रखी और कहा—
- नियमों और मंत्रालय के आदेशों में कहीं भी ऐसी लाइसेंस अनिवार्यता का सीधा उल्लेख नहीं
- दरगाह कमेटी बिना अधिकार मनमर्जी के फैसले ले रही है
प्रशासन ने सभी पक्षों की बातें सुनीं, लेकिन कोई अंतिम निर्णय अभी नहीं किया गया है।
उर्स से पहले तकरार गहराई, समाधान की चुनौती
दरगाह में लाइसेंस व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब उर्स से पहले बड़ा मुद्दा बन चुका है। एक ओर दरगाह कमेटी नियमों और कोर्ट आदेशों का हवाला दे रही है, वहीं दूसरी ओर खादिम समुदाय इसे अपने अधिकारों पर हमला बता रहा है।
अब नज़र प्रशासन पर है कि वह इस तनातनी को कैसे शांत करता है—
- क्या लाइसेंस व्यवस्था पर पुनर्विचार होगा
- या कमेटी के निर्णय को ही लागू किया जाएगा
- और क्या खादिमों की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए कोई नई पहल की जाएगी
अजमेर दरगाह में बढ़ता यह विवाद आने वाले दिनों में और भी तूल पकड़ सकता है, खासकर तब जब लाखों जायरीन उर्स के लिए अजमेर पहुंचने वाले हैं।