थोक मूल्य सूचकांक (WPI) जुलाई 2025: सब्ज़ियों और तिलहन में तेज़ बढ़ोतरी, ईंधन और निर्माण क्षेत्र में स्थिरता

थोक मूल्य सूचकांक (WPI) जुलाई 2025: सब्ज़ियों और तिलहन में तेज़ बढ़ोतरी, ईंधन और निर्माण क्षेत्र में स्थिरता

रिपोर्ट: टेलीग्राफ टाइम्स /अवधेश बामल/ नई दिल्ली 
By : प्रीति बालानी 
टेलीग्राफ टाइम्स

नई दिल्ली, 14 अगस्त 2025 — वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2025 में सभी वस्तुओं का WPI 154.4 रहा, जो जून के 153.8 से मामूली वृद्धि दर्शाता है। पिछले छह महीनों में यह लगातार दूसरे महीने का उछाल है, जिसमें प्रमुख योगदान प्राथमिक वस्तुओं, विशेषकर सब्ज़ियों और तिलहन से आया।

प्राथमिक वस्तुएं: खाद्य पदार्थों में मिला-जुला रुझान

  • प्राथमिक वस्तुओं का सूचकांक जुलाई में 188.0 पर पहुंचा, जो जून के 185.8 से अधिक है।
  • सब्ज़ियों का WPI 219.2 से बढ़कर 246.5 हो गया, जिसमें आलू (233.6) और प्याज (193.5) में तेज़ी रही।
  • तिलहन में भी लगातार तेजी रही, जून के 190.6 से बढ़कर जुलाई में 197.8 हो गया।
  • दालों में गिरावट जारी रही, सूचकांक 197.0 से घटकर 195.9 पर पहुंचा।
  • फल के दाम लगातार गिरते रहे, जून के 204.1 से घटकर जुलाई में 191.0
  • दूध और अंडे, मांस, मछली के दाम लगभग स्थिर रहे।

गैर-खाद्य और खनिज क्षेत्र

  • गैर-खाद्य प्राथमिक वस्तुओं में वृद्धि हुई, WPI 164.3 पर पहुंचा।
  • खनिज में हल्की गिरावट (231.5 से 229.0) रही, जबकि कच्चा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस 136.8 से बढ़कर 140.3 पर पहुंचा।

ईंधन और बिजली: सीमित उतार-चढ़ाव

  • इस श्रेणी का WPI 143.0 से बढ़कर 144.6 हो गया।
  • पेट्रोल और एचएसडी (डीजल) में हल्की वृद्धि, जबकि रसोई गैस के दाम 118.8 से गिरकर 115.2 पर पहुंचे।

निर्मित उत्पाद: लगभग स्थिर स्थिति

  • निर्मित उत्पाद का WPI 144.8 से मामूली गिरकर 144.6 रहा।
  • वनस्पति एवं पशु तेल और वसा में लगातार गिरावट, जुलाई में 182.2 रहा।
  • पहनने योग्य परिधान में हल्की तेजी, 156.0 पर पहुंचा।
  • मूल धातु श्रेणी में गिरावट (138.8 से 137.5) और हल्का इस्पात भी घटकर 116.2 रहा।
  • सीमेंट, चूना और प्लास्टर में हल्की बढ़त 133.1 पर रही।

विशेषज्ञों का मानना है कि सब्ज़ियों और तिलहन के दाम में तेजी मॉनसून की अनियमितता और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के कारण हुई। वहीं, ऊर्जा कीमतों में स्थिरता और निर्माण क्षेत्र में धीमी गति से बदलाव से कुल मुद्रास्फीति पर दबाव सीमित रहा।

 

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