त्रिनेत्र गणेश लक्खी मेला 2025 : दूसरे दिन श्रद्धा, उल्लास और रिमझिम बारिश के बीच उमड़ा आस्था का सैलाब

त्रिनेत्र गणेश लक्खी मेला 2025 : दूसरे दिन श्रद्धा, उल्लास और रिमझिम बारिश के बीच उमड़ा आस्था का सैलाब

27 अगस्त 2025, 08:35 PM
जयपुर/सवाई माधोपुर, 27 अगस्त। रिपोर्ट सत्यनारायण। संपादन गणेश शर्मा।टेलीग्राफ टाइम्स 

सवाई माधोपुर जिले के रणथंभौर दुर्ग स्थित विश्व प्रसिद्ध त्रिनेत्र गणेश मंदिर में चल रहे तीन दिवसीय वार्षिक लक्खी मेले के दूसरे दिन बुधवार को गणेश चतुर्थी के पावन पर्व ने श्रद्धा और उल्लास का अनूठा संगम रच दिया। लाखों की संख्या में श्रद्धालु दुर्गम पहाड़ी मार्ग चढ़ते हुए जयकारों की गूँज के बीच मंदिर पहुँचे। भक्तों ने विशेष श्रृंगार के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना की।

Photo credit Telegraph Times

बारिश भी नहीं रोक सकी आस्था की बाढ़

सुबह से दिनभर रिमझिम वर्षा होती रही, मगर श्रद्धालुओं का उत्साह थमा नहीं। भीगते हुए भी वे “गणपति बप्पा मोरिया” के जयकारों के साथ मंदिर की ओर बढ़ते रहे। भीड़ इतनी रही कि मार्ग पर कदम रखने की जगह तक नहीं मिली, लेकिन प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट की ओर से की गई पुख्ता व्यवस्थाओं के चलते श्रद्धालुओं को दर्शन सुचारू रूप से होते रहे।

Photo credit Telegraph Times

भंडारों में झलकी मान-मनुहार

सवाई माधोपुर से रणथंभौर तक मेले के रास्ते में जगह-जगह सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, व्यापारिक मंडलों और भामाशाहों ने श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए भंडारे सजाए। श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप पूरी-सब्जी, खीर-मालपुआ, जलेबी-कचोरी, चाय-नाश्ता, शरबत और काढ़ा तक परोसा गया। हर भंडारे पर श्रद्धालु आत्मीयता और कृतज्ञता से प्रसादी ग्रहण करते नजर आए।

प्रशासनिक तैयारियों की रही सराहना

श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए प्रशासन ने सख्त व सुनियोजित इंतजाम किए। मेले को 10 जोनों में बाँटा गया, जहाँ 1500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात रहे। पुरुष और महिलाओं की कतारें अलग-अलग रखी गईं। रोडवेज की 55 बसें श्रद्धालुओं के आवागमन में जुटीं। नदियों-नालों पर गोताखोर तैनात रहे और पूरे क्षेत्र की निगरानी सीसीटीवी कैमरों से की गई।

Photo credit Telegraph Times

त्रिनेत्र गणेश जन्मोत्सव ने बढ़ाई भव्यता

गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के जन्मोत्सव का आयोजन भी हुआ। मंदिर में प्रातः मंगला आरती, सुबह 9 बजे महाआरती और दोपहर 12 बजे जन्मोत्सव का विशेष अनुष्ठान हुआ। इस दौरान भगवान त्रिनेत्र गणेश को रिद्धि-सिद्धि एवं पुत्र शुभ-लाभ के साथ विशेष श्रृंगार में सजाया गया। दर्शन के समय मंदिर परिसर का वातावरण भक्तिरस और आस्था से सराबोर हो गया। मान्यता है कि विश्व में यही एकमात्र स्थान है जहाँ भगवान त्रिनेत्र गणेश अपनी पत्नियों और पुत्रों के साथ विराजमान हैं।

ऐतिहासिक रूप से सफल रहा दूसरा दिन

तीन दिवसीय इस वार्षिक मेले के दूसरे दिन आस्था, भक्ति, उत्साह और प्रशासनिक अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला। लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बावजूद व्यवस्थाएँ अनुशासित और सहज बनी रहीं। रणथंभौर की वादियाँ गणपति बप्पा के जयकारों से गूँज उठीं और लक्खी मेले की परंपरा, भव्यता और भक्ति का ऐतिहासिक रंग देखने को मिला।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

Block title
Related

विकसित भारत 2047 की परिकल्पना: सुरेश ज्ञान विहार विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय शिक्षा शिखर सम्मेलन का शुभारंभ

जयपुर।/योगेश शर्मा/सुरेश ज्ञान विहार विश्वविद्यालय (एसजीवीयू), जयपुर में तीन...