तीन सौ कार्यकर्ताओं ने लिया युग चेतना विस्तार का संकल्प, सितंबर में जयपुर में जुटेगा 10 हजार श्रद्धालुओं का महाकुंभ

गायत्री परिवार जयपुर उपजोन की समीक्षा कार्यशाला संपन्न; तहसील और ग्राम पंचायत स्तर तक सक्रिय होगा संगठन

वर्ष 2027 में हरिद्वार में होने वाले विराट अश्वमेध महायज्ञ को लेकर देशव्यापी साधना अभियान का खाका तैयार

जयपुर। योगेश शर्मा 

मानव में देवत्व का उदय और धरती पर स्वर्ग के अवतरण के संकल्प को लेकर विचार क्रांति अभियान में जुटे गायत्री परिवार का जयपुर उपजोन स्तरीय महामंथन संपन्न हुआ। मानसरोवर के किरण पथ स्थित वेदना निवारण केन्द्र पर आयोजित इस विशेष समीक्षा कार्यशाला में जयपुर शहर, जयपुर ग्रामीण, सीकर, टोंक और दौसा जिले के करीब 300 वरिष्ठ कार्यकर्ताओं और प्रज्ञापुत्रों ने सहभागिता की। कार्यशाला में सर्वसम्मति से युग चेतना के संदेश को ढाणी-ढाणी और जन-जन तक पहुंचाने तथा संगठन के ढांचे को तहसील एवं ग्राम पंचायत स्तर तक सुदृढ़ व सक्रिय करने का ऐतिहासिक संकल्प लिया गया।

मंगलाचरण और दीप प्रज्ज्वलन से शुरुआत

​कार्यक्रम का शुभारंभ शांतिकुंज (हरिद्वार) के राजस्थान जोन समन्वयक गौरीशंकर सैनी, शांतिकुंज प्रतिनिधि जे.पी. चौधरी, गायत्री परिवार राजस्थान के मुख्य ट्रस्टी ओमप्रकाश अग्रवाल, प्रांतीय ट्रस्टी सतीश भाटी, डॉ. प्रशांत भारद्वाज, प्रांतीय सह-समन्वयिका गायत्री कचोलिया एवं वेदना निवारण केंद्र के व्यवस्थापक आर.डी. गुप्ता ने वेदमाता गायत्री और परम पूज्य गुरुसत्ता (पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य व माता भगवती देवी शर्मा) के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। इसके पश्चात जिला समन्वयकों एवं विभिन्न शक्तिपीठों के ट्रस्टियों ने अतिथियों का तिलक लगाकर और पीला दुपट्टा ओढ़ाकर भावभीना स्वागत किया। प्रांतीय सह-समन्वयिका गायत्री कचोलिया ने अपनी सुमधुर आवाज में प्रेरणादायी प्रज्ञा गीतों की प्रस्तुतियां देकर उपस्थित कार्यकर्ताओं में नए उत्साह और ऊर्जा का संचार किया।

2027 में हरिद्वार में होगा विराट अश्वमेध स्तर का महाआयोजन

​संगठन विस्तार और साधना अभियान की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए शांतिकुंज प्रतिनिधि जे.पी. चौधरी ने कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया। इस दौरान राजस्थान जोन समन्वयक गौरीशंकर सैनी ने एक बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि शांतिकुंंज हरिद्वार के तत्वावधान में संपूर्ण देश में एक सघन साधना अभियान चलाया जा रहा है।

​”इस राष्ट्रव्यापी साधना अभियान की भव्य पूर्णाहुति वर्ष 2027 में शांतिकुंज हरिद्वार में विराट अश्वमेध स्तर के ऐतिहासिक महाआयोजन के साथ होगी। इस महायज्ञ में वही साधक व परिजन मुख्य रूप से भाग ले सकेंगे, जो शांतिकुंज के तय मापदंडों के अनुसार साधना के लिए अपना अग्रिम पंजीयन करवाएंगे। साधकों की सुविधा के लिए विशेष ‘साधना किट’ भी शांतिकुंज से ही उपलब्ध करवाई जा रही है।”

— गौरीशंकर सैनी, राजस्थान जोन समन्वयक

 

सितंबर 2026 में जयपुर में होगा प्रांतीय सम्मेलन और प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव

​गायत्री परिवार राजस्थान के मुख्य ट्रस्टी ओमप्रकाश अग्रवाल ने आगामी कार्ययोजना साझा करते हुए बताया कि इसी वर्ष सितंबर 2026 में गुलाबी नगरी जयपुर में राजस्थान प्रांत का एक विशाल त्रैदिवासीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसी भव्य आयोजन के अंतर्गत मानसरोवर स्थित वेदना निवारण केन्द्र में नवनिर्मित देव-विग्रहों का ‘प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव’ भी संपन्न होगा। इस दोहरे ऐतिहासिक प्रसंग पर राजस्थान भर से करीब 10 हजार से अधिक गायत्री परिजनों और श्रद्धालुओं के जयपुर जुटने की संभावना है, जिसकी तैयारियां अभी से प्रारंभ कर दी गई हैं।

तहसील समन्वयकों का सम्मान और 11 नए मंडलों का गठन

​समीक्षा सत्र के दौरान विभिन्न जिलों के समन्वयकों— हीरालाल शर्मा, रूपनारायण मामोड़िया, महावीर शर्मा, केदार शर्मा एवं संतोष गुप्ता ने अपने-अपने क्षेत्रों में निर्धारित लक्ष्यों, रचनात्मक कार्यों और अब तक की सांगठनिक उपलब्धियों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया।

​कार्यशाला में जिन तहसीलों में नई समन्वय समितियों का गठन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है, वहां के नवनियुक्त समन्वयकों को मंच पर दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही संगठन को गति देने के लिए 11 नए प्रज्ञा मंडलों के गठन की घोषणा की गई। कार्यशाला में मौजूद सभी शाखाओं के प्रतिनिधियों से शत-प्रतिशत देव-परिवारों को नियमित ‘अंशदान’ (समयदान और अंशदान संकल्प) से जोड़ने का आह्वान किया गया। युग साहित्य के लोक-व्यापीकरण के उद्देश्य से इस दौरान 70 प्रज्ञा परिजनों ने ‘ज्ञान घट किट’ प्राप्त कर घर-घर अलख जगाने का संकल्प लिया।

कुशल मंच संचालन

​कार्यशाला के सभी सत्रों का बेहद व्यवस्थित और सुचारू संचालन उपजोन समन्वयक सुशील कुमार शर्मा ने किया। अंत में वेदना निवारण केंद्र प्रबंधन की ओर से सभी आगंतुक कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया गया और शांति पाठ के साथ कार्यशाला का समापन हुआ।

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