जयपुर/ नरेश गुनानी/महज तीन माह की उम्र, लगातार तेज बुखार, बढ़ा हुआ लिवर व तिल्ली, बेहद कम ब्लड सेल्स और सांस लेने में गंभीर परेशानी—जब इस मासूम को भांकरोटा (जयपुर) स्थित गीतांजली हॉस्पिटल लाया गया, तब उसकी स्थिति अत्यंत नाजुक और चिंताजनक थी। बच्चा बेहोशी की अवस्था में था और जांच में उसका डब्लूबीसी (WBC) काउंट लगभग शून्य पाया गया था, जिससे मामूली संक्रमण भी उसके लिए प्राणघातक हो सकता था।
लेकिन, गीतांजली हॉस्पिटल की विशेषज्ञ मेडिकल टीम के त्वरित निर्णय, सटीक डायग्नोसिस और निरंतर पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर के चलते इस मासूम को आखिरकार नया जीवन मिल गया है।
क्या है एचएलएच (HLH) बीमारी?
विस्तृत जांच और डायग्नोस्टिक मानकों के आकलन के बाद बच्चे में एचएलएच (Hemophagocytic Lymphohistiocytosis – HLH) की पुष्टि हुई।
- दुर्लभता: यह एक अत्यंत दुर्लभ बीमारी है, जो लगभग दस लाख में से किसी एक व्यक्ति को प्रभावित करती है।
- जोखिम: इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) असामान्य रूप से अत्यधिक सक्रिय हो जाती है, जो स्वस्थ रक्त कोशिकाओं और महत्वपूर्ण अंगों को ही नुकसान पहुंचाने लगती है।
- गंभीरता का अंदाजा: एचएलएच की घातकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जुलाई 2026 में अफगानिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शापूर जादरान का 38 वर्ष की आयु में इसी बीमारी से लड़ते हुए निधन हो गया था।
भटकने के बाद गीतांजली हॉस्पिटल पहुंचे परिजन
मासूम के पिता ने बताया कि बच्चे के इलाज के लिए वे पूर्व में कई अस्पतालों के चक्कर काट चुके थे, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं आ रहा था। लगातार बिगड़ती हालत को देखते हुए परिजनों की सलाह पर वे गीतांजली इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के डीन एवं प्रिंसिपल तथा पीडियाट्रिक्स विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक गुप्ता से परामर्श करने भांकरोटा पहुंचे।
विशेषज्ञ टीम का जीवनरक्षक प्रयास
डॉ. अशोक गुप्ता के मार्गदर्शन में अस्पताल की विशेषज्ञ टीम ने बच्चे को तुरंत पीडियाट्रिक आईसीयू (PICU) में भर्ती कर उपचार शुरू किया।
- चुनौतीपूर्ण प्रबंधन: संक्रमण के गंभीर खतरे को देखते हुए बच्चे की 24 घंटे लगातार निगरानी की गई और चरणबद्ध तरीके से सटीक दवाइयां शुरू की गईं।
- समर्पित टीम: इस चुनौतीपूर्ण केस में इंटेंसिविस्ट डॉ. रामकेश मीना, डॉ. विनोद शर्मा, डॉ. डी. हरिणी, डॉ. ईशा, डॉ. मयंक, डॉ. कंगना, डॉ. विष्णु, डॉ. गौरव तथा रेजिडेंट डॉक्टर्स और नर्सिंग स्टाफ की सराहनीय भूमिका रही।
चमत्कारिक सुधार: शून्य से 12,000 पहुंचा डब्लूबीसी काउंट
सटीक इलाज के बाद बच्चे के स्वास्थ्य में अभूतपूर्व सुधार दर्ज किया गया:
- रक्त कोशिकाओं में वृद्धि: लगभग शून्य हो चुका डब्लूबीसी (WBC) काउंट सुधरकर 12,000 के सामान्य स्तर तक पहुंच गया।
- प्लेटलेट्स व हीमोग्लोबिन: प्लेटलेट्स और हीमोग्लोबिन में तेजी से सुधार देखा गया।
- अंगों की स्थिति सामान्य: बच्चे का बुखार पूरी तरह नियंत्रित हो चुका है तथा बढ़ा हुआ लिवर और तिल्ली भी अब सामान्य स्थिति में आ रहे हैं।
विशेषज्ञों का संदेश
केस की सफलता पर डॉ. अशोक गुप्ता ने कहा:
“एचएलएच जैसी जटिल बीमारियों में समय पर सही पहचान, सटीक डायग्नोसिस और विशेषज्ञ बहु-विषयक (Multidisciplinary) पीडियाट्रिक टीम का तालमेल ही मरीज की जान बचा सकता है। यह मामला मेडिकल साइंस और समर्पित केयर की एक बड़ी जीत है।”