तारागढ़ पर लहराया पृथ्वीराज चौहान का ध्वज: वीरता, स्वाभिमान और संस्कृति का पुनर्जागरण
Edited By: नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
मई 23, 2025
अजमेर, 23 मई (हरिप्रसाद शर्मा):
अजमेर के ऐतिहासिक तारागढ़ दुर्ग ने शुक्रवार को एक गौरवशाली क्षण का साक्षी बनकर इतिहास को पुनर्जीवित कर दिया। वीर सम्राट पृथ्वीराज चौहान के वंशजों, संतों, भूतपूर्व सैनिकों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति में सम्राट का ध्वज दुर्ग के मुख्य द्वार पर लहराया गया। यह आयोजन केवल एक ध्वजारोहण नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना, आत्मसम्मान और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बन गया।
ध्वजारोहण का शुभारंभ और जनसमुदाय की भागीदारी
प्रातः 7:00 बजे तारागढ़ दुर्ग के मुख्य द्वार पर भारत माता की जयघोष और विजय नाद के बीच सम्राट पृथ्वीराज चौहान के ध्वज का अनावरण किया गया। इस ऐतिहासिक क्षण में 52 कोस के क्षेत्र से आए चौहान वंशज पारंपरिक राजपूती परिधान में सम्मिलित हुए। साथ ही, महिलाओं एवं बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लेकर आयोजन को जन-जन का पर्व बना दिया।
संस्कृति और शौर्य का संगम
इस अवसर पर साध्वी अनादि सरस्वती ने अपने उद्बोधन में कहा, “यह आयोजन केवल एक झंडा फहराने का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जागरण और आत्मगौरव की पुनर्प्रतिष्ठा है। सम्राट पृथ्वीराज चौहान का जीवन हमें बताता है कि धर्म और मातृभूमि की रक्षा के लिए संघर्ष ही सच्चा जीवन है।”
सनातन धर्म रक्षा संघ के अध्यक्ष एवं पूर्व न्यायाधीश अजय शर्मा ने कहा, “तारागढ़ दुर्ग की प्राचीरों ने पृथ्वीराज चौहान की वीरता देखी है, और आज उसी शौर्य को पुनः जीने का अवसर हमें प्राप्त हुआ है। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।”
इतिहास और धरोहर संरक्षण की पुकार
कार्यक्रम संयोजक तरुण वर्मा ने तारागढ़ के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह विश्व का प्रथम पहाड़ी दुर्ग है, जिसे अंग्रेजों ने जिब्राल्टर से भी अधिक मजबूत माना था। उन्होंने दुर्ग की जीर्ण-शीर्ण स्थिति पर चिंता जताते हुए इसके संरक्षण की मांग की। साथ ही, सम्राट पृथ्वीराज चौहान और उनके परम मित्र चंद्रवरदाई की विशाल आदमकद मूर्तियों को दुर्ग परिसर में स्थापित करने की मांग भी रखी।
गौरवशाली उपस्थिति और भावनात्मक क्षण
कार्यक्रम में रावत चंद्र सिंह चौहान (पूर्व एडीएसपी), डॉ. शैतान सिंह, आनंद प्रकाश गोयल, डॉ. कुलदीप शर्मा (अखिल भारतीय सह मंत्री, विश्व हिंदू परिषद), सुरेंद्र सिंह रावत, हेम सिंह वर्मा, अशोक सोनी, विजय सिंह, सैयद अखिल हुसैन समेत कई गणमान्य नागरिक, भूतपूर्व सैनिक और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
वीर रस की कविता से कार्यक्रम में जोश
कवि विजय कुमार शर्मा द्वारा प्रस्तुत वीर रस की कविता ने उपस्थित जनसमुदाय में जोश का संचार कर दिया। कविता की पंक्तियों में पृथ्वीराज चौहान की वीरता, बलिदान और राष्ट्रप्रेम का जीवंत चित्रण किया गया, जिसे सुनकर जनसमूह ने तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया।
संस्कृति, इतिहास और भविष्य की ओर एक प्रेरणादायी पहल
यह आयोजन न केवल एक ऐतिहासिक स्मृति बनकर रह गया, बल्कि राष्ट्र गौरव, सांस्कृतिक जागरूकता और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल सिद्ध हुआ। तारागढ़ दुर्ग पर फहराया गया सम्राट पृथ्वीराज चौहान का ध्वज आने वाली पीढ़ियों को उनके गौरवशाली इतिहास की याद दिलाता रहेगा।